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ऑनलाइन शॉपिंग से प्रभावित हो रहा है एफएमसीजी व्यापार: संजय अखौरी

Ranchi. वॉलमार्ट-फ्लिपकार्ट के बाद अब रिलायंस रिटेल के खुदरा कारोबार में आकर्षक ऑफर देने से स्थानीय खुदरा व्यापारी प्रभावित होने की आशंका है. इसको लेकर झारखण्ड कन्जयूमर प्रोडक्ट डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन (जेसीपीडीए) के सचिव संजय अखौरी ने वित मंत्रालय एवं प्रतिस्पर्धा आयोग को लेटर लिखा है.

पत्राचार के जरिये बताया गया कि कोविड और ई-कॉमर्स कंपनियों ने पहले से ही खुदरा व्यापार को काफी नुकसान पहुंचाया है. अब रिलायंस कंपनी का रिटेल कारोबार में उतरना देश के खुदरा कारोबारियों का व्यापार प्रभावित करने का संकेत देता है. ई-कॉमर्स कंपनियों के आकर्षक ऑफर के कारण गली-मोहल्लों में स्थापित छोटे-छोटे दुकानदार जिन्होंने लॉकडाउन के दौरान लोगों को घर-घर जाकर आवश्यक वस्तुओं की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित कराई है, बंदी के कगार पर हैं. यदि छोटे व्यापारियों का व्यापार बंद होगा तब इससे राज्य में बेरोजगारी की व्यापक समस्या बढेगी. बैंकों के ऊपर भी वित्तीय संकट बढ़ेगा. एफफएमसीजी ट्रेडर्स द्वारा लोन के एवज में काफी संख्या में बैंकों को ब्याज भी अदा किया जाता है.

चार करोड परिवारों की आजीविका चलती है

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जेसीपीडीए के सचिव संजय अखौरी ने कहा कि आज दुनिया में सर्वाधिक खुदरा दुकानें भारत में हैं. लगभग डेढ़ करोड़ दुकानों से यहां चार करोड़ परिवारों की आजीविका चलती है. जिनमें से अधिकांश छोटे व्यापारी, कर्मचारी और मजदूर हैं. खुदरा व्यापार में खाने-पीने और रोजमर्रा के घरेलू इस्तेमाल के सामान की हिस्सेदारी साठ प्रतिशत और कपड़े-लत्ते की आठ से दस प्रतिशत है. देश की छह फीसदी श्रमशक्ति इस कारोबार में खपी हुई है. हर एक करोड़ रुपये के टर्नओवर पर बीस से पच्चीस लोगों को रोजगार मिलता है.

फिलहाल खुदरा व्यापार में संगठित क्षेत्र का हिस्सा केवल आठ प्रतिशत है. इसलिए देश-विदेश की बड़ी कंपनियों की नजर इस धंधे पर लगी हुई है. यह भी कहा कि देश में ऑनलाइन रिटेल व्यापार कर रही कंपनियों के लिए कोई ठोस कानून नहीं होने से सरकार को यह जानकारी भी नहीं है कि ई-कॉमर्स फर्मों में विदेशी कंपनियों की कितनी हिस्सेदारी है.

व्यापार में संकट

जियोमार्ट, वॉलमार्ट, अमेजन, जैसी कंपनियां वर्तमान में स्थानीय किराना दुकानों से टाइअप करके 90 मिनट में ऑर्डर की चीजें पहुंचा रही हैं. ऐसे आकर्षक स्कीमें लाकर देश के खुदरा व्यापारियों का व्यापार संकट में डाला जा रहा है. जिसपर केंद्र सरकार एवं प्रतिस्पर्धा आयोग को शीघ्र संज्ञान लेने की आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि रिटेल सेक्टर में दुनिया की सबसे बडी कंपनियों वॉलमार्ट, फ्लिपकार्ट के बाद अब इस कारोबार में रिलायंस रिटेल के उतरने से खुदरा कारोबारियों के समक्ष और भी चुनौतियां बढ़ गई हैं.

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अखौरी ने यह भी कहा कि लॉकडाउन के बाद से व्यापार करने का तौर तरीका बदल गया है. इसके अलावा ई-कॉमर्स के साथ खुदरा दुकानों का इंटीग्रेशन एक अन्य सेक्टर है और नियमों, रेगुलेशन और कानूनों का सख्ती से अनुपालन, व्यापार की अहम बातें हैं, जिस कारण देश में पूरे खुदरा व्यापार का परिदृश्य बदलता जा रहा है, जिसपर सभी खुदरा दुकानदारों को सतर्क रहने की आवश्यकता है.

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