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25 नवंबर को विहिप की धर्मसभा, अयोध्या  छावनी में तब्दील, पीएसी की 48 कंपनियां तैनात

अयोध्या में विहिप की 25 नवंबर को प्रस्तावित धर्मसभा को लेकर यूपी शासन अलर्ट हो गया है. धर्मसभा में एक लाख से अधिक की भीड़ जुटने और कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका के मद्देनजर अयोध्या में भारी संख्या में फोर्स व अधिकारियों की तैनाती कर दी गयी है.

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Lucknow : अयोध्या में विहिप की 25 नवंबर को प्रस्तावित धर्मसभा को लेकर यूपी शासन अलर्ट हो गया है.  बता दें कि धर्मसभा में एक लाख से अधिक की भीड़ जुटने और कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका के मद्देनजर अयोध्या में भारी संख्या में फोर्स व अधिकारियों की तैनाती कर दी गयी है.  खबरों के अनुसार फैजाबाद व समीपवर्ती जिलों की पुलिस सहित पीएसी की 48 कंपनियां तैनात कर दी गयी है. इस कारण अयोध्या छावनी में तब्दील हो गयी है. इस क्रम में गुरुवार शाम मुख्य सचिव डॉ अनूप चंद्र पांडेय, प्रमुख सचिव गृह अरविंद कुमार व डीजीपी ओपी सिंह ने वीडियो कांफ्रेंसिंग कर मंडलायुक्त, डीएम, डीआईजी व एसएसपी समेत अन्य अधिकारियों से सुरक्षा व़्यवस्था की तैयारियों की जानकारी ली.  साथ ही सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का पूरी तरह पालन कराने का आदेश दिया. डीजीपी के अनुसार सुरक्षा व्यवस्था की दृष्टि से अयोध्या को आठ जोन व 16 सेक्टरों में बांटा गया है.  हर जोन व सेक्टर में पुलिस व प्रशासनिक अफसरों तैनात किये गये हैं.  पुलिस अधीक्षक स्तर के पांच, अपर पुलिस अधीक्षक स्तर के 15 व 19 सीओ की अतिरिक्त तैनाती की गयी है.

डीआईजी को राम जन्म भूमि परिसर के रेड जोन की सुरक्षा का जिम्मा

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सुरक्षा प्रबंधों की निगरानी के लिए दो वरिष्ठ आईपीएस अफसर नियुक़्त किये गये हैं. खबरों के अनुसार एडीजी तकनीकी सेवा आशुतोष पांडेय व डीआईजी झांसी सुभाष सिंह बघेल अयोध्या भेजे गये हैं. एडीजी पर ब्लू व यलो जोन की सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी है,  डीआईजी को राम जन्म भूमि परिसर के रेड जोन की सुरक्षा का जिम्मा मिला है. एडीजी शिव सेना के  कार्यक्रमों पर व डीआईजी को विश्व हिंदू परिषद के कार्यक्रमों पर नजर रखेंगे.  राज्य के खुफिया विभाग के अफसर सहित अन्य अधिकारियों को मौके पर भेजा गया है.  अयोध्या में होने वाली धर्मसभा से सत्ता पक्ष के परोक्ष जुड़ाव देखते हुए शुरूआती दौर में अफसर वहां अधिक फोर्स तैनात करने में हिचक रहे थे.  लेकिन खुफिया एजेंसियों द्वारा कार्यक्रम के दौरान कानून-व्यवस्था प्रभावित होने का अंदेशा जताये जाने के बाद सुरक्षा-व्यवस्था कड़ी करने का फैसले किया गया.

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