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अयोध्या में राम की मूर्ति का विरोधः संतों ने कहा-मंदिर चाहिए, लेकिन किसी को दुख पहुंचाकर नहीं

भगवान राम का स्टैच्यू लगाने का विरोध, निंदा प्रस्ताव पारित

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Kashi: यूपी में जिस तरह से साधु-संतों की भीड़ जुटी है. उससे अनुमान लगाया जा रहा था कि बीजेपी को इनका साथ मिलेगा. लेकिन नजारा इससे इतर है. अयोध्याद के बाद राम मंदिर का मसला सोमवार को काशी की धर्म संसद में भी छाया रहा. धर्म संसद में पीएम मोदी और सीएम योगी आदित्यनाथ का नाम लिए बगैर जमकर हमला बोला गया. साधु-संतों ने अयोध्या में भगवान श्रीराम की 221 मीटर ऊंची प्रतिमा लगाये जाने का विरोध किया और इसे भगवान राम का अपमान बताया. भगवान श्रीराम का स्टैमचू लगाने का न सिर्फ जबरदस्तग विरोध हुआ बल्कि इसको लेकर निंदा प्रस्ता व भी पारित किया गया.

भगवान राम की प्रतिमा लगाये जाने का विरोध

दरअसल सीएम योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश में भगवान राम की 221 मीटर ऊंची मूर्ति लगवाने का फैसला लिया है, जिसके बाद साधु-संतों ने योगी सरकार के इस फैसले की आलोचना की है. संतों का कहना है कि ऐसा लगता है कि भगवान राम और सरदार पटेल के बीच होड़ पैदा की जा रही है. धर्म संसद में कहा गया कि भगवान श्रीराम आराध्य हैं. ऐसे में उनकी मूर्ति लगाने का फैसला आस्था के खिलाफ है.

‘मंदिर चाहिए मूर्ति नहीं’

धर्म संसद में बीजेपी सरकार को आड़े हाथों लेते हुए साधु-संतों ने कहा कि उन्हें अयोध्या में भगवान श्रीराम की ऊंची प्रतिमा नहीं, बल्कि उनका मंदिर चाहिए. बताया जा रहा है कि इस मुद्दे पर बुधवार को शंकराचार्य स्वा मी स्वकरूपानंद सरस्वमती ‘धर्मादेश’ जारी करेंगे. अयोध्या से आए रसिक पीठाधीश्वकर महंत जनमेजय शरण ने धर्म संसद में कहा, ‘भगवान श्रीराम को भी देश के सामान्यी लोगों की तरह दशकों से न्याेय का इंतजार करना पड़े, इससे दुखद और क्याद हो सकता है? वही धर्माचार्य अजय गौतम ने पीएम मोदी का नाम लिए बिना कहा, ‘रामलला टेंट में हैं और उनके छद्म भक्तै लाखों का सूट-बूट पहन कर घूम रहे हैं.

‘राम मंदिर चाहिए लेकिन किसी को तकलीफ पहुंचाकर नहीं’

धर्म संसद में वरिष्ठक साहित्यूकार अजीत वर्मा ने कहा कि रामजन्म भूमि शास्त्रों से जुड़ा विषय है लेकिन राजनीतिक स्वा र्थवश इस मसले में खिलवाड़ हो रहा है. संतों ने कहा, ‘मंदिर का निर्माण जल्द् होना चाहिए लेकिन किसी को दु:ख पहुंचाकर नहीं. साधुओं ने साफ किया कि घृणा फैलाकर रामराज्यं स्थािपित नहीं किया जा सकता है. यह साफ हो चुका है कि अयोध्याा में कोई मस्जिद नहीं थी, इसलिए वहां राम मंदिर हर हाल में बनकर रहेगा.’

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