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धर्मकोड के मुद्दे पर एक गुट ने सरकार के प्रस्ताव का समर्थन किया, दूसरे ने कहा- बैठक में लेंगे निर्णय

Ranchi: धर्मकोड के मुद्दे पर राज्य सरकार ने बीच का रास्ता निकाला है. 11 नवंबर को विधानसभा के विशेष सत्र में आदिवासी/सरना धर्मकोड का प्रस्ताव पारित कर केंद्र को भेजने की बात सरकार की ओर से आयी है.

धर्मकोड के लिए आंदोलन कर रहे दो प्रमुख गुटों की इस पर अलग-अलग प्रतिक्रिया आयी है. राष्ट्रीय आदिवासी धर्म समन्वय समिति के संयोजक देवकुमार धान ने प्रस्ताव का स्वागत किया है जबकि सरना धर्म कोड की मांग कर रहे डॉ करमा उरांव ने कहा कि वे सात नवंबर को होनेवाली बैठक में सहयोगियों से बात कर अपने विचार रखेंगे

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राष्ट्रीय आदिवासी धर्म समन्वय समिति के देवकुमार धान ने कहा है कि हम सरकार के इस प्रस्ताव का स्वागत करते हैं. हमारी भी यहीं मांग थी. हम तो कह ही रहे थे कि आदिवासी धर्म के बाद लोग अपनी सुविधा के अनुसार सरना/गोंडी/भील आदि लिख सकते हैं. मैं समिति की ओर से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और रामेश्वर उरांव का धन्यवाद प्रकट करता हूं.

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मुझे लगता है कि इस कदम से धर्मकोड हासिल करने की दिशा में हम और आगे बढ़ सकते हैं. उन्होंने कहा कि समिति के द्वारा आठ नवंबर को एक बैठक भी होगी. इसमें झारखंड के अलावा अन्य राज्यों के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे.

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दूसरी ओर सरना धर्मकोड की मांग कर रहे गुट के नेता, शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता डॉ करमा उरांव ने कहा कि सात नवंबर को समाज के लोगों के साथ बैठक होनी है उसी के बाद निर्णय लेंगे. उन्होंने कहा कि सरना धर्मकोड की मांग व्यावहारिक है. सरना सिर्फ एक पवित्र जगह का नाम नहीं है बल्कि हमारे धर्म से जुड़ा मामला है.

जब कोई मेरे धर्म के बारे में पूछता है तो हम उसे सरना धर्म ही बताते हैं. जो लोग कह रहे हैं कि देश के बाकी आदिवासी समुदाय इसे स्वीकार नहीं करेंगे तो हमारा कहना है कि हम दूसरे समुदाय की बात कर भी नहीं रहे हैं. हम सरना धर्मावलंबियों के हक और अधिकार की बात कर रहे हैं.

आदिवासी सेना के शिवा कच्छप ने भी कहा कि हमलोग सरना कोड की मांग कर रहे है. सरकार के प्रस्ताव पर अभी कुछ नहीं कहेंगे. लेकिन सात नवंबर को होनेवाली बैठक में ही निर्णय लिया जायेगा कि हमारी आगे की ऱणनीति क्या होगी

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