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बालू लूट की खुली छूटः पुलिस, प्रशासन और दबंगों ने मिलकर कर ली 600 करोड़ की अवैध कमायी-2

Akshay Kumar Jha

Ranchi: पुरानी कहावत है, पुलिस और प्रशासन चाह ले तो शहर में एक पत्ता भी उनकी मर्जी के बिना नहीं हिल सकता. लेकिन झारखंड में बालू के मामले में पुलिस और प्रशासन के अधिकारी इस कहावत को एक कहावत के तौर पर ही लेते हैं. हकीकत की तरह नहीं. इन्हें बालू की अवैध कारोबार से कोई मतलब नहीं है. मतलब है तो सिर्फ और सिर्फ उस कारोबार से हो रही गाढ़ी कमायी से. ऊपर से लेकर नीचे तक इनकी कमायी सबमे बंटती है. हिस्से का वजन कुर्सी और पावर तय करता है. कागज पर तो जीरो करप्शन का सिस्टम है.

लेकिन इस धंधे में सबकुछ दो नंबर है. दो नंबर में बालू का उत्खनन. दो नंबर का चालान. दो नंबर में परिवहन और फिर दो नंबर में ही बिक्री. इनकी पहुंच और पैरवी इतनी पावरफुल है कि ज्यादा चालाकी करने पर दो नंबर वाले एक नंबर वाले को बंधक तक बना ले रहे हैं. सरकार के पास बालू घाट का सुचारू रूप से नहीं चलने का एक मात्र जवाब है कि सरकार स्वयं बालू बेचेगी इसके लिए पर्यावरणीय स्वीकृति की प्रक्रिया चल रही है.

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मची है बालू की लूट, लूट सको तो लूट

आलम देखिए छह-सात सौ रुपए प्रति ट्रैक्टर बिकने वाला बालू अब 18 सौ से दो हजार रुपए प्रति ट्रैक्टर बिक रहा है. इससे जहां आम आदमी अधिक पैसे देकर बालू खरीद रहा है. वहीं सरकार को भी राजस्व का चूना लग रहा है. इसमें अधिकारी और बालू माफिया मालामाल हो रहे हैं. विभिन्न घाटों से बालू का उठाव बेरोक-टोक जारी है. नदियों से अवैध तरीके से बालू का उठाव कर ट्रैक्टरों में लादकर शहर में लाकर बेचा जाता है. लेकिन किसी को कोई नहीं रोक रहा है. सारा काम पैसों के लेनदेन से निबट जा रहा है.

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जानें किसकी है इस लूट में कितनी भागीदारी

–              घाट जहां से बालू का उठाव होता है : 150 रुपये प्रति ट्रैक्टर

–              अंचल कार्यालय (सीओ ऑफिस) के नाम पर : 150 रुपये प्रति ट्रैक्टर

–              थाने के नाम पर : 100 रुपये प्रति ट्रैक्टर

–              परिवहन विभाग के नाम पर : 150 रुपये प्रति ट्रैक्टर

–              खनन विभाग के नाम पर : 200 रुपये प्रति ट्रैक्टर

–              दूसरे गांव , पंचायत के युवाओं की कमेटी : 100 से 150 रुपये प्रति ट्रैक्टर

ऊपर दी गयी सूची के हिसाब के बाद जो नतीजा सामने आ रहा है, वो चौंकाने वाला है. राज्य में 472 बालू घाट हैं. जहां से रोजाना वैध और अवैध तरीके से करीब 35 टैक्टर बालू का उठाव हो रहा है. यानि 16,520 टैक्टर रोज. एक ट्रैक्टर बालू का उठाव करने में 1000 रुपए अवैध तरीके से लिया जाता है. मतलब 1 करोड़ 65 लाख 20 हजार रुपए रोजाना.

एक महीने की कमायी हो गयी करीब 49 करोड़ 56 लाख रुपए. झारखंड में करीब एक साल से बालू का उठाव करीब-करीब बंद है. किसी जिले में 14 महीने से तो किसी जिले में 12 महीने यानि एक साल से. इस हिसाब से एक साल में बालू के धंधे से अवैध कमायी हो जाती है करीब 594 करोड़ 72 लाख रुपए. और यह पैसा सीधा सरकारी अधिकारियों और बालू के कारोबार में जुड़े दबंगों की जेब में जा रहा है.

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