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दो साल से विश्वविद्यालयों की सीनेट बैठक में नहीं आ रहे उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारी

रांची यूनिवर्सिटी की ओर से उच्च शिक्षा विभाग में भेजा गया था आमंत्रण
इसके बाद भी 12 जुलाई को आयोजित सीनेट बैठक में नहीं आये थे अधिकारी

प्रस्तावों पर नहीं हो रहा कार्य

Ranchi: विश्वविद्यालयों के लिये बनाये गये नियम कायदों का राज्य में सही से पालन नहीं किया जाता. यूनिवर्सिटी सीनेट एक्ट के अनुसार, किसी भी विश्वविद्यालय में सीनेट की बैठक में उच्च शिक्षा सचिव या उच्च शिक्षा निदेशक को अनिवार्य रूप से उपस्थित होना है.

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किसी भी विश्वविद्यालय में सीनेट की बैठक सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है. जिसमें विश्वविद्यालय प्रबंधन, शिक्षक, कर्मचारी और छात्र प्रतिनिधि शामिल होते हैं.

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लेकिन राज्य के किसी भी यूनिवर्सिटी में आयोजित होने वाली सीनेट की बैठक में उक्त अधिकारी शामिल नहीं होते.
इस संबध में सिद्धो कान्हू मुर्मू, नीलांबर पितांबर, कोल्हान यूनिवर्सिटी, रांची यूनिवर्सिटी के सीनेट सदस्यों से बात की गयी.

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जिससे जानकारी हुई कि पिछले दो साल से होने वाले सीनेट बैठकों से लगातार उच्च शिक्षा सचिव और उच्च शिक्षा निदेशक अनुपस्थित रहे हैं.

हालांकि इन यूनिवर्सिटी के सीनेट सदस्यों की ओर से समय-समय पर मांग भी की गयी, लेकिन इसके बाद भी उच्च शिक्षा सचिव और निदेशक इन बैठकों में नहीं उपस्थित हुए.

RU की ओर से भेजा गया पत्र लेकिन नहीं आये अधिकारी

रांची यूनिवर्सिटी में पिछले 12 जुलाई को सीनेट की बैठक आयोजित की गयी. बैठक दो साल बाद हुई. इसके बाद भी इस बैठक में उच्च शिक्षा सचिव और उच्च शिक्षा निदेशक नहीं आये.

इस संबध में सीनेट सदस्यों ने यूनिवर्सिटी प्रबंधन पर काफी जोर दिया. जिसके बाद वीसी की ओर से उच्च शिक्षा सचिव व निदेशक को पत्र के माध्यम से बैठक का आमंत्रण दिया गया.

लेकिन इसके बाद भी सीनेट की बैठक में उच्च शिक्षा सचिव और निदेशक नहीं आये. जिसका बैठक के दौरान भी सदस्यों ने विरोध किया.

दो साल पूर्व तक तत्काल निदेशक बीएन ओझा बैठकों में होते थे शामिल

दो साल पूर्व की सीनेट बैठकों को देखें तो तत्काल उच्च शिक्षा के निदेशक बीएन ओझा उनके कार्यकाल मे होने वाले सीनेट बैठकों में शामिल होते थे. कई बार तत्कालीन शिक्षा सचिव भी बैठकों में आये.

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लेकिन इसके बाद से किसी भी अधिकारी ने इन बैठकों में रूचि नहीं ली. रांची यूनिवर्सिटी के सिंडीकेट सदस्य अर्जुन राम ने बताया कि पिछले दो साल से राज्य के यूनिवर्सिटी में ऐसी स्थिति हुई है. सीनेट से प्रस्ताव पास कर दिये जाते हैं. लेकिन उच्च शिक्षा विभाग में जाकर मामले लंबित रह जाते हैं.

जबकि पहले अधिकारियों के बैठक में उपस्थित होने से सीनेट में प्रस्तावित मांगों पर कार्रवाई की जाती थी. उन्होंने कहा कि सिंडिकेट की बैठकों में भी इन अधिकारियों को उपस्थित होना है, लेकिन ऐसा नहीं होता. पिछले दिनों सीनेट सदस्यों ने इस संबध में राज्यपाल को भी ज्ञापन दिया.

इस संबंध में उच्च शिक्षा सचिव से बात करने की कोशिश की गयी, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो पाया. उप निदेशक गौरी शंकर तिवारी ने कहा कि अधिकारी अपनी व्यस्तता के कारण उपस्थित नहीं हो पाते होंगे. इस संबध में उन्होंने अधिक जानकारी नहीं दी.

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