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#International_Women’s_Day पर प्रधानमंत्री मोदी ने नारी शक्ति को सलाम किया, महिलाओं ने पीएम के ट्विटर हैंडल से अपनी कहानियां सुनाईं

NewDelhi : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व घोषणा के अनुसार आज अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर अपना सोशल मीडिया अकाउंट महिलाओं के नाम कर दिया. प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट कर नारी शक्ति को सलाम किया और अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स को दिनभर के लिए उन 7 महिलाओं के हवाले कर दिया, जिन्होंने अपने हौसले और जुनून से लोगों को प्रेरित किया है. पीएम मोदी ने कहा, देश के हर क्षेत्र में असाधारण सफलता हासिल करने वाली महिलाएं. इन्होंने अलग-अलग क्षेत्रों में महान काम किया है.

महिलाओं की सफलताओं का जश्न मनायें और उनसे सीखें

उनके संघर्ष और आकांक्षा से लाखों लोग प्रेरित होते हैं. आइए ऐसी महिलाओं की सफलताओं का जश्न मनायें और उनसे सीखें, पीएम ने लिखा, अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की शुभकामनाएं. हम नारी शक्ति की भावनाओं और योग्यता को सलाम करते हैं. जैसा कि मैंने कुछ दिन पहले कहा था, मैं साइन ऑफ कर रहा हूं. मेरे सोशल मीडिया अकाउंट्स के जरिए उपलब्धियां हासिल कर चुकीं सात महिलाएं अपनी जीवन यात्रा के बारे में बतायेंगी, और आपसे बात करेंगी.

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टि्वटर पर 5.33 करोड़, फेसबुक पर 4.4 करोड़ और इंस्टाग्राम पर 3.52 करोड़ फोलोअर्स  

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प्रधानमंत्री के फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर अकाउंट्स हैं. मोदी सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा फोलो किये जाने वाले विश्व नेताओं में शुमार हैं. टि्वटर पर उनके 5.33 करोड़, फेसबुक पर 4.4 करोड़ और इंस्टाग्राम पर 3.52 करोड़ फोलोअर्स हैं. प्रधानमंत्री कार्यालय के ट्विटर हैंडल पर 3.2 करोड़ फोलोअर्स हैं.

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स्नेहा मोहन दास ने फूड बैंक की स्थापना की  

ट्विटर पर @narendramodi हैंडल से सबसे पहले स्नेहा मोहन दास ने एक विडियो ट्वीट किया . स्नेहा ने बताया कि वह फूड बैंक की संस्थापक हैं. उन्होंने 2015 में चेन्नई में बाढ़ आने से पहले फूड बैंक की स्थापना की थी. इसका मुख्य मकसद भूख से लड़ना और भारत को एक ऐसा देश बनाना है जहां कोई भूखा नहीं रहे. उन्होंने यह भी बताया कि उन्हें फूड बैंक खोलने की प्रेरणा के बारे में बताया. उन्होंने कहा, दादाजी के जन्मदिन और विशेष मौकों पर उनकी मां बच्चों को घर बुलाकर खाना बांटती थीं.

मुझे इसे आगे ले जाने की इच्छा हुई. स्नेहा ने विडियो में जानकारी दी कि वह फेसबुक पर लोगों से जुड़कर फूड बैंक के लिए काम करती हैं. उन्होंने फूड बैंक चेन्नई नाम से एक फेसबुक पेज बनाया और लोगों से अपने-अपने राज्यों, शहरों के नाम से फेसबुक पेज बनाने की अपील की. उनकी इस अपील पर भारत में इस तरह के 18 जगहों पर फूड बैंक खुले और एक फूड बैंक दक्षिण अफ्रीका में भी खुला.

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मालविका अय्यर ने बम धमाके में हाथ गंवाये, पर हार नहीं मानी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ट्विटर हैंडल से ट्वीट करने वाली दूसरी महिला मालविका अय्यर बम धमाके में बाल-बाल बची हैं. उन्होंने @narendramodi हैंडल से ट्वीट किये अपने विडियो में बताया कि कैसे उन्होंने अपने दोनों हाथ गंवाने और पैरों के गंभीर रूप से जख्मी होने के बावजूद भी जीवन में कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. पीएम के ट्विटर हैंडल से ये महिलाएं #SheInspiresUs के साथ अपनी कहानी बयां कर रही हैं. यह #SheInspiresUs ट्विटर पर ट्रेंड भी कर रहा है.

मालविका ने बताया कि वह 13 वर्ष की थीं जब राजस्थान के बिकानेर में बम ब्लास्ट हुआ था. इस ब्लास्ट की चपेट में आकर उन्होंने अपने दोनों हाथ गंवा दिये. उनके दोनों पैर भी बुरी तरह घायल हो गये थे. उनका कहना है कि इस भयावह घटना के बाद जीवन की चुनौतियों से उबरने में सबसे ज्यादा मदद शिक्षा से मिली. उन्होंने बताया कि उन्होंने कोचिंग सेंटर में पढ़ाई करते हुए 10वीं की परीक्षा दी. परीक्षा में लिखने के लिए उन्हें दूसरे की मदद लेनी पड़ी. मालविका ने बताया कि सिर्फ तीन महीने की तैयारी में उन्हें 10वीं 97 प्रतिशत अंक आये.

मालविका का कहना है कि तब से उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. उन्होंने कहा, मैंने कभी वापस मुड़कर नहीं देखा उसकी तरफ नहीं देखा जो उनके साथ हुआ. न ही कभी इसके बारे में सोचकर कुछ बुरा महसूस किया और न ही खुद को कमजोर समझा.

आरिफा ने नमदा क्राफ्ट में दोबारा जान डालने की ठान ली

तीसरी महिला कश्मीर की आरिफा हैं. श्रीनगर की रहने वाली आरिफा ने बताया कि उन्होंने क्राफ्ट मैनेजमेंट किया है. उन्होंने बताया कि कैसे कभी कश्मीर की शान रही दस्तकारी दम तोड़ रही है. आरिफा ने नमदा दस्तकारी को जिंदा करने की अपनी पहल के बारे में बताया और महिलाओं से नौकरी ढूंढने की जगह नौकरी देने के लिए आंट्रप्रन्योरशिप की तरफ बढ़ने की अपील की. उनके अनुसार उन्हें फील्ड विजिट के लिए कारीगरों के घरों में ले जाया जाता था.

तब उन्हें पता चला कि आज कारीगरों की हालत ऐसी क्यों है और दस्तकारी क्यों दम तोड़ रही है. उन्होंने बताया कि कारीगरों को उनके मेहनत की उचित मजदूरी नहीं मिलती है. इससे दस्तकारी को गहरा धक्का लगा. आरिफा ने ठान लिया कि वह कश्मीर रहकर कश्मीर के लिए कुछ न कुछ जरूर करेंगी. फिर उन्होंने नमदा क्राफ्ट में दोबारा जान डालने की ठान ली.

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