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राज्य के 35441 में से सिर्फ 5 हजार सरकारी स्कूलों में चल रही है ऑनलाइन क्लास

–     42 लाख में 29 लाख बच्चों तक नहीं पहुंच रहा स्टडी मैटेरियल

–     अब शिक्षकों को दिलाया जायेगा प्रशिक्षण

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–     बदलेगा ऑन लाइन क्लास का समय

Ranchi : राज्य में कोरोना की वजह से सरकारी स्कूल 17 मार्च 2020 से बंद हैं. इस दौरान स्टूडेंट्स को व्हाट्स एप ग्रुप में माध्यम से पढ़ाई करायी जा रही है. बीते साल भी इसी तरह पढाई करायी गयी. बीते साल की कमियों पर ध्यान न देकर इस साल भी ऑनलाइन क्लास शुरू कर दी गयी. इसका परिणाम यह हुआ कि इस साल भी बड़ी संख्या में स्टूडेंट्स पढाई से वंचित रह गये हैं. आंकड़ों में देखें तो क्लास एक से 12 क्लास तक के 42 लाख स्टूडेंट्स में से 29 लाख स्टूडेंट्स ऑनलाइन पढाई नहीं कर रहे हैं.

चार हजार स्कूलों के बच्चों ने कभी क्लास नहीं की

शिक्षा परियोजना के पास ऑनलाइन क्लास के जो आंकड़े हैं, उसके मुताबिक राज्य के 35441 स्कूल में से पांच हजार स्कूल ही ऐसे हैं जो पूरी तरह से व्हाट्स एप पर क्लास लेने में सक्षम हैं. जबकि ऑनलाइन क्लास के दो एकेडमिक सेशन में 4000 स्कूल ऐसे हैं जिनके स्टूडेंट्स ने कभी क्लास की ही नहीं. जानकारी के मुताबिक सभी स्कूलों को क्लास के मुताबिक स्टूडेंट्स के व्हाट्स एप ग्रुप बनाने को कहा गया था. 31 हजार स्कूलों ने इस तरह के ग्रुप्स से पढाई कराना शुरू कर दिया है.

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शहर से सटे स्कूल के बच्चे ही कर रहे ऑनलाइन क्लास

बताते चलें कि राज्य के सुदूर इलाकों के स्कूलों के स्टूडेंट्स तक व्हाट्स एप के माध्यम से स्टडी मैटेरियल नहीं पहुंच पा रहा है. वहीं कहीं इंटरनेट की अनुपलब्धता तथा अभिभावकों के पास स्मार्टफोन नहीं हो पाने की वजह से बच्चे क्लास नहीं कर पा रहे हैं. शिक्षा परियोजना ने अपनी मॉनिटरिंग में यह भी पाया है कि जिन अभिभावकों के पास स्मार्ट फोन है वे अपने साथ लेकर काम पर चले जाते हैं. इस वजह से भी बच्चे क्लास नहीं कर पाते हैं. परियोजना ने इसके लिए भी उपाय निकाला है.

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बदलेगा ऑनलाइन क्लास का समय

ऑनलाइन क्लास के समय में अब बदलाव होगा. अब सुबह 9.00 बजे से पहले और शाम 6.00 बजे के बाद क्लास शुरू की जायेगी, जब अभिभावक घर पर रहते हैं. इस दौरान बच्चों की ऑनलाइन क्लास ली जायेगी. प्रयोग के तौर पर कुछ क्षेत्रों में सुबह-शाम ऑनलाइन क्लास की शुरुआत की गयी है, जिसका रिस्पांस बेहतर मिल रहा है.

झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद ने कहा है, कि अधिकांश घरों में मोबाइल फोन की कमी है. सर्वेक्षण में पाया गया है कि अभिभावक मोबाइल घर में छोड़कर नहीं जाते हैं और इसी वजह से विद्यार्थी ऑनलाइन पठन-पाठन से वंचित है. परिषद के निदेशक ने बताया कि सुबह या देर शाम उनके माता-पिता काम से लौट जाते हैं, तो बच्चे के पास मोबाइल उपलब्ध हो जायेगा. ऐसे में पढाई करानी संभव होगी.

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