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अफसरों को नहीं पता अडानी पावर से एग्रीमेंट होगा या नहीं

राज्य में प्रतिदिन बिजली की डिमांड लगभग 1600 मेगावाट

Ranchi: दिसंबर से अडाणी पावर प्लांट से बिजली उत्पादन शुरू हो जायेगा. लेकिन 25 प्रतिशत बिजली राज्य को मिले, इसको लेकर राज्य सरकार ने अब तक एग्रीमेंट नहीं किया है. पहले अधिकारी कोरोना लॉकडाउन से काम प्रभावित होने की दलील दे रहे थे. वहीं अब एग्रीमेंट पर क्या कार्रवाई की जा रही है इसकी जानकारी वरीय अधिकारियों को नहीं है.

Sanjeevani

प्लांट शुरू करने की तैयारी लगभग पूरी:

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जबकि अडाणी समूह ने प्लांट शुरू करने की तैयारी कर ली है. एक यूनिट से लगभग आठ सौ मेगावाट बिजली उत्पादन किया जायेगा. अडाणी समूह की ओर से गोड्डा में दो यूनिट बनाया जा रहा है. जिससे कुल 1600 मेगावाट बिजली उत्पादन होगा. ऐसे में 800 सौ मेगावाट बिजली उत्पादन शुरू होने से राज्य को मिलने वाले दो सौ मेगावाट बिजली का नुकसान होगा. अडाणी समूह की ओर से ये प्लांट बांग्लादेश को बिजली देने के लिये बनाया गया है. ऐसे में प्लांट शुरू होने से पूरी बिजली बांग्लादेश को चली जायेगी.

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पिछले साल अक्टूबर तक करना था एमओयू:

अडाणी समूह की ओर से 2018 से गोड्डा में प्लांट बनाया जा रहा है. अडाणी समूह की ओर से साल 2016 में बांग्लादेश सरकार से इसके लिये एमओयू किया गया था. जिसके बाद झारखंड सरकार ने गोड्डा में प्लांट बनाने के लिये अडाणी समूह को जमीन दी. इस एग्रीमेंट के तहत उत्पादित बिजली का 25 प्रतिशत राज्य को मिलता. यहां दो यूनिट 800-800 मेगावाट के बन रहे है. जिससे 1600 मेगावाट बिजली उत्पादन होगा.

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एग्रीमेंट हो जाने से राज्य को मिलेगी 400 मेगावाट बिजली:

एग्रीमेंट नहीं होने से राज्य को 400 मेगावाट बिजली का नुकसान होगा. पहले फेज में 800 मेगावाट बिजली उत्पादन शुरू होगा. ऐसे में 200 मेगावाट के नुकसान की संभावना है. राज्य के अपने स्रोतों से बिजली उत्पादन न के बराबर है. बता दें पावर प्लांट अडाणी पावर झारखंड लिमिटेड की ओर से बनाया जा रहा है.

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15000 करोड़ का निवेश, 900 एकड़ जमीन गोड्डा में मिला:

प्लांट के लिये अडाणी समूह 15000 करोड़ रूपये निवेश कर रही है. गोड्डा में इसके लिये 900 एकड़ जमीन राज्य सरकार ने दिया है. एक अनुमान है कि इस प्लांट में अलग-अलग प्रखंडों के लगभग 841 परिवारों को विस्थापित किया गया. प्लांट के लिये मोतिया, गंगटा गोविंदपुर, पटवा, पौड़ेयाहाट, गायघाट और सोनाडीह में जमीन ली गयी है.

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राज्य में अपने स्रोत से बिजली न के बराबर:

राज्य में प्रतिदिन बिजली डिमांड लगभग 1600 मेगावाट तक रहती है. जबकि राज्य में बिजली उत्पादन के अपने स्रोतों में मात्र सिकिदरी हाईडल प्लांट और टीटीपीएस है. जिसमें सिकिदरी से 120 मेगावाट बिजली और टीटीपीएस 275 मेगावाट तक बिजली मिलती है. सिकिदरी प्लांट समय-समय पर बंद रहता है. वहीं डीवीसी, आधुनिक, इंलैंड समेत अन्य कंपनियों से बिजली खरीदी जाती है. सिर्फ सेंट्रल पूल से राज्य को सात सौ मेगावाट तक बिजली मिलती है. ऐसे में एमओयू होना राज्य के लिए फायदेमंद साबित होगा. वहीं डीवीसी की ओर से बार बार की जाने वाली बिजली कटौती से भी राहत मिलेगी.

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क्या कहते हैं ऊर्जा सचिव:

ऊर्जा सचिव अविनाश कुमार ने कहा कि अडाणी पावर प्लांट से एग्रीमेंट की फिलहाल कोई जानकारी नहीं है. इसपर कोई जानकारी नहीं दी जा सकती है. मामला विचाराधीन ही समझा जा सकता है.

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