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बरियातू रोड स्थित ओल्ड एज होम में होता है वसूली का खेल, प्रताड़ित हो रहे बुजुर्गों की सुनने वाला कोई नहीं 

आर्य समाज ज्ञान प्रचार समिति द्वारा संचालित इस ओल्ड एज होम में ना तो बुजुर्गों के साथ अच्छा व्यवहार किया जा रहा और ना देखभाल की ही कोई उचित व्यवस्था है.

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तुम इतना जो मुस्कुरा रहे हो…क्या गम है जिसको छुपा रहे हो…

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आंखों में नमी हंसी लबों पर…क्या हाल  है क्या दिखा रहे हो…

Sweta/Chhaya

Ranchi : चेहरे पर मुस्कुराहट और आंखों में आंसुओं का सैलाब… दरवाजे पर एक दस्तक मन में कई उम्मीदें जगा जाती हैं. लेकिन फिर अगले ही पल भ्रम भी टूट जाता है. कुछ ऐसा ही हाल है इन दिनों ओल्ड एज होम्स का. जब सहारा बनना था, तब अपनों ने ही बेसहारा करके छोड़ दिया. अब एक सहारा रह गया, लेकिन वहां भी दर्द इतना है कि अब जायें तो कहां जायें.

राजधानी में कई ओल्ड एज होम्स हैं, जहां बूढ़े मां-बाप को उनके बच्चे छोड़ जाते हैं. या कुछ बुजुर्ग तो प्रताड़ित होकर खुद ही घर का त्याग कर देते हैं. न्यूज विंग की टीम ने एक ऐसे ही ओल्ड एज होम का जायजा लिया. ये ओल्ड एज होम बरियातू रोड स्थित डीएवी नंदराज कैंपस में है. आर्य समाज ज्ञान प्रचार समिति द्वारा संचालित इस ओल्ड एज होम में ना तो बुजुर्गों के साथ अच्छा व्यवहार किया जा रहा और ना देखभाल की ही कोई उचित व्यवस्था है. कोई काम पूरी मुस्तैदी से अगर वहां होता है तो वह है सिर्फ बुजुर्गों से पैसों की वसूली. इस आश्रम के संचालक शत्रुध्न लाल गुप्ता की इतनी चलती है कि कोई बुजुर्ग डर से विरोध नहीं करते हैं. जिसने भी विरोध किया उसे जबरन वहां से निकाल दिया जाता है. इस ओल्ड एज होम में ना तो किसी प्रकार के कानून का पालन होता है और ना ही कोई नियमावली ही है.

सेवा के नाम पर होती है वसूली

डीएवी नंदराज कैंपस में स्थित इस ओल्ड एज होम में हर सेवा के बदले बुजुर्गों से वसूली की जाती है. टोस्टर, इलेक्ट्रिकल केतली, कूलर, इंडक्शन आदि कोई भी जरूरती इलेक्ट्रिकल उपकरण रखने पर प्रति उपकरण 500 रूपये की वसूली की जाती है. इसके अलावा व्यक्तिगत टीवी रखने पर भी आश्रमवासियों से पैसे लिए जाते हैं. आश्रम के अंदर की एक-एक चीज दान में मिली हुई है. कई संस्थाओं की ओर से आये दिन जरूरत से सामान बांटे जाते हैं, लेकिन उसका भी बंदरबांट आश्रम के संचालक और मैनेजर कर लेते हैं. आश्रम में रहने का किराया 7500 महीना है. इसके अलावा किराया भी महीने की पहली ही तारीख को देना है, लेट हुआ तो फाइन देना होगा.

सेक्यूरिटी मनी तो बस नाम की बीमारी में देखते भी नहीं

वर्तमान में इस आश्रम में 30 बुजुर्ग रहते हैं. लेकिन दिसंबर महीने में पांच बुजुर्गों की जान ठंड से चली गयी. यहां पर पांच मौत हो चुकी है. लेकिन पांच बुजुर्गों का नाम सार्वजनिक नहीं कर सकते क्योंकि ऐसे में बाकियों को आश्रम की ओर से प्रताड़ित किया जायेगा. यहां बीमार पड़ने पर बुजुर्गों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध नहीं कराई जाती. कभी कोई फर्श पर गिर जाये तो उठाने वाला तो दूर, देखने वाला भी कोई नहीं. क्योंकि केयरटेकर सिर्फ दो ही है. बातचीत के दौरान कुछ बुजुर्गों ने बताया कि यहां रहने से पहले एक लाख रूपये सेक्यूरिटी मनी (किसी बीमारी या अस्पताल में इलाज कराने के लिए ली जाने वाली राशि) ली जाती है. लेकिन कोई बीमार पड़ जाए तो दवा भी मुश्किल से ही दी जाती है.

पौष्टिक खाना नहीं, सिर्फ खानापूर्ति

तीन वक्त मिलने वाले खाने में सूखी रोटियां, पानी जैसी दाल, सप्ताह में लगभग चार दिन तो आलू की सब्जी ही मिलती है. साथ ही लहसून, प्याज बुजुर्गों को नहीं मिलता. वो भी इसलिए क्योंकि ये महंगा है. अंडा या मांस-मछली के तो सपने भी अब बुजुर्गों को नहीं आते.

नहीं है कोई नियमावली

प्रबंधन और बुजुर्गों के लिए यहां कोई नियमावली नहीं है. प्रबंधन जब चाहे तब बुजुर्गों पर नियम थोप सकती है. हर रविवार को हवन कराया जाता है, जिसमें कोई बुजुर्ग नहीं आ पाएं तो उनसे 50 रूपये बतौर फाईन वसूली होती है. अगर आने में देर हो गयी तो उसके लिए भी 20 रूपये फाइन देने का नियम सख्ती से लागू है. इतना ही नहीं, अगर गलती से भी कोई बुजुर्गों से मिलने आ जाये तो  रिसेप्शन पर रखी गाय की मूर्ति पर चढ़ावा के नाम पर पैसे वसूले जाते हैं. वह भी ये कहकर की दान देना तो पुण्य का काम है.

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सहायता राशि से ही चल रहा आश्रम

बुजुर्गों से जितनी राशि ली जाती है. उस राशि के आय-व्यय का कोई ब्यौरा प्रबंधन के पास नहीं है. यहां अधिकांश सुविधाएं एचईसी, मेकॉन, जिमखाना क्लब, एसबीआई, सीसीएल समेत एनआरआइ देते हैं. वहीं त्योहारों के दिन लोग फल, मिठाई या अन्य जरूरती समान दे जाते हैं. लेकिन वो भी बुजुर्गों को नहीं मिलता. यहां तक इनके नाम पर आने वाली प्राथमिक दवाईयां भी नहीं दी जाती.

मानसिक रोगी और कुष्ठ रोगी भी हैं यहां

कहने को तो 60 की उम्र के बुजुर्गों के लिये ये आश्रय गृह है. लेकिन पैसे के लोभ में यहां मानसिक रोगी और कुष्ठ रोगियों को भी रखा जाता है. जिनसे बाकी रोगियों को परेशानी होती है. मानसिक रोगियों से इन बुजुर्गों को परेशानी होती है.

मनोरंजन का नहीं कोई साधन

बुजुर्गों के लिए यहां कोई मनोरंजन का साधन नहीं है. खुद की टीवी चलाओ तो पैसा मांगा जाता है. जबकि रविवार हो या कोई त्योहार बुजुर्गों का समय अकेले में ही बीतता है. दीवाली, होली, दशहरा जैसे त्योहारों में भी इन्हें खिचड़ी और दाल-रोटी ही खानी होती है. कभी-कभी कई संस्थावाले लोग इन बुजुर्गों के साथ समय व्यतीत करते हैं. जिससे इन्हें भी एक अपनापन लगता है. कुछ बुजुर्गों ने तो बताया कि लोग समान ऐसे देते हैं, जैसे हम भिखारी हों. ऐसे में दर्द और भी बढ़ा जाता है.

आरोपों से संचालक ने किया इनकार

शत्रुध्न लाल गुप्ता, बरियातू वृद्धाश्रम संचालक से जब न्यूज विंग ने इस बारे में बात की. तो उन्होंने बुजुर्गों के लगाये गये आरोपों को सीधे तौर पर नकार दिया. उन्होंने कहा कि हम पूरी श्रद्धा से बुजुर्गों की सेवा करते हैं और उनके लिये बढ़िया व्यवस्था भी हमने कर रखी है. साथ ही उन्होंने कहा कि कुछ बुजुर्ग तो यहां अय्याशी करने आते हैं और जब उन्हें यहां से निकाल दिया जाता है तो वे आश्रम पर आरोप लगाने लगते हैं. शत्रुध्न लाल गुप्ता ने न्यूज विंग की टीम से कहा कि आप आकर हमारे सामने आश्रम का मुआयना करें और अगर कोई कंप्लेन मिलेगी तो उसपर हम कार्रवाई करेंगे. साथ ही गोलमोल बातें करके खुद का बचाव भी करने लगे. लेकिन शत्रुध्न लाल गुप्ता ये भूल गये कि आश्रम का मुआयना करके और बुजुर्गों से बात करके ही ये रिपोर्ट तैयार की गयी है.

बुजुर्गों के इस दर्द को कम करने के लिये कुछ वक्त आप भी वहां गुजारें और प्यारभरी बातें करके उनके दर्द को कम करें. देने के लिये उनके पास ढ़ेर सारा आशीर्वाद, प्यार और दुआयें हैं.

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