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प्याज की झांस नहीं कीमतें रुला रही गृहणियों को, 130-140 रुपये किलो बिका प्याज

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Asansol: औद्योगिक शहर दुर्गापुर एवं आसपास इलाके के घरों के रसोई घरों में न तो अब महिलाओं की आंखें डबडबा रहीं हैं और न ही तड़का के छौंक की खुशबू निकल कर डाइनिंग टेबल तक आ रही है. इन दिनों नॉनवेज खाना भी दुश्वारियों भरा हो गया है.

बाजारों में मटन, चिकेन और अंडा करी या आमलेट में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली सब्जी प्याज की मात्र में भी काफी कमी आ गयी है. इन सबका कारण बस एक ही है वह है प्याज की आवक में कमी और उसकी आसमान छूती कीमतें.

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व्यंजनों का स्वाद फीका हुआ

प्याज की आसमान छूती कीमतों ने बंगाल के बंगाली घरों के व्यंजनों के स्वाद को फीका कर दिया है. बंगाली परिवारों में आज भी नॉनवेज नियमित बनाने और सेवन करने का चलन है.

शनिवार को भी औद्योगिक शहर के बाजारों में प्याज की कीमतें आसमान छूती मिलीं. शहर के प्रमुख बाजार बेनाचिति सब्जी मंडी स्थित घोष मार्केट में प्याज की कीमत प्रति किलो 130 रुपये रही. वहीं दुर्गापुर स्टील टाऊनशिप सब्जी मंडी में शनिवार को प्याज की कीमत 135 रुपये रही. अन्य बाजारों जैसे मायाबाजार, चंडीदास, मामरा बाजार, मेनगेट, अंडाल, उखड़ा, पांडेश्वर, पानागढ़, बुदबुद और वर्दवान के सब्जी मंडियों में प्याज की कीमत दो तरह की देखी गयी.

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गीले ( पानी से भीगे) प्याज की कीमत प्रति किलो 110 रुपये थी तो साबुत प्याज की कीमत 130, 125, 140 तक थी. दुर्गापुर के (भिरिंगी) होटल व्यासायी बाबा ढाबा के युवा मालिक महेश महतो ने बताया नॉनवेज आइटमों में प्याज की मात्र तो कम नहीं किया है लेकिन सलाद में मात्र कम कर दी गयी है.

पानागढ़ ग्राम बांग्ला होटल के मालिक सत्य प्रकाश केसरी ने कहा- प्याज की बढ़ी कीमतों के कारण सलाद के विकल्प के रूप में मूली का प्रयोग कर रहे हैं. यह स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है. वर्दवान जिला व्यावसायिक संगठन के महासचिव चंद्र विजय यादव ने बताया कि महाराष्ट्र में चुनाव और राजनीतिक उठा-पटक के कारण बंगाल में प्याज की कीमतों पर प्रतिकूल असर पड़ा है.

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बेनाचिति निवेदिता पैलेस के मोदी खाना व्यवसायी दिलीप साव का कहना है कि यह प्याज की कीमतों का रिकॉर्ड है. अचरज की बात यह भी है कि छोटे-छोटे राशन (मोदी खाना) दुकानदारों ने इन दिनों प्याज रखना बंद कर दिया है. दूसरी ओर प्याज की बढ़ती कीमतों पर न तो प्रशासन कुछ कर पा रहा है और न ही राज्य सरकार कोई कदम उठा रही है.

राजनैतिक पार्टियों के नेता भी चिल्ला नहीं रहे हैं. बताया गया है कि दिसंबर माह तक प्याज की कीमतों में बढ़ोतरी जारी रहेगी. यही हाल रहा तो नये वर्ष पर आयोजित वनभोजों में खिचड़ी पकेगी और क्या?

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