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गणतंत्र दिवस पर महिला कवियत्रियों ने अपनी रचनाओं से बिखेरी कलम की सुगंध

Jamshedpur :  “कलम की सुगंध झारखंड” मंच ने 73वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर वीणा पांडे भारती की अध्यक्षता में गूगल मीट पर काव्य गोष्ठी का आयोजन किया. इसमें रचनाकारों ने देशभक्ति से ओतप्रोत कविताओं का पाठ किया. अपने अध्यक्षीय भाषण में वीणा पांडे भारती ने कहा कि कलम की सुगंध झारखंड ने बहुत कम समय में ही अपनी सुगंध फैलायी है और सबको एक सूत्र में बांधने का काम किया है. इस काव्य गोष्ठी में जिन कवयित्रियों ने अपनी प्रस्तुति दी उनमें मनीषा सहाय सुमन ने देशभक्ति पर अपनी गजल प्रस्तुत की.  वीणा पांडे भारती ने अपनी कविता, हम मातृभूमि के आंगन में, सपनों के फूल सजायेंगे, ले सृजन पथ का गीत नया, सुरक्षित संसार बसायेंगे कविता का पाठ किया.  निवेदिता श्रीवास्तव गार्गी ने अपनी कविता-  ऐ वतन के नवजवां,सो रहे तो जाग जा पेश की, रीना गुप्ता श्रृति ने तिरंगे की जुबानी अपनी कविता –  आज जिन शहीदों की बदौलत मैं लहरा रहा हूं इतने शौक से, दास्तांं उनकी सुना सकता हूं उतने अभिमान से की प्रस्तुति की,  किरण कुमारी ने अपनी ओजस्वी कविता,  आये थे मेहमान बनकर, करने लगे हुकूमत हम पर, खदेड़ा वीरों ने जमकर, आजादी मिली हमें लड़कर सुनायी.  पद्मा प्रसाद की कविता, देश की जनता जोश में आओ, देशभक्ति की अलख जगाओ और नीलम पेडीवाल की रचना, 26 जनवरी को हम सब गणतंत्र दिवस मनाते हैं और तिरंगे को फहरा कर गीत खुशी के गाते हैं की प्रस्तुति दी. मंच संचालन आरती श्रीवास्तव विपुला ने किया. किरण कुमारी ने सुमधुर स्वर में सरस्वती वंदना कर कार्यक्रम की शुरुआत की. धन्यवाद ज्ञापन मंच की उपाध्यक्ष निवेदिता श्रीवास्तव गार्गी  ने किया, अंत में राष्ट्र गान के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया.

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