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15 नवंबर को रोजगार के लिए सीएम हेमंत ने अपने हाथों से दिया था डमी चेक, दो महीना बीते, आज तक कैश नहीं हुआ

Akshay Kumar Jha

Ranchi: 15 नवंबर का दिन झारखंड के लिए पाक माना जाता है. एक नवंबर को झारखंड की स्थापना होने के बावजूद स्थापना दिवस समारोह 15 नवंबर को मनाया जाता है. क्योंकि उसी दिन भगवान बिरसा मुंडा का जन्म हुआ था. कोई भी सरकार रही हो, इस दिन को काफी खास तरह से मनाते आयी है. इस साल भी हेमंत सरकार ने इस दिन को खास बनाते हुए अपने अफसरों और मंत्रियों के पूरे कुनबे के साथ बिरसा मुंडा के गांव उलिहातू पहुंचे.

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बिरसा मुंडा के गांव जाकर कई योजनाओं की शुरूआत की और कई लोगों के बीच परिसंपत्तियों का वितरण किया. उसी समारोह में करीब पांच लोगों के बीच रोजगार नव सृजन योजना के तहत मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 50000 रुपए का डमी चेक बांटा. अब उस डमी चेक को कैश करने में सभी के पसीने छूट रहे हैं. उन्होंने रोजगार तो शुरू नहीं किया है, लेकिन जिला प्रशासन के चक्कर लगाना उनका रोजगार हो गया है. इन्हीं में से एक ने न्यूज विंग से अपनी व्यथा बतायी. पढ़िए उन्हीं की जुबानी.

दिव्यांग हूं सर, सोचा था किराना दुकान खोल परिवार पाल लूंगा

नाम- सुजीत पाहन, ग्रेजुएशम पार्ट थर्ड में हैं. दिव्यांग हूं. खूंटी जिले के रेमता गांव के शिलाधन पंचायत का निवासी हूं. हाथ और आंखों में परेशानी है. मेरे घर में माता-पिता के अलावा दो बहन और एक भाई है. पिता किसान हैं. लेकिन उतनी कमायी नहीं हो पाती कि घर का खर्च चल सके. इसलिए मैंने सोचा कि एक आवेदन देकर सरकार या जिला प्रशासन से मदद लूं. कुछ पैसे मिल जाते तो किराना दुकान खोलता. इसलिए आवेदन दिया. आवेदन देने पर 15 नवंबर को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने खुद अपने हाथों से 50000 रुपए का एक डमी चेक सौंपा. लेकिन आज तक वो कैश नहीं हो पाया है. कहा गया था कि दो दिनों के अंदर पैसा मिल जाएगा.

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लेकिन नहीं मिला. जिला प्रशासन के कार्यालय का चक्कर लगाते-लगाते थक गया. लेकिन कोई नहीं सुनता. डीडीसी साहब से भी मिला, उन्होंने भी सिर्फ आश्वासन ही दिया. उस बोला गया था कि पैसा खुद अकाउंट में आ जाएगा. लेकिन नहीं आया. बरा-बार बैलेंस चेक करता हूं और निराश होता हूं. मेरे एक दोस्त को भी डमी चेक दिया गया था. उसका नाम सुरजन तीरू है. उसे भी अभी तक पैसा नहीं मिला है. और भी तीन लोगों को चेक दिया गया था. पता नहीं उन्हें चेक मिला है या नहीं. बहुत परेशान हूं. अब क्या करूं समझ में ही नहीं आता है.

नोट- इस मामले पर खूंटी के डीसी शशि रंजन से बात करने की कोशिश की गयी. उनका आधिकारिक नंबर स्विच ऑफ था. जबकि डायरेक्ट्री में दिए गए लैंड लाइन नंबर पर बार-बार रिंग करने पर किसी ने रिसीव नहीं किया.

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