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विपक्षी ने कहा : जीएसटी का प्रकोप दिखना शुरू,अब आयुष्मान भारत का सच आना बाकी

सहयोगी दल आजसू ने कहा: कुछ कमी के कारण राजस्व में आयी कमी

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Ranchi : जीएसटी लागू होने के बाद झारखंड के राजस्व में आयी कमी को विपक्षी दलों ने सरकार की प्रशासनिक निकम्मापन बताया है. साथ ही कहा कि जीएसटी का प्रकोप अब दिखने लगा है. कांग्रेस ने कहना है कि झारखंड केंद्र को राजस्व देने वाला एक बड़ा राज्य है. लेकिन सरकार की लचर प्रशासनिक व्यवस्था के कारण ही राजस्व को नुकसान हुआ है. लोगों को उनके मूलभूत सुविधाओं से वंचित कर भाजपा ने कफन पर भी जीएसटी लगाने का काम किया है. जेएमएम का कहना है कि यह भाजपा सरकार की एक योजना का हश्र है. अभी तो आयुष्मान भारत योजना का सच आना बाकी है. वहीं सरकार के सहयोगी दल आजसू का कहना है कि इससे साफ है कि जीएसटी लागू करने में कुछ न कुछ कुछ कमी रह गयी थी, जिसके कारण राज्य के राजस्व को नुकसान हुआ.

मालूम हो कि गत शुक्रवार को नगर विकास मंत्री सीपी सिंह ने कहा था कि जीएसटी लागू होने के बाद झारखंड का राजस्व कम हुआ है. अगस्त 2017 से अगस्त 2018 की अवधि में राजस्व में कुल 17 प्रतिशत की कमी हुई है. 

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लचर प्रशासनिक व्यवस्था से हुई राजस्व में कमी : सहाय

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुबोध कांत सहाय ने न्यूज विंग को बताया कि जीएसटी के कारण राज्य को हुई राजस्व की कमी एक तरह से सरकार की प्रशासनिक निकम्मापन और लचर व्यवस्था को उजागर करती है. आज मोदी और रघुवर सरकार के शासन में एक तरह से कफऩ तक में जीएसटी लागू कर दिया गया है. जबकि आज जनता को उनकी मूलभूत सुविधाओं से सरकार वंचित रख रही है. पेट्रोल, गैस का मूल्य आसमान पर है, लेकिन सरकार को इसकी तनिक भी चिंता नहीं है. उन्होंने बताया कि बिहार विभाजन के पहले से ही झारखंड एक औद्योगिक राज्य रहा है. लेकिन भाजपा शासन में यह दर्जा छिनता जा रहा है. उद्योग बंद हो रहे है. लोग बेरोजगार हो रहे है.

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अब तो मंत्रियों के कथन पर बयान देने में आती हैं शर्म : कुणाल पाषड़ी

राजस्व कमी के सवाल पर पूर्वी सिंहभूम के जेएमएम विधायक कुणाल षाड़ंगी का कहना है कि अब तो भाजपा के मंत्रियों द्वारा कहे कथन पर बयान देने में भी शर्म आती है. जीएसटी लागू होने के वक्त जेएमएम ने जब इसका विरोध किया, तो सरकार ने हमें विकास विरोधी बताया था. अब भाजपा के मंत्री का ऐसा बयान काफी हस्यास्पद हैं. उन्होंने बताया कि जीएसटी के कारण राजस्व में कमी तो भाजपा द्वारा लागू एक योजना का हश्र है. अभी तो आयुष्मान योजना का सच आना बाकी है. आज मुख्यमंत्री जी के ही गृह जिले में आयुष्मान योजना के अंदर लाभुकों का नाम लिस्ट में नहीं है. पूरे जिले में एक ढ़ग का भी अस्पताल नहीं है.

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मंत्रियों की कोई नहीं सुनता, तो जनता की कौन सुनेगा

जीएसटी के बहाने विधायक कुणाल ने भाजपा मंत्रिपरिषद में शामिल मंत्रियों की पीड़ा सामने रखी. उन्होंने कहा कि आज राज्य के मंत्रियों को कौन सुनता है. भाजपा के वरिष्ठ नेता और खाद्य आपूर्ति मंत्री सरयू राय को थाना जाना पड़ता है. पुलिस स्टेशन के थानेदार मंत्री सरयू राय का फोन करीब ढाई घंटा तक नहीं उठाते है. जब मंत्रियों की स्थिति हैं, तो राज्य की जनता के हितों को कौन सुनेगा, यह सोंचा जा सकता है.

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कुछ कमी होगी, तभी हुआ राजस्व का नुकसान :  देवशरण भगत

वहीं भाजपा के ही सहयोगी दल आजसू के प्रवक्ता देवशरण भगत का कहना है कि नगर विकास मंत्री का राजस्व घाटा पर बयान राज्य के लिए काफी चिंतनीय है. यह साफ है कि जीएसटी लागू करने में कई न कई कुछ कमी रह गयी थी, जिसके कारण राज्य के राजस्व को नुकसान हुआ.

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