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8 हजार पाने वाले सहिया प्रशिक्षक दल को हटाने और ट्रांसफर करने की चल रही प्रक्रिया

स्टे लगाने की मांग को लेकर स्वास्थ्य मंत्री आवास का किया गया घेराव

Ranchi: राज्य सरकार के राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत प्रखंडों में कार्यरत प्रखंड शिक्षक दल के कर्मियों को कार्यमुक्त करने और स्थानांतरित करने की प्रकिया चल रही है. यह दल पिछले 12 सालों से प्रखंडों में कार्यरत सहिया को ट्रेनिंग देने और उनके कामों की निगरानी करने का काम कर रहे हैं. इस काम के बदले इन्हें 8 हजार रुपये का भुगतान किया जाता है.

राज्य भर में इनकी कुल संख्या 688 है. वर्तमान में इनके अप्रेज़ल के नाम पर इनकी ग्रेडिंग ए, बी और सी में की गयी है. 388 लोगों की ग्रेडिंग ए है. 128 को बी ग्रेड दिया गया है. वहीं अन्य को ग्रेड सी में रखा गया है.

जिन्हें बी ग्रेडिंग दी गयी है उन्हें दूसरे जिलों में ट्रांसफर किया जा रहा है और सी ग्रेड वालों को इस काम से हटाया जा रहा है. इसी के विरोध में बीटीटी के लोग स्वास्थ्य मंत्री के आवास का घेराव करने पहुंचे हैं.

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उनकी मांग है कि इस पूरे प्रक्रिया पर स्टे लगा दिया जाये. किसी का भी ट्रांसफर नहीं किया जाये. कर्मियों का कहना है कि 12 साल सिर्फ आठ हजार के मानदेय में काम करने के बाद अचानक से यह प्रक्रिया हमें हटाने के लिये अपनायी गयी है. इसपर तुरंत रोक लगायी जानी चाहिए.

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सी ग्रेड वालों को किसी दूसरे कामों में लगाया जाएगा

कर्मियों का कहना है कि जिन्हें सी ग्रेड मिला है उन्हें इस काम से हटाया जाएगा. इसके बदले में उन्हें किसी दूसरे कार्यक्रम से जोड़ा जाएगा. ये सिविल सर्जन के निर्देश से होगा. यह होगा भी या नहीं इसकी निश्चितता नहीं है.

यह भी नहीं क्लियर किया गया है कि उस काम में कोई मानदेय मिलेगा भी या नहीं. ऐसे में 12 साल काम कराने के बाद अचानक से हटाने की यह प्रक्रिया हमारे 12 साल के काम के बदले सही नहीं है.

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ऑनलाइन ली गयी थी परीक्षा

राज्य के सभी बीटीटी की ग्रेडिंग के लिए ऑनलाइन परीक्षा आयोजित की गयी थी, जिसमें 30 प्रश्न पूछे गये थे. अंक के आधार पर ग्रेडिंग की गयी. इसपर कर्मियों का कहना है कि अधिकतकर लोग ऑनलाइन परीक्षा से भली-भांति वाकिफ नहीं थे और ऐसे समय में परीक्षा ली गयी जब लॉकडाउन था.

ऐसे में परीक्षा को बस हमें हटाने का आधार बनाया गया. घेराव करने पहुंचे लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य मंत्री इस पर स्टे लगायें. स्टे लगने के बाद ही हम हटेंगे.

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