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एक बार फोन नंबर डायल करने पर हमेशा के लिए सुंदर पिचाई की मेमोरी में हो जाता है सेव

Naveen Sharma

Ranchi : भारत के जिन चंद लोगों ने हाल के कुछ वर्षों में विश्व पटल पर अपना खास मुकाम बनाया और दुनिया का ध्यान अपनी तरफ आकर्षित किया है उनमें सुंदर पिचाई प्रमुख हैं. वे दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनी गूगल की पैरेंट कंपनी Alphabet के सीईओ हैं. एक सामान्य मध्यम वर्गीय तमिल परिवार से ताल्लुक रखने वाले सुंदर का जीवन का सफर काफी प्रेरणा दायक है.

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सुंदर पिचाई का जन्म तमिलनाडु के मदुरै में हुआ था. पिता एक विद्युत इंजीनियर थे और मां स्टेनोग्राफर. पिचाई बेहद ही साधारण परिवार से नाता रखते थे और इनके बचपन के दिनों में इनके घर में ना ही टी.वी हुआ करता था और ना ही गाड़ी हुआ करती थी. यहां तक की कंप्यूटर से इनका साबका तब पड़ा जब ये कॉलेज पहुंचे.

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IIT खड़गपुर से किया बीटेक

पिचाई ने 10 वीं कक्षा तक की पढ़ाई जवाहर विद्यालय से की. 12 वीं कक्षा की पढ़ाई इन्होंने वाना वानी स्कूल से हासिल की.इन्होंने मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग विषय में डिग्री भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, खड़गपुर (IIT) से ली थी.
इसके बाद ये अमेरिका गए और वहां स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय में दाखिला लिया. यहां से भौतिक विज्ञान और इंजीनियरिंग में मास्टर ऑफ साइंस की डिग्री प्राप्त की. इसके अलावा इन्होंने व्हार्टन स्कूल ऑफ पेंसिल्वेनिया से भी एमबीए की पढ़ाई कर रखी है.

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अंजलि से किया था लव मैरेज

सुंदर पिचाई की यादाश्त जबरदस्त थी. उन्हें नंबर काफी जल्दी से याद हो जाते हैं और इसलिए ये एक बार जो फोन नंबर डायल करते हैं, वो इन्हें एकदम से याद हो जाता था.
सुंदर पिचाई और उनकी पत्नी अंजलि ने एक साथ ही आईआईटी कॉलेज में पढ़ाई किया करते थे और इसी दौरान इन्होंने एक दूसरे को डेट करना शुरू कर दिया था.

मैकिंसे एंड कंपनी में भी किया काम

गूगल का हिस्सा बनने से पहले सुंदर पिचाई मैकिंसे एंड कंपनी में काम किया करते थे और इन्होंने कुछ साल तक इस कंपनी में कार्य किया. इसके बाद इन्होंने गूगल कंपनी को ज्वाइन कर लिया था.जिस वक्त इन्होंने इस कंपनी को ज्वाइन किया था, उस वक्त ये इस कंपनी की एक छोटी सी टीम का हिस्सा हुआ करते थे, जो कि गूगल सर्च टूलबार पर कार्य किया करती थी.

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गूगल क्रोम, ब्राउजर बनाने में अहम भूमिका

गूगल क्रोम, ब्राउजर को बनाने के पीछे इनकी अहम भूमिका रही थी. काफी कम समय में क्रोम दुनिया का नंबर 1 ब्राउजर बन गया था. जिसके बाद साल 2008 को इनको इस कंपनी के उत्पाद विकास विभाग का उपाध्यक्ष बना दिया गया. 2012 में ये क्रोम और ऐप्स के वरिष्ठ उपाध्यक्ष बन गए थे.

माइक्रोसॉफ्ट और ट्वीटर का आफर ठुकराया

इनके द्वारा किए गए कार्यों को देखते हुए इन्हे गूगल का सीईओ बना दिया गया था और इस कंपनी के सबसे महत्वपूर्ण उत्पादों को बनाने के पीछे इन्ही का ही हाथ है.
इनकी काबिलियत को देखते हुए माइक्रोसॉफ्ट जैसी बहुराष्ट्रीय दिग्गज कंपनियों ने इन्हें नौकरी का प्रस्ताव दिए था, लेकिन इन्होंने गूगल कंपनी के साथ ही बने रहने का फैसला लिया था और इनका प्रस्ताव का ठुकरा दिया था.

 

कई विवाद कुशलता से सुलझाए

सुंदर पिचाई अपने नाम के अनुरूप ही काफी साफ छवि वाले व्यक्ति हैं. इनके साथ सीधे तौर पर किसी भी तरह का विवाद नहीं जुड़ा हुआ है, लेकिन 2018 में इन्होंने अपनी कंपनी से जेम्स डेमोर को उनके द्वारा लिखे गए एक मेमो के चलते बाहर निकाल दिया था. इस मेमो में जेम्स ने लिखा था कि गूगल कंपनी महिलाओं को कम मौका देती है और इस कंपनी में काफी कम संख्या में महिलाएं काम कर रही हैं. वहीं जेम्स को निकालने के बाद सुंदर पिचाई ने अपनी सफाई देते हुए कहा था, कि जेम्स को निकालने का निर्णय सही था.
साल 2011 में सुंदर पिचाई ने ट्विटर कंपनी को ज्वाइन करने का फैसला कर लिया था, लेकिन गूगल कंपनी ने इन्हें अधिक पैसे देकर ट्विटर कंपनी में जाने से रोक लिया था.

पिचाई पर धनवर्षा

फरवरी 2016 में, इन्हें गूगल की होल्डिंग कंपनी अल्फाबेट के 273,328 शेयरों से सम्मानित किया गया, जिसके साथ ही इनकी कुल संपत्ति में काफी वृद्धि हो गई थी.वहीं 2016 में इन्होने गूगल कंपनी को अपनी सेवा देकर 1,280 करोड़ रुपए कमाए थे. 2015 में इन्हें जब उत्पाद के वरिष्ठ उपाध्यक्ष पद पर पदोन्नत किया गया तो इन्हें 600 करोड़ रुपए मिले थे. आज वे दुनिया के सबसे ज्यादा वेतन पाने वाले सीईओ हैं.

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