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लोकसभा चुनाव में प्रचार के पुराने तरीके गायब, सोशल मीडिया के जरिये एक दूसरे को मात देने की तैयारी

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Ranchi : 17वीं लोकसभा को लेकर भाजपा, कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, बसपा, झामुमो, झाविमो, राजद, वाम दल और अन्य पार्टियां चुनावी समर में जोर-आजमाइश में जुटी हुई हैं. बड़े दल ही नहीं क्षेत्रीय दल भी चुनाव के प्रचार-प्रसार को लेकर अपनी जुगत लगा रहे हैं. साथ ही ट्विटर, फेसबुक, ह्वाट्सएप, इलेक्ट्रॉनिक प्रचार और अन्य माध्यमों का उपयोग करने में लगे हैं.

आधुनिक प्रचार-प्रसार के तरीके में दीवार लेखन, पोस्टर और सघन जनसंपर्क अभियान अब थम सा गया है. चुनावी प्रचार में अब तक लाउड स्पीकर से प्रचार शुरू ही नहीं हो पाया है. बड़ी पार्टियां चुनावी सभाएं कर रही हैं. मतदाताओं को रिझाने के नाम पर अभी दलों की तरफ से वॉयस एसएमएस और एसएमएस नहीं भेजे जा रहे हैं. यह भी मतदान की तिथि के पहले शुरू हो जायेगा.

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झारखंड में कहीं नहीं दिख रहा है दीवार लेखन

झारखंड में दीवार लेखन के जरिये उम्मीदवारों को वोट देने का माध्यम अब समाप्त हो गया है. तत्कालीन निर्वाचन आयुक्त टीएन शेषण और उनके बाद के आयुक्त श्री लिंगदोह के समय ही इस पर रोक लगायी गयी थी.

पहले चुनाव में सभी दलों को दूरदर्शन के क्षेत्रीय प्रसारण केंद्रों में 10-10 मिनट का समय भी दिया जाता था. इस बार तो अब तक किसी भी दल से इसके लिए न तो नाम मांगा गया है और न ही राजनीतिक दलों ने इसके लिए अपने नाम भेजे हैं.

आयोग की सख्ती से प्रचार-प्रसार पर भी लग रहा है लगाम

इस बार के चुनाव में प्रचार-प्रसार से संबंधित सभी सामग्रियों पर मीडिया-कोऑर्डिनेशन कमेटियों (जिला और राज्य स्तरीय) से प्रमाण पत्र लेने की वजह से भी प्रसार प्रभावित हो रहा है.

अब तो मतदान के पूर्व प्रिंट मीडिया पर दिये जानेवाले विज्ञापन को भी प्रमाणित कराना जरूरी कर दिया गया है. 2014 के चुनाव में चुनाव घोषणा के बाद दलों के बड़े-बड़े होर्डिंग्स शहरों में भर जाते थे. इस बार शहरों में भी कहीं-कहीं ही होर्डिंग्स दिख रहे हैं.

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2004-2009 में बड़े-बड़े कलाकार करते थे चुनावी सभा

2004-2009 में लोकसभा चुनाव के दौरान कई टीवी कलाकारों ने उम्मीदवारों के पक्ष में चुनावी सभाएं की थीं. इसमें महाभारत सीरियल के गुफी पेंटल, मुकेश खन्ना, रूपा गांगुली, भीम की अदाकारी करनेवाले कलाकार और अन्य ने कांग्रेस उम्मीदवार के पक्ष में चुनावी सभाएं की थीं. इतना ही नहीं सिने तारिका महिमा चौधरी ने भी रांची में चुनावी सभाएं की थीं.

चुनावी घोषणा के बाद प्रेस मीडिया को नहीं मिलती थी फुरसत

चुनाव की घोषणा के बाद लगभग सभी दलों के अध्यक्ष, बड़े नेता और प्रवक्ता का प्रेस का संबोधन भी एक बड़ा आकर्षण का केंद्र होता था. यह अब काफी कम हो गया है. कुछ दल ही इस परंपरा को संभाल कर रखे हुए हैं. सभी दलों के स्टार प्रचारकों की ओर से चुनावी सभाओं को ही संबोधित किया जा रहा है. ये स्टार प्रचारक मीडिया से रू-ब-रू नहीं हो रहे हैं.

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