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यूपी की राह पर झारखंड, महागठबंधन के आसार नहीं, बीजेपी के खिलाफ बन सकते हैं दो गठबंधन

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Akshay / Nitesh

Ranchi : यूपी में लोकसभा चुनाव से पहले जिस तरीके से गठबंधन हुआ है, उसका असर दूसरे राज्यों में साफ तौर से देखा जाएगा. तीन राज्यों में कांग्रेस के कमबैक के बाद कांग्रेस का बॉडी लैंग्वेज अब पहले जैसा नहीं है. झारखंड में कोलेबीरा उप चुनाव में कांग्रेस की जीत के बाद कांग्रेस अपने आप को राज्य में मजबूत होते देख रही है. खोई ताकत वापस आने का नतीजा झारखंड में चुनाव के लिए होने वाले महागठबंधन पर दिखने वाला है. सारा खेल विधानसभा चुनाव के बाद कुर्सी पर काबिज होने वाले नाम पर है. निश्चित तौर से जेएमएम चाहता है कि आम चुनाव से पहले विधानसभा चुनाव के सीट और चेहरे को तय कर दिया जाए. लेकिन बाकी पार्टियां चाह रही है कि आमचुनाव और विधानसभा चुनाव के लिए सिर्फ सीटों पर चर्चा हो. सीएम का नाम और चेहरा उस वक्त की स्थिति देख कर तय हो. इस पेंच में झारखंड में महागठबंधन फंसता नजर आ रहा है. फिलहाल जो स्थिति है, उससे यह साफ है कि महागठबंधन बनने के आसार नहीं हैं.

बीजेपी के खिलाफ बन सकते हैं दो गठबंधन !

महागठबंधन ना बनने की सूरत में क्या होगा ? विधानसभा चुनाव से पहले यह लाख टके का सवाल है. फिलहाल जो समीकरण बन रहे हैं, उससे साफ है कि जेएमएम के साथ वैसी पार्टी गठबंधन कर सकती है, जिसके पास सीएम फेस नहीं है, या फिर झारखंड में जिसका बहुत ज्यादा जनाधार ना हो. ऐसी पार्टियों में आरजेडी और वाम दल आते हैं. इस गठबंधन से जेएमएम का काम आसान होगा और आरजेडी और वामदल को भी जेएमएम के स्पोर्ट से सीटों का फायदा हो सकता है. वहीं दूसरी तरफ आजसू, जेवीएम और कांग्रेस गठबंधन बना कर चुनाव में उतर सकते हैं. आजसू और जेवीएम के पास नेता का चेहरा है. लेकिन कांग्रेस के पास नहीं. तीनों पार्टियां झारखंड में बड़ी पार्टी तो हैं. लेकिन सीटों की संख्या की बात करें तो वो नाकाफी है. गठबंधन में रहकर चुनाव लड़ने के बाद अगर अच्छी स्थिति में पार्टी पहुंचती है, तो किसी भी तरीके से उसका फायदा उठाया जा सकता है.

जानिए कैसे है महागठबंधन ना बनने के संकेत

महागठबंधन के लिए जेएमएम को निजी स्वार्थ से ऊपर उठना होगा : कांग्रेस

महागठबंधन को लेकर कांग्रेस के वरिष्‍ठ नेता ने कहा कि विपक्षी महागठबंधन को लेकर 17 जनवरी को जेएमएम के बुलाये बैठक में कांग्रेस शामिल तो हो रही है, लेकिन इसमें सबसे बड़ी पेंच यह है कि सीट बंटवारे को लेकर जेएमएम कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन के नीजि स्वार्थ आज भी सर्वोपरी है. कहा जेएमएम को स्वार्थ की राजनीति से ऊपर उठकर महागठबंधन के बारे में सोचना चाहिए. उन्होंने कहा कि जेएमएम के राजनीति हावभाव से कांग्रेस पूरी तरह वाकिफ है. पहले भी जेएमएम अपने नीजि हितों को देख भाजपा के साथ सत्ता का सुख भोग चूका है. अब जबकि भाजपा को हराने के लिए राज्य में गठबंधन की बात हो रही है, तो जेएमएम को चाहिए कि वाे नीजि हित से बाहर निकल कर महागठबंधन के बारे में सोंचे.

नेता का चेहरा चुनाव के बाद विधायक तय करें : जेवीएम

महागठबंधन को लेकर जेवीएम के केंद्रीय प्रवक्ता योगेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि जेएमएम ने 17 तारीख को विपक्ष दलों को बुलाया है. जेवीएम शुरू से ही कहना है कि लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव के लिए सीटों के बंटवारा एक साथ हो जाए. लेकिन विधानसभा चुनाव के बाद चुने हुए विधायक तय करें कि महागठबंधन का नेता कौन होगा. अगर जेएमएम किसी एक नाम पर जिद पर अड़ता है, तो यह गलत है. क्योंकि जेवीएम के पास भी नेता है. जब नेता जेएमएम से हो सकता है, तो जेवीएम से क्यों नहीं.

सीएम कौन ? यह तय करना डॉ. अजय का नहीं बल्कि राहुल गांधी का कामः जेएमएम

महागठबंधन पर बात जेएमएम के महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्या ने कहा कि बैठक में गठबंधन के हर पहलू पर चर्चा होगी. आम चुनाव और विधानसभा दोनों के लिए सीट के साथ नेता तय किया जाएगा. एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि महागठबंधन का नेता कौन होगा? वो कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अजय कुमार तय करेंगे या पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी. कहा कि निश्चित तौर पर राहुल गांधी ही तय करेंगे कि चुनाव का चेहरा कौन होगा. वहीं पार्टी से जुड़े विनोद पांडेय ने कहा कि बैठक में आजसू और बीजेपी को छोड़ कर सभी पार्टियों को बुलाया गया है.

कुर्सी नहीं विचार के आधार पर होगा गठबंधनः आजसू

महागठबंधन पर आजसू पार्टी के प्रवक्ता देवशरण भगत ने कहा कि जेएमएम की तरफ से आसजू को कोई बुलावा नहीं है. दोस्ती या गठबंधन का आधार वैचारिक ना होकर सीट और सत्ता का हो तो किसी तरह का गठबंधन किसी के साथ नहीं बन सकता है. यही वजह है कि महागठबंधन का घोल तैयार नहीं हो रहा है. सभी विपक्षी पार्टी चाहती है कि बीजेपी सत्ता से बाहर जाए, लेकिन उससे बड़ी चाहत यह है कि सत्ता पर मैं काबिज हो जाऊं. किसी तरह के गठबंधन के लिए लोगों का सोचना वाजिब है. आजसू कई संवेदनशील विषयों पर सरकार का विरोध करता रहा है. इसी वजह से दूसरी पार्टियां यह मान बैठी है कि पार्टी सरकार को छोड़कर उसके साथ आ जाएगी. यह सब कयासबाजी है. बीते दिनों से पार्टी ने काफी अनुभव लिया है. आने वाले समय में इस अनुभव का उपयोग किया जाएगा. भविष्य में क्या होगा, कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी.

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