JharkhandRanchi

रघुवर सरकार ने जिन राशन कार्डों  को रद्द  किया,  उनमें केवल 10 प्रतिशत ही फर्ज़ी : J-PAL के अध्ययन में  खुलासा  

Ranchi : 2017 में रघुवर सरकार द्वारा बिना परिवारों को सूचित किये झारखंड में लाखों राशन कार्ड रद्द किये गये थे. राज्य सरकार का दावा था कि इनमें ज्यादातर कार्ड फर्ज़ी थे. लेकिन, हाल ही में शोध संस्थान J-PAL की ओर से किये गये अध्ययन से यह खुलासा हुआ कि रद्द किये गये कार्डों में ज़्यादातर फर्ज़ी नहीं थे.

देश के जाने माने अर्थशास्त्रियों ने किया अध्ययन

अभिजित बनर्जी व इस्थर डुफ्लो (जिन्हें हाल में नोबेल प्राइज मिला) द्वारा स्थापित शोध संस्थान J-PAL के द्वारा रघुवर सरकार के कार्यकाल में रद्द किये गये राशन कार्ड पर अध्ययन कर रिपोर्ट जारी की है. अध्ययन कार्य प्रख्यात अर्थशास्त्री कार्तिक मुरलीधरन, पॉल नीहाउस और संदीप सुखटणकर द्वारा किया गया. अध्ययन में झारखण्ड में 10 रैंडम ढंग से चुने गये ज़िलों में 2016 -2018 में रद्द हुए राशन कार्डों का शोध किया गया है. 

इसे भी पढ़ें :  #DhulluMahto : क्या सिस्टम और पुलिस-प्रशासन इस आरोप से मुक्त हो पायेगा कि वह गुलाम नहीं है

2016 और 2018 के बीच 10 ज़िलों में 1.44 लाख राशन कार्ड रद्द किये गये

इन ज़िलों के कुल राशन कार्डों का लगभग 6%, कुल रद्द किये गये कार्डों के 56% (एवं कुल कार्डों के 9%) आधार से जुड़े नहीं थे. रद्द राशन कार्डों में से 4,000 रैंडम ढंग से चुने गये कार्डों के जांच में पाया गया कि लगभग 90% रद्द किये गये राशन कार्ड फर्ज़ी नहीं थे. सिर्फ 10% फर्ज़ी परिवारों के राशन कार्ड बने थे, यानी वह परिवार जिनका पता नहीं लगाया जा सका. इसी अध्ययन का अनुमान है कि राशन कार्डों को रद्द करने से पहले, कुल लाभुकों में ज़्यादा-से-ज़्यादा 3% फर्ज़ी थे. राशन कार्ड रद्द किये जाने के मामले में अध्ययन टीम ने माना कि यह एक बड़े चूहे को पकड़ने के लिए पूरा घर जला देने के बराबर था. इस मामले में सिमडेगा में संतोषी कुमारी के मामले में जोड़ कर देखा गया. जिसका प्रभाव हजारों गरीबों पर भारी पड़ा.

इसे भी पढ़ें : बकोरिया कांड : सीबीआई जांच रुकवाने का प्रयास कर रहे लोगों को  चिन्हित करने को लेकर पीआईएल ,जांच की मांग

राशन कार्डों को रद्द करने की प्रक्रिया अस्पष्ट नही

इस सब में पारदर्शिता का मुद्दा भी उठता है. झारखंड में राशन कार्डों को रद्द करने की प्रक्रिया अभी तक अस्पष्ट है, और बार-बार मांग के बावजूद, राज्य सरकार ने रद्द किये गए राशन कार्डों की सूची कभी भी सार्वजनिक नहीं की. पारदर्शिता और जवाबदेही की यह कमी पूरी प्रक्रिया को और भी ज्यादा आपत्तिजनक बनाती है. अध्ययन रिपोर्ट में कहा गया वर्तमान सरकार भी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, राशन कार्डों को बड़े पैमाने पर रद्द करने की तैयारी में जुटी हुई है जो उचित नहीं है.

रघुवर सरकार में बड़े पैमाने पर रद्द किये गये राशन कार्ड में कब क्या हुआ

27 मार्च 2017 को, झारखंड के मुख्य सचिव ने कहा था कि “सभी राशन कार्ड जिन्हें आधार नंबर के साथ जोड़ा नहीं गया है, वे 5 अप्रैल को निरर्थक हो जाएंगे गये .लगभग 3 लाख राशन कार्ड अवैध घोषित किये गये थे. 22 सितंबर 2017 को, झारखंड सरकार ने अपने एक हजार दिनों की सफलताओं पर एक पुस्तिका जारी की. उसमें उन्होंने ये कहा: ‘आधार नंबर के साथ राशन कार्ड को सीड करने का काम शुरू हो गया है. इस प्रक्रिया में 11 लाख, 64 हजार फर्जी राशन कार्ड पाए गए हैं.

इसके माध्यम से, राज्य सरकार ने एक वर्ष में 225 करोड़ रुपये बचाये हैं, जिनका उपयोग अब गरीब लोगों के विकास के लिए किया जा सकता है. 99% राशन कार्ड आधार के साथ सीड किए गए हैं. 10 नवंबर 2017 को, खाद्य विभाग (झारखण्ड सरकार) ने स्पष्ट किया कि हटाए गए राशन कार्डों की संख्या असल में 6.96 लाख थी, न कि 11 लाख. रद्द किये गए कार्डों को “फर्ज़ी” आदि कहा जाता रहा.

28 सितंबर 2017 को, संतोषी कुमारी (सिमडेगा जिले में एक बेसहारा परिवार की 11 वर्षीय लड़की) की भूख से मृत्यु हो गयी. संतोषी कुमारी के परिवार का राशन कार्ड, आधार से सीड न होने के कारण, पहले ही रद्द किया गया था – 22 जुलाई 2017 को – सरयू राय, खाद्य आपूर्ति मंत्री के अनुसार.

इसे भी पढ़ें : #Jharkhand: ऊर्जा विकास निगम में 20 वर्षों से जमे हैं कई अफसर-कर्मचारी, अब ट्रांसफर की जगह पांचवें प्रमोशन की तैयारी

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Related Articles

Back to top button