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डेढ़ साल में बदला केवल नाम, बिना प्रैक्टिकल किये अब स्टूडेंट्स देंगे फाइनल एक्जाम

दुमका के फूलो झानो मेडिकल कॉलेज का हाल

Ranchi : झारखंड की उप राजधानी दुमका में अगस्त 2019 में मेडिकल कॉलेज की शुरुआत हुई. इसी साल से जैसे-तैसे एडमिशन लेकर पढ़ाई भी शुरू कर दी गयी थी. एकेडमिक ईयर को शुरू हुए डेढ़ साल बीत जाने के बाद इस मेडिकल कॉलेज का केवल नाम ही बदला गया है.

जबकि लैब और प्रैक्टिकल क्लासेस नहीं होने की वजह से स्टूडेंट्स की मुश्किलें बढ़ गयी हैं. अगले एक माह में यहां एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे स्टूडेंट्स की फाइनल परीक्षाएं होने वाली है. ऐसे में भविष्य की चिंता के बीच परीक्षा की तैयारी छोड़ स्टूडेंट्स आंदोलन कर रहे हैं.

पहले फैकल्टी और अब लैब के लिए परेशान स्टूडेंट्स

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कॉलेज गेट पर आंदोलनरत स्टूडेंट्स का कहना है कि हम ऐसे मेडिकल कॉलेज के स्टूडेंट्स हैं, जहां कभी फैकल्टी नहीं होने से परेशानी होती है तो कभी प्रैक्टिकल की पढ़ाई नहीं कर पाते.

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स्टूडेंट्स ने अपनी परेशानी साझा करते हुए बताया कि हम स्टूडेंट्स करीब डेढ़ साल से लेबरेट्री और फैकल्टी के अभाव में कोई प्रेक्टिकल किये बगैर ही एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे हैं. स्टूडेंट्स की चिंता है कि अगले माह फाइनल परीक्षा होने जा रही है.

स्टूडेंट्स प्रैक्टिकल कराये बगैर परीक्षा लिये जाने को लेकर खासे परेशान हैं. उन्हें चिंता सता रही है कि प्रैक्टिकल क्लासेस के बिना सिर्फ थ्योरी की पढ़ाई के बल पर परीक्षा कैसे देंगे.

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लिखित आश्वासन की स्टूडेंट्स कर रहे मांग

फाइनल परीक्षा की तैयारी की चिंता के बीच यहां पढ़ रहे स्टूडेंट्स अपनी मांग को लेकर प्रबंधन के समक्ष काला बिल्ला लगाकर धरना पर बैठ गये हैं. वे राज्य सरकार, जिला प्रशासन और मेडिकल कॉलेज अस्पताल प्रबंधन से इस संबंध में लिखित आश्वासन प्राप्त किये बगैर अपना विरोध धरना जारी रखने पर अड़ गये हैं.

बताते चलें कि जद्दोजहद के बाद एमसीआई ने एक सौ छात्रों के नामांकन के साथ कॉलेज शुरू करने की अनुमति दी थी. कोर्स शुरू होते ही यहां कभी व्यवस्था तो कभी फैकल्टी की कमी की वजह से स्टूडेंट्स परेशान होते रहे. डेढ़ साल में इस मेडिकल कॉलेज की व्यवस्था तो नहीं सुधरी पर नाम में बदलाव जरूर कर दिया गया.

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व्यवस्था में सुधार को लेकर सरकार से हो चुका है पत्राचार

मेडिकल कॉलेज अस्पताल के कार्यवाहक प्राचार्य डाक्टर अरुण कुमार ने बताया कि स्टूडेंट्स की इन समस्याओं से मेडिकल कॉलेज अस्पताल प्रबंधन ने सरकार को अवगत कराया है.

स्थानीय प्रशासन को भी पूर्व में पत्राचार किया जा चुका है. उन्होंने बताया कि अस्पताल में लैब की व्यवस्था नहीं होने की वजह से डेडबॉडी रखना संभव नहीं हो पाता है. इस वजह से स्टूडेंट्स प्रैक्टिकल नहीं कर पाये.

नये सत्र में नहीं हो रहा एडमिशन

गौरतलब है कि कॉलेज में व्यवस्था की कमी की वजह से शैक्षणिक सत्र 2020 में नामांकन नहीं हो रहा है. एमसीआई ने एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए जरूरी व्यवस्था नहीं रहने की वजह से नामांकन के लिए मान्यता नहीं दी है.

नामांकन के लिए अभी सरकार की ओर से पत्राचार किया जा रहा है. कॉलेज में व्यवस्था की बात करें तो कॉलेज अब भी लैब, फैकल्टी और लाइब्रेरी जैसी सुविधाओं से वंचित है. स्टूडेंट्स की इस परेशानी पर कृषि मंत्री बादल पत्रलेख ने कहा कि स्टूडेंट्स की इस परेशानी हो कैबिनेट में लाया जायेगा.

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