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5 अप्रैल को 9 मिनट लाईट बुझाने और मोमबत्ती जलाने के चक्कर में ना हो जाये पूरे देश की बिजली गुल

Akshay Kumar Jha

Ranchi: दुनिया में हर एक जुबान पर अगर किसी का नाम है, तो वो है कोरोना. कोरोना महामारी पर कैसे और कितनी जल्दी जीत दर्ज की जाय, इसके लिए तमाम तरह के उपायों पर हर देश काम कर रहा है. कभी ना देखे और सुने जाने वाले लॉकडाउन का सच आज आंखों के सामने हकीकत बनकर खड़ा है. अस्पतालों में एक अजीब सी शांति छायी है.

हर बीमारी इस कोरोना के सामने बौनी साबित हो रही है. सामुदायिक भवन, विवाह मंडप, स्कूलों, मस्जिदों और यहां तक की ट्रेनों को क्वारंटाइन सेंटर में तब्दील करने की कवायद हो रही है. इस बीच भारत में भी काफी कुछ देखने को मिल रहा है.

पीएम मोदी की अपील पर 22 तारीख की जनता कर्फ्यू के दिन शाम को थाली और घंटा या घंटी बजाने का अद्भुत नजारा देखने को मिला. लोगों ने अति उत्साह में आकर थाली बजाने की रैली तक निकाल दी. ऐसा करने से दिनभर के जनता कर्फ्यू का किया-धरा पानी में बह गया.

24 मार्च से पूरे देश में जनता कर्फ्यू लगने के बाद से फिर से एक बार पीएम मोदी ने अपील की है. अपील है कि पांच अप्रैल को रोजाना की तरह लॉकडाउन का पालन करते हुए रात के नौ बजे नौ मिनट तक घरों की बत्तियां बुझा देनी और मोमबत्ती- दीया या उसकी ही जैसे किसी दूसरी चीजों से रोशनी कर देशभर को एकजुटता दिखानी है.

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पीएम की अपील के बाद फूलने लगे हैं ऊर्जा विभाग के हाथ-पांव

तीन अप्रैल को दिन के ठीक नौ बजे जैसे ही पीएम मोदी ने पांच अप्रैल को नौ बजे, नौ मिनट के लिए पूरे देश की बत्ती बुझा देनी की बात की वैसे ही केंद्र से लेकर राज्य तक के ऊर्जा विभाग के हाथ-पांव फुलने लगे. बहुतों ने इसे कोरोना जैसी महामारी से लड़ने के वक्त ऐसा करना महज एक मजाक बताया,  तो कईयों ने इसे कई माध्यमों से जोड़कर एक महान काम बताया.

लेकिन ऐसी घोषणा होते ही केंद्र सरकार के पावर मिनिस्टर आरके सिंह और उनकी मिनिस्ट्री को अलर्ट मोड में आना पड़ा. मिनिस्टर ने आला अधिकारियों के साथ अहम बैठक की. वजह तकनीकी है. कारण कि पावर लोड अचानक बढ़ने या घटने से ब्लैक आउट हो सकता है. यानी बिजली ग्रिड की भी बत्ती गुल हो सकती है. लॉकडाउन जैसी परिस्थिति में इसे बनाने में कई दिन लग सकते हैं.

देशभर में पावर प्लांट से पावर हाउस और फिर वहां से घर-घर में बिजली पहुंचाने की जो तकनीकी व्यवस्था है, उसे ग्रिड कहते हैं. ये ग्रिड सिर्फ लोड बढ़ने से ही नहीं बल्कि लोड के अचानक घटने से भी खराब हो सकती है. ऐसी सूरत में कहीं पीएम मोदी की अपील के बाद पूरे देश की बत्ती कई दिनों तक गुल ना हो जाये, उसके लिए बिजली संयंत्रों से जुड़े कर्मी और अधिकारी एक्शन में हैं. बैठकों का दौर शुरू है. जबकि पूरी दुनिया की लोगों की तरह ऊर्जा विभाग से जुड़े लोग भी कोरोना से पहले से ही परेशान थे. देशभर में निर्बाध बिजली देने की चुनौती इनके सामने पहले से ही थी.

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ग्रिड का वोल्टेज बढ़ने से हो सकती है परेशानी  

झारखंड के एकमात्र बिजली उत्पादन करने वाली कंपनी टीटीपीएस से रिटार्यड इंजीनियर सनातन सिंह का कहना है कि अचानक से देशभर की बत्ती बुझाने से ग्रिड कोलैप्स्ड कर सकता है, इसके लिए पहले से ही तैयारी रखनी होगी. जेनेरेशन को हर हाल में कम करना होगा.

अगर ऐसा नहीं होता है तो ग्रिड का वोल्टेज बढ़ जाएगा, जिससे ग्रिड फेल हो सकता है. जेनरेशन और डिमांड की गणना करनी होगी. उसी के अनुसार, जेनरेशन को कम करना होगा. किसी भी ग्रिड में तीन-चार फीसदी वोल्टेज अप या डाउन बर्दाश्त किया जा सकता है. लेकिन उससे ज्यादा अप या डाउन हुआ तो ग्रिड ट्रिप कर जायेगा.

जहां इस वक्त कोरोना जैसी महामारी से बचने की रणनीति पर ब्यूरोक्रेटस और दूसरे संसाधनों को काम करना था, अब वो नौ मिनट के चक्कर में परेशान हैं. देश की तमाम राज्य सरकार की तरफ से बिजली विभाग को कई तरह के निर्देश दिये गये हैं. निर्देश को पालन करने के लिए ऊर्जा विभाग को मुस्तैदी से लगना है.

इस समय देश का पीक लोड 120 गीगावाट है. जिसमें घरेलू रोशनी में 12-15 गीगावाट बिजली की खपत होती है. देश की बिजली व्यवस्था सुचारू रूप से चलती रहे, इसके लिए 15 गीगावाट बिजली का उतार-चढ़ाव मैनेज करना है. जो एक बड़ी चुनौती है. वो भी ये चुनौती का सामना उस समय करना है, जब भारत समेत दुनिया आजतक कि सबसे बड़ी चुनौती का सामना कर रही है.

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