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राज्य प्रशासनिक सेवा के अफसरों का जमीन और धन से मोह भंग नहीं हो रहा, जनवरी में तीन अफसर फंसे

  • रैयत से 10 फीसदी कमीशन लेने, मनरेगा कानून का उल्लंघन करने सहित सरकारी राशि गबन का है आरोप
  • शारदानंद देव, रवींद्र चौधरी और नागेंद्र शर्मा के खिलाफ चलेगी विभागीय कार्रवाई, कार्मिक ने जारी किया आदेश

Ranchi: राज्य प्रशासनिक सेवा के अफसरों का जमीन, कमीशन, गबन और धन से मोह भंग नहीं हो रहा है. इस साल जनवरी में तीन अफसरों पर आरोप लगा है. इन तीनों अफसरों के खिलाफ अब विभागीय कार्रवाई शुरू की जायेगी. जांच संचालन पदाधिकारी रिटायर अफसर विनोद चंद्र झा को बनाया गया है. कार्मिक ने विभागीय कार्रवाई शुरू करने का आदेश जारी कर दिया है. तीनों अफसरों के खिलाफ प्रथम दृष्टया में आरोप प्रमाणित पाया गया है.

शारदानंद देव पर 10 फीसदी कमीशन लेने का आरोप

कोडरमा के तत्कालीन भू-अर्जन पदाधिकारी शारदानंद देव पर रैयतों से कमीशन लेने का आरोप है. शारदानंद ने कोडरमा-रांची रेल लाइन निर्माण के लिये चंदवारा मौजा में महेंद्र कुशवाहा व अन्य 12 रैयतों की 12 एकड़ 54 डिसमिल अधिग्रधित जमीन के लिये अनुमान्य मुआवजा राशि के भुगतान में 10 फीसदी की दर से कमीशन के रूप में राशि वसूली का आरोप है. कोडरमा डीसी की रिपोर्ट के अनुसार प्रथम दृष्टया में यह आरोप प्रमाणित पाया गया है. शासदानंद देव को अपने बचाव में 15 दिनों के अंदर लिखित बयान देने को कहा गया है. जांच संचालन पदाधिकारी रिटायर आइएएस विनोद चंद्र झा को बनाया गया है. शारदानंद देव रिटायर हो चुके हैं.

मनरेगा कानून के उल्लंघन का आरोप

गुमला के डुमरी प्रखंड के तत्कालीन बीडीओ रवींद्र चौधरी पर मनरेगा कानून के उल्लंघन का आरोप है. इसके तहत प्रखंड में कार्यान्वित पौधारोपण एवं अन्य योजनाओं का सही ढंग से निरीक्षण एवं पर्यवेक्षण नहीं करने का आरोप है. साथ ही सरकारी राशि के गबन व दुरुपयोग में स्वयं सेवी संस्थाओं को लाभ पहुंचाने का भी आरोप है. गुमला डीडीसी की रिपोर्ट के अनुसार, प्रथम दृष्टया में आरोप प्रमाणित पाया गया है. चौधरी को बचाव के लिये 15 दिनों के अंदर लिखित बयान देने को कहा गया है. कार्मिक ने विभागीय कार्रवाई शुरू करने का आदेश जारी कर दिया है.

दुराचार को बढ़ावा देने का आरोप

देवघर नगर निगम के तत्कालीन उप मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी नागेंद्र शर्मा के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने का निर्णय लिया गया है. शर्मा के खिलाफ वित्तीय अनियमितता, प्रशासनिक अक्षमता, दुराचार को बढ़ावा देने, अनुशासनहीनता, स्वेच्छाचारिता एवं सरकारी कार्यों में शिथिलता बरतने का आरोप है. प्रथम दृष्टया में आरोप प्रमाणित पाया गया है. कार्मिक ने शर्मा के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने का आदेश जारी कर दिया है.

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