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बीजेपी की अपील पर फेसबुक ने कांग्रेस, रवीश कुमार का समर्थन करनेवाले 14 पेजेज साइट से हटाये, 17 को किया फिर से शुरू

कांग्रेस ने एकबार फिर फेसबुक से बीजेपी की सांठगांठ का आरोप लगाते हुए इसे डिजिटल साम्राज्यवाद बताया

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New Delhi: सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक और व्हाट्सअप के साथ बीजेपी के सांठगांठ के आरोप लगातार लग रहे हैं. वहीं मीडिया में आयी एक खबर के मुताबिक बीजेपी के कहने पर फेसबुक ने 14 फेसबुक पेजों को बंद किया, इतना ही नहीं भाजपा के कहने पर 17 फेसबुक पेजों को फिर से शुरू भी किया गया.

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बीजेपी के कहने पर बंद हुए 14 फेसबुक पेज

जनसत्ता की खबर के अनुसार, भारतीय जनता पार्टी ने आम चुनाव 2019 से पहले फेसबुक को 44 फेसबुक पेजेज की एक लिस्ट दी थी. और इन्हें बंद करने की मांग की थी. खबर है कि इस सूची में वैसे फेसबुक पेजेज शामिल थे, जो बीजेपी का विरोध कर रहे थे. भाजपा का कहना था कि ये फेसबुक पेज तथ्यहीन पोस्ट डाल रहे थे और गाइडलाइन का पालन नहीं कर रहे थे. खबर है कि भाजपा के कहने पर फेसबुक ने इनमें से 14 पेजेज को बंद कर दिया. इनमें भीम आर्मी का ऑफिसियल अकाउंट, वी हेट बीजेपी पेज, कांग्रेस समर्थित अनऑफिसियल पेज, जर्नलिस्ट रवीश कुमार और विनोद दुआ के समर्थन वाले पेज और द ट्रुथ ऑफ गुजरात जैसे फेसबुक पेज शामिल हैं.

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17 फेसबुक पेजों को किया शुरू

जानकारी मिली है कि भाजपा के कहने पर फेसबुक ने ना सिर्फ कुछ पेजों को बंद किया, बल्कि कई को फिर से चालू भी किया. ऐसे 17 फेसबुव पेजेज को फिर से शुरू करने की बात सामने आ रही है. साथ ही चौपाल और ओपइंडिया नाम की दो न्यूज वेबसाइट्स को मोनेटाइज करने को भी कहा गया. उल्लेखनीय है कि बीजेपी की अपील पर फेसबुक ने उन 17 पेजेज को फिर से शुरू किया और दलील दी कि ये 17 पेज गलती से हटा दिये गये थे.

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कांग्रेस ने बताया डिजिटल साम्राज्यवाद

इधर कांग्रेस ने अमेरिका के एक अखबार की ताजा रिपोर्ट का हवाला देते हुए सोमवार को भाजपा एवं फेसबुक के सांठगांठ का आरोप एक बार फिर लगाया और कहा कि विदेशी सोशल नेटवर्किंग कंपनी का कृत्य ‘डिजिटल साम्राज्यवाद’ है.

पार्टी के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी ने यह भी कहा कि फेसबुक इंडिया से जुड़े लोगों की जांच होने तक इस कंपनी के लंबित प्रस्तावों को मंजूरी नहीं मिलनी चाहिए. कांग्रेस के आरोपों पर फेसबुक और भाजपा की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.

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चौधरी ने वीडियो लिंक के माध्यम से संवाददाताओं से कहा, ‘दो सप्ताह के भीतर तीन प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय मीडिया समूहों के लेखों में इस बात का खुलासा हुआ कि फेसबुक एवं व्हाट्सऐप ने भारत के लोकतंत्र को धूमिल करने और देश के सामाजिक सद्भाव को तार-तार करने के लिए भाजपा के साथ सांठगांठ की. ताजा खुलासा भी इसी बात का प्रमाण है.’ उन्होंने आरोप लगाया कि यह डिजिटल साम्राज्यवाद है.

जेपीसी जांच की मांग

चौधरी ने कहा, ‘मामले की जेपीसी की जांच हो, फेसबुक इंडिया से जुड़े लोगों की जांच हो. जांच होने तक फेसबुक और व्हाट्सऐप के लिए लाइसेंस एवं अनुमति के लंबित प्रस्तावों को मंजूरी नहीं मिले. भारत में मौजूद सभी विदेशी प्रौद्योगिकी कंपनियों के लोक नीति मामलों से जुड़े प्रमुखों के क्रियाकलापों की सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी संसद की स्थायी समिति से जांच कराई जाए.’

बता दें कि अमेरिकी अखबार ‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ ने एक ताजा रिपोर्ट में दावा किया है कि जब चुनावों में कांग्रेस की हार हुई थी तो भारत में फेसबुक के एक शीर्ष पदाधिकारी ने आंतरिक कार्यालयी संवाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खूब तारीफ की थी और कहा था कि यह तीस साल की कड़ी मेहनत का परिणाम है.

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