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10 सितंबर को कांग्रेस और लेफ्ट ने बुलाया ‘भारत बंद’

राफेल डील समेत कई मसलों पर सरकार को घेरने की कोशिश

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New Delhi: पहले एससी-एसटी एक्ट को लेकर दलितों की नाराजगी, और उनकी ओर से भारत बंद. उसके बाद सुप्रीम कोर्ट के फैसले में किये गये बदलाव के खिलाफ सवर्णों में रोष और भारत बंद. अब कांग्रेस और लेफ्ट फ्रंट ने 10 सितंबर को भारत बंद का आह्वान किया है. ये बंद सुबह 9 बजे से दोपहर तीन बजे तक प्रभावी होगा.

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राफेल डील और पेट्रोल-डीजल की कीमतों में हो रही बेतहाशा बढ़ोतरी जैसे मसलों को लेकर कांग्रेस ने 10 सितंबर को देशव्यापी आंदोलन करने का फैसला किया है. जबकि, वामपंथी दल किसानों के मुद्दे पर 10 सितंबर को देशभर में प्रदर्शन करेंगे.

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कांग्रेस ने विपक्ष से मांगा साथ

मोदी सरकार को घेरने की कोशिश में कांग्रेस द्वारा आहूत बंद के लिए कांग्रेस ने विपक्ष के तमाम दलों से सहयोग मांगा है. कांग्रेस नेता ने कहा कि टीएमसी इस विरोध में शामिल होने के लिए तैयार है, लेकिन बंगाल में भारत बंद नहीं होगा. इधर कांग्रेस ने बसपा से भी सहयोग मांगा है.

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गुरुवार को पार्टी नेताओं की बैठक में यह निर्णय लिया कि राफेल मुद्दे पर विरोध जताने के लिए 10 सितंबर को देशभर की सड़कों पर कार्यकर्ता उतरेंगे. इसके साथ-साथ महंगाई, पेट्रोल-डीजल के दामों में लगातार हो रहे इजाफे के खिलाफ भी प्रदर्शन होगा. राजस्थान कांग्रेस के अध्यक्ष सचिन पायलट ने कहा कि पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान में पहुंच गई हैं और सरकार चुप है.

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मोदी सरकार पर निशाना

कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय कीमतें कम होने के बावजूद, देश में ईंधन की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं. वही रुपया लगातार लुढ़कता जा रहा है. इसे रोकने के लिए कदम उठाने की बजाये सरकार खामोश है.

एक आरटीआई का हवाला देते हुए सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि विश्व के 29 ऐसे देश हैं जहां मोदी सरकार 34 रुपया और 37 रुपया प्रति लीटर के हिसाब से तेल बेच रही है. उन्होंने कहा कांग्रेस लगातार केंद्र सरकार से पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने की बात कह रहे हैं जिससे आमजनों को 10 से 15 रुपये की राहत मिलेगी. लेकिन सरकार की कोई फैसला नहीं ले रही है.

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वामपंथी दलों ने कहा है कि पेट्रोलियम उत्पादों की बढ़ती कीमतों के विरोध में सोमवार, 10 सितंबर को अखिल भारतीय विरोध प्रदर्शन करने का आह्वान किया.

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