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जरा सोचिये सरकार : राज्य में 29 सरकारी आईटीआई में से 23 बिना प्राचार्य के, 1193 इंस्ट्रक्टर की भी कमी

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Ranchi : राज्य में शिक्षा व्यवस्था काफी लचर हो चुकी है. राज्य के 67 हजार पारा शिक्षक आंदोलनरत हैं, लाखों स्कूली बच्चों की पढ़ाई बाधित है. राज्य के आईटीआई संस्थानों का हाल भी बिल्कुल ऐसा ही है. राज्य में संचालित होनेवाले सरकारी आईटीआई कॉलेजों के करीब 5400 छात्रों के भविष्य के साथ भी सरकार खिलवाड़ कर रही है. हर साल छात्र आईटीआई में दाखिला लेते हैं, पर वे बिना इंस्ट्रक्टर के ही पढ़ने को मजबूर हैं. सरकारी आईटीआई कॉलेजों में 32 ट्रेडों की पढ़ाई होती है, जिनके लिए वर्तमान में 1193 इंस्ट्रक्टरों की आवश्यकता है. राज्य में 29 सरकारी आईटीआई कॉलेज हैं, जिनमें से 23 में तो प्रार्चाय ही नहीं हैं. 21 आईटीआई में तो उपप्राचार्य के पद भी खाली हैं. जरा सोचिये सरकार जब इंस्ट्रक्टर, प्राचार्य और उपप्रचार्य ही नहीं हैं, तो पढ़ाई की स्थिति क्या होगी, और यहां से पास होनेवाले छात्रों का स्तर क्या होगा, यह एक बड़ा सवाल है.

कई सालों से रिक्त हैं पद

राज्य के आईटीआई कॉलेजों में कई सालों से प्राचार्य, उपप्राचार्य और इंस्ट्रक्टरों के पद रिक्त हैं. श्रम, नियोजन एवं प्रशिक्षण विभाग दवारा संचालित इन आईटीआई कॉलेजों में रिक्तियों को भरने के लिए विभाग ने राज्य कर्मचारी चयन आयोग को अधियाचना भेजी है. इन नियुक्यिों को पूरा करने के लिए अभी तक विज्ञापन तक नहीं निकाला गया है. सरकार को दिये जवाब में विभाग ने बताया है कि अभी यह नियुक्ति प्रक्रियाधीन है.

करोड़ों खर्च कर चलाया जाता है अल्पावधि कोर्स

झारखंड कौशल विकास मिशन सोसाइटी द्वारा भी अल्पावधि के प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाये जाते हैं. श्रम विभाग कहता है कि जिन छात्रों को अल्पावधि में प्रशिक्षित किया जाता है, उन्हें सरकार निजी क्षेत्रों में नियोजित करती है. अभी तक इस योजना के तहत विभाग ने कुल 26969 युवाओं को प्रशिक्षित किया है और वर्तमान में 16537 युवा प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं. विभाग इन युवाओं के लिए साल में करोड़ों रुपये खर्च कर रहा है.

आईटीआई पास युवाओं को नहीं मिलता है प्लेसमेंट

राज्य सरकार अपने सरकारी आईटीआई कॉलेजों के लिए भी प्लेसमेंट की सुविधा उपलब्ध नहीं करा पा रही है. आईटीआई पास कर लेने के बाद युवा नौकरी के लिए कॉलेज के प्लेसमेंट सेल से सभी उम्मीद भी छोड़ देते हैं. नौकरी की आस लिये युवाओं के लिए राज्य से पलायन करना ही एकमात्र विकल्प बचता है.

निजी तकनीकी कॉलेजों में अब बंद होंगे सरकारी अनुदान

राज्य सरकार ने 27 दिसंबर को हुई कैबिनेट की बैठक में निजी तकनीकी कॉलेजों को भी अब सरकार अनुदान नहीं देगी. इससे पहले तकनीकी कॉलेजों को सरकार की तरफ से आधारभूत संरचना समेत अन्य कार्यों के लिए छह करोड़ तक के सरकारी अनुदान देने का प्रावधान था. इससे अब राज्य में निजी तकनीकी कॉलेजों के खुलने की भी संभावना कम हो जायेगी.

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