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एनआरसी को चुनावी मुद्दा बनाने पर विपक्ष ने कहा- बुनियादी मांगों से भटकाने की है कोशिश

Ranchi :  झारखंड में एक कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि उनकी सरकार पूरे देश में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) को लागू करेगी. मुख्यमंत्री रघुवर दास भी समय-समय पर इसे लागू करने की बात करते रहे हैं.

बीजेपी नेताओं के इस बयान ने झारखंड सहित हरियाणा और महाराष्ट्र में होनेवाले आगामी विधानसभा चुनाव में एऩआरसी को फिर से पार्टी का एक प्रमुख चुनावी मुद्दा बना दिया है. बीजेपी 2018 से ही इसे अपना एक बड़ा चुनावी हथियार बना रही है. अमित शाह के बयान के बाद न्यूज विंग ने राज्य की तमाम पार्टियों से प्रतिक्रिया ली. आजसू को छोड़ सभी का यही कहना था कि ऐसा कर बीजेपी जनता को उनकी बुनियादी मांगों से भटका रही है.

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पश्चिम बंगाल में मारी थीं सेंध

एऩआरसी एक ऐसा दस्तावेज है, जिससे पता चलता है कि कौन देश का नागरिक है और कौन नहीं. जिनके नाम इसमें शामिल नहीं होते हैं, उन्हें अवैध नागरिक माना जाता है. इसकी शुरुआत असम राज्य में तथाकथित अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों को लेकर हुई थी. असम में बीजेपी की प्रचंड जीत के पीछे भी यह मुद्दा काफी अहम रहा है. उसके बाद लोकसभा चुनाव में एनआरसी को प्रमुख मुद्दा बना कर बीजेपी ने अपने राजनीतिक विरोधियों के गढ़ (बंगाल) में बड़ी सेंघ मारी थी.

अमित शाह ने कहा था “घुसपैठियों के प्रति उदारता बरतने के मूड में नहीं केंद्र”

लोकसभा चुनाव के पहले से ही बीजेपी अध्य़क्ष अमित शाह एनआरसी को लेकर कहते रहे हैं कि विपक्षी दल चाहे जितना हो-हल्ला करें, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार असम के 40 लाख घुसपैठियों में से एक-एक को बाहर करेगी. केंद्र सरकार घुसपैठियों के प्रति उदारता बरतने के मूड में नहीं है.’ कहा था कि 2019 में सत्ता में आने पर देशभर में खासतौर से पश्चिम बंगाल में एनआरसी और नागरिकता (संशोधन) विधेयक लागू करेंगे. 2020 में बिहार और 2021 में बंगाल में विधानसभा चुनाव होने हैं. उससे पहले बीजेपी की नजर झारखंड सहित अन्य दो राज्यों (हरियाणा और महाराष्ट्र) पर है.

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विपक्षी पार्टियों ने दी अपनी प्रतिक्रिया

एनआरसी को बीजेपी जहां देश हित में उठाया गया कदम बता रही है, तो वहीं बीजेपी विरोधियों का कहना है कि सत्ता में आने के बाद से ही मोदी सरकार रोजगार, आर्थिक विकास जैसे जनहित मुद्दे को हटा कर एऩआरसी जैसे मुद्दे को जनता के समक्ष परोस रही है, ताकि चुनाव जीतने की पार्टी की राह आसान हो सके. इस संदर्भ में न्यूज विंग ने राज्य के तमाम विपक्षी पार्टियों से अमित शाह के बयान पर प्रतिक्रिया ली है.

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बुनियादी मांगों से भटकाने का प्रयास है एनआरसी : सुप्रियो भट्टाचार्य

जेएमएम प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि बीजेपी के लिए एनआरसी मुददा जनता को उनकी बुनियादी मांगों से भटकाने का एक जरिया बन गया है. सरकार को करना ही था, तो उसे बेरोजगारी, स्वास्थ्य, शिक्षा से जुड़े नागरिक रजिस्टर लागू करने पर जोर देना चाहिए. लेकिन ऐसा नहीं कर बीजेपी केवल जनता को बरगलाने के काम में लगी है.

एक वर्ग को खुश कर सभी को तंग कर रही है बीजपी : रामेश्वर उरांव

कांग्रेस प्रदेश अध्य़क्ष रामेश्वर उरांव का कहना है कि एनआरसी लागू करने का काम तो कांग्रेस की पूर्ववर्ती सरकार ने शुरू किया था. 1979 में घुसपैठियों के खिलाफ बढ़ती हिंसा देख 1985 को तत्कालीन राजीव गांधी सरकार ने असम गण परिषद से एक समझौता किया था. समझौते में कहा गया था कि 1971 से पहले जो भी बांग्लादेशी असम में घुसे हैं, उन्हें भारत की नागरिकता दी जायेगी.

कांग्रेस पार्टी को एनआरसी को लेकर कोई दिक्कत नहीं है. दिक्कत तो यह है कि चुनाव के पूर्व ही बीजेपी क्यों इसपर बयानबाजी करती है. दरअसल ऐसा करने के पीछे बीजेपी की मंशा एक वर्ग को खुश कर बाकी सभी वर्गों को तंग करना है, वहीं जनता की मूलभूत जरूरत को नजरअंदाज करना है.

अपार बहुमत से अतिउत्साहित हो गये हैं बीजेपी नेता : अभय सिंह

आरजेडी प्रदेश अध्य़क्ष अभय सिंह का कहना है कि अपार बहुमत पा कर बीजेपी नेता अतिउत्साहित हो गये हैं. यही कारण है कि चुनाव के ठीक पहले वे एऩआरसी जैसे आतार्किक मुद्दे की बात कह रहे हैं. बिहार में उनके डिप्टी सीएम सुशील मोदी भी एनआरसी पर सुप्रीम कोर्ट की स्थिति को लेकर आपत्ति जता चुके हैं. उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव के ठीक पहले पुलवामा हमले को चुनावी स्टंट बनानेवाले बीजेपी नेता इस बार एनआरसी को मुद्दा बना रहे हैं.

कौन चाहेगा कि देश में अवैध नागरिक रहे : देवशरण भगत

आजसू नेता देवशरण भगत का कहना है कि बीजेपी की एनआरसी पॉलिसी पूरी तरह से देश हित में है. देश का ऐसा कौन नागरिक है, जो चाहेगा कि अवैध घुसपैठियों का यहां राज हो. उन्होंने कहा कि एऩआरसी लागू करने से पहले सरकार को टेक्निकल तरीके से देखना चाहिए कि ऐसा करने पर कई वास्तविक नागरिक सूची से बाहर नहीं हो जायें.

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