Opinion

कोरोना, तबलीगी जमात, गृह मंत्रालय व डोभाल पर महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख के सवाल और टीवी चैनल-अखबार की चुप्पी

Girish Malviya

महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने कोरोना और तबलीगी जमात का जो अटूट संबंध मीडिया ने स्थापित कर दिया, उसपर कुछ अहम और बुनियादी सवाल उठाये हैं. जो मीडिया के एकतरफा व्यहवहार के कारण चर्चा में नहीं आ पाये? प्रमुख टीवी चैनल और अखबार में भी खबरें गायब ही हैं.

सबसे पहले तो महाराष्ट्र के गृह मंत्री ने केन्द्र की मोदी सरकार से पूछा है कि यह बताइये कि “केंद्रीय गृह मंत्रालय” ने दिल्ली में निजामुद्दीन में तबलीगी जमात के इज्तेमा के आयोजन की आखिर अनुमति क्यों दी?

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यह बहुत ही महत्वपूर्ण सवाल है कि जब हमें शुरू से मालूम है कि कोरोना के संक्रमण के लिए विदेशी यात्री जिम्मेदार हैं और हर साल मरकज के इस प्रोग्राम में सैकड़ों विदेशी मुस्लिम का आना जाना होता है. तो आखिर कैसे इस प्रोग्राम को लेकर मोदीं सरकार लापरवाह बनी रही.

देशमुख कहते हैं कि मरकज के पास निजामुद्दीन पुलिस थाना होने के बावजूद Covid-19 खतरे के मद्देनजर इज्तेमा रोका क्यों नहीं गया.

देशमुख का कहना है कि 15 और 16 मार्च को मुंबई के उपनगर वसई में 50 हजार तबलीगी जमात के लोग इकट्ठा होने वाले थे, लेकिन राज्य सरकार ने यह कार्यक्रम रोक दिया.

यानी देशमुख यह पूछ रहे हैं कि जब एक प्रदेश की सरकार यह खतरा समझ रही थी और कड़े कदम उठा रही थी, तो केंद्र की मोदी सरकार क्यों करोड़ो लोगों की जान से खेल रही थी?

अनिल देशमुख ने दूसरा सवाल यह उठाया कि एनएसए अजीत डोभाल ने जमात नेता मौलाना साद से उस दौरान देर रात 2 बजे मुलाकात की थी. उन्होंने दोनों के बीच हुई ‘गुप्त’ बातचीत की प्रकृति पर सवाल उठाया.

इसी कड़ी में एनसीपी नेता अनिल देशमुख ने यह भी सवाल किया कि अजीत डोभाल को देर रात मौलाना साद से मिलने के लिए किसने भेजा था. उन्होंने सवाल किया, ‘जमात सदस्यों से संपर्क करना एनएसए का काम था या दिल्ली पुलिस कमिश्नर का?

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देशमुख ने अपने पत्र में सरकार से सवाल किया है कि “अजित डोभाल” से मुलाकात के बाद मौलाना साद अगले दिन कहां फरार हो गया?  वह (मौलाना) अब कहां है?  उनसे (जमात सदस्यों से) कौन संबंधित है?

इन सवालों का अर्थ यह निकाला जाये कि महाराष्ट्र के गृह मंत्री किसी ऐसी संधि की ओर इशारा कर रहे हैं, जो जमात और सरकार के बीच थी?

इस सिलसिले में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि 28 मार्च से तबलीगी वाला प्रकरण चल रहा है. अब तक उसके प्रमुख मौलाना साद को गिरफ्तार तक नहीं किया गया है?  आखिर क्यों?

जब भी कोई यह सवाल उठाता है तो उसके सेल्फ क्वारंटाइन में होने की बात कह दी जाती है,  सीधी बात तो यह है कि जब तक मौलाना साद बाहर रहेगा, तब तक टीवी चैनल मीडिया इस मुद्दे पर बहस चला पायेगा. उसकी गिरफ्तारी को लंबा खींचने में यह बहुत बड़ा फायदा है!

महाराष्ट्र के गृहमंत्री ने यह भी पूछा है कि अजित डोभाल और दिल्ली पुलिस कमिश्नर एसएन श्रीवास्तव ने इस मुद्दे पर कुछ क्यों नहीं बोला है?

महाराष्ट्र में बीजेपी की सबसे पुरानी सहयोगी शिवसेना एनसीपी गठबंधन की सरकार है. बाला साहब ठाकरे के पुत्र उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री हैं. यानी यह सवाल उनकी विश्वस्त सहयोगी रही पार्टी ही उठा रही है कि देशभर में कोरोना वायरस संक्रमण फैलने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय को जिम्मेदार क्यों नहीं ठहराया जाना चाहिए?  तो यह प्रश्न महत्वपूर्ण है या नहीं?

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