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267 प्रखंडों में सिर्फ 45 श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी, कई योजनाएं हो रही प्रभावित

श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी मजदूरों के पलायन और अन्य सर्वेक्षण का करते हैं काम

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Ranchi: झारखंड के 267 प्रखंडों में कारखाना अधिनियम को लागू करने और अन्य कार्यकलापों का काम सिर्फ 45 श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी (एलइओ) के जिम्मे हैं. इससे मजदूरों के पलायन रोकने और राज्य से काम की खोज में बाहर जानेवाले श्रमिकों का उचित पुर्नवास भी नहीं हो पा रहा है. एलइओ की कमी की वजह से श्रमिक कल्याण के कार्यक्रमों को पूरा करने में परेशानी हो रही है.

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श्रम नियोजन एवं प्रशिक्षण विभाग के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने एलइओ के स्वीकृत पदों पर बहाली करने का अनुरोध भी सरकार से किया है. इस दिशा में अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं शुरू हो सकी है. विभाग के विशेष सचिव आरके सिंह ने भी कहा कि अधिकारियों की कमी की वजह से एक एलइओ कई-कई जिलों के प्रभार में हैं.

विभाग की महत्वपूर्ण कड़ी हैं एलइओ

श्रम नियोजन एवं प्रशिक्षण विभाग में एलइओ महत्वपूर्ण कड़ी होते हैं. इन पर द्वारा श्रम अधिनियम, कारखाना अधिनियम, भवन निर्माण कर्मकार अधिनियम, मिनिमम वेजेज एक्ट तथा अन्य पर मुख्यालय को रिपोर्ट देने की जिम्मेवारी इन्हीं की होती है. ये सहायक श्रमायुक्त के माध्यम से सरकार को राज्य से होनेवाले पलायन की रिपोर्ट भी सरकार को देते हैं. सरकार की तरफ से कारखाने को चलाने में लागू होनेवाले सभी नियम कानूनों को लागू करवाने की जवाबदेही एलइओ की होती है.

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राज्य के औद्योगिक क्षेत्र आदित्यपुर, कांड्रा, चांडिल, धनबाद, रामगढ़, रांची, चाईबासा, जमशेदपुर, हजारीबाग, कोडरमा, पलामू, लातेहार, बोकारो, देवघर जसीडीह समेत अन्य जगहों में कारखाने की अधिकता की वजह और इनकी कमी से कारखाना मालिकों को समय पर लेबर कानून का क्रियान्वयन करने में दिक्कतें होती हैं. हालांकि राज्य सरकार ने अधिकतर श्रम कानूनों से संबंधित फार्म, रिर्टन और रिपोर्ट देने की प्रक्रिया को ऑनलाइन कर दिया है. लेकिन एलइओ की रिपोर्ट इसके लिए जरूरी रहती है.

श्रमिकों के पलायन और मानव तस्करी रोकने में इनकी भी सहभागिता

देश के महानगरों और अन्य शहरों में मजदूरों का पलायन रोकने और मानव तस्करी रोकने के लिए बनायी गयी प्रखंड स्तरीय समिति में एलइओ की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है. इन्हें और संबंधित अंचल अधिकारी और प्रखंड विकास पदाधिकारियों को यह आंकड़ा देना पड़ता है कि किन-किन प्रखंडों से कितने लोग बाहर गये. बाहर जानेवाले लोग ने समिति को सूचना दी है अथवा नहीं.

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औसतन तीन से चार लाख मजदूर प्रत्येक वर्ष राज्य से काम की खोज में बाहर जाते हैं. ऐसे मजदूरों का जॉब कार्ड, उनका पता और अन्य जानकारियां रखना भी इनका ही दायित्व है. बंधुआ और बाल श्रमिकों का उचित पुनर्वास करना भी इनकी जवाबदेही है.

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