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जिले में अब नहीं कर पायेंगे नर्सिंग होम और निजी अस्पताल मनमानी : सीएस

क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट पर कायर्शाला का आयोजन

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Lohardaga : क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट पर कायर्शाला का आयोजन गुरुवार को सदर प्रखंड के सभागार में संपन्न हुआ. जिसकी अध्यक्षता सिविल सर्जन डॉ विजय कुमार ने की. कायर्शाला में प्राइवेट अस्पताल, नर्सिंग होम संचालकों व पैथोलॉजी संचालकों को एक्ट के बारे में विस्तार से जानकारी दी गयी. साथ ही एक्ट के अनुरूप औपचारिकताएं पूरी करने को कहा गया. यह भी कहा गया कि पांच दिनों के अंदर प्राइवेट अस्पतालों, नर्सिंग होम व पैथोलॉजी संचालकों को सभी औपचारिकताएं पूरी कर लेना है. ऐसा नहीं करने वालों के खिलाफ वि भागीय कार्रवाई होगी.

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कर्मियों का पूरा ब्याैरा सार्वजनिक करना होगा

एक्ट के तहत सभी को रजिस्ट्रेशन व रेनुअल कराना आवश्यक है. इसके अलावा बायोमेडिकल वेस्ट, प्रदूषण, अग्निशमन आदि विभागों का सभी प्रमाणपत्र अनिवार्य तौर पर होनी चाहिए. मौके पर सीएस डॉ सिंह ने कहा कि जिले में अब नर्सिंग होम और निजी अस्पताल मनमानी नहीं कर पाएंगे. सेवा का प्रकार, चिकित्सक, नर्स और अन्य कर्मियों का पूरा ब्याैरा सार्वजनिक करना होगा. इनपर प्रभावी नियंत्रण के लिए क्लीनिकल इस्टेब्लिशमेंट एक्ट में स्टेट कंसल्टेंट रिसोर्स पर्सन डॉ. राहुल कुमार सिंह ने कहा नर्सिंग होम और निजी अस्पताल का क्लीनिकल इस्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत निबंधन कराना अनिवार्य होगा. निबंधन के बाद सभी इकाईयां सरकार के नियंत्रण में रहेंगी और नियमों की अनदेखी करनेवालों पर 5 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा.

उल्लंघन पर क्या मिलेगी सजा

नियमों का उल्लंघन करने एवं बिना पंजीकरण अस्पताल का संचालन करने पर पहले अपराध के लिए 50 हजार, दूसरे अपराध के लिए दो लाख और इसके बाद पांच लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा. गैर पंजीकृत संस्थानों पर 25 हजार रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा. जुर्माना नहीं देने पर भू-राजस्व बकाया के रूप में यह धनराशि वसूली जाएगी.

क्या कहता है एक्ट

अस्पताल आनेवाले हर मरीज का इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड और मेडिकल हेल्थ रिकॉर्ड अस्पताल प्रशासन के पास सुरक्षित होना चाहिए. इस एक्ट के मेटरनिटी होम्स, डिस्पेंसरी क्लिनिक्स, नर्सिंग होम्स, एलोपैथी, होम्योपैथी और आयुर्वेदिक से जुड़ी स्वास्थ्य सेवाओं पर समान रूप से लागू होता है. हर अस्पताल, क्लीनिक्स का खुद का रजिस्ट्रेशन भी जरूरी है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि वो लोगों को न्यूनतम सुविधाएं और सेवाएं दे रहे हैं.

इस एक्ट के तहत प्रत्येक स्वास्थ्य सुविधा देनेवाले संस्थानों का यह कर्तव्य है कि किसी रोगी के इमरजेंसी में पहुंचने पर उसको तुरंत स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया करवाए, जिससे रोगी को स्थिर किया जा सके. प्रत्येक अस्पताल अपनी सेवाओं की कीमत केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित सीमाओं के भीतर ही ले सकेंगे. इसके अलावा अस्पतालों को स्वास्थ्य सुविधाओं के एवज में ली जा रही कीमत को अंग्रेजी और स्थानीय भाषा में चस्पा करना होगा. इस एक्ट से जुड़े प्रावधानों का उल्लंघन करने पर अस्पताल का रजिस्ट्रेशन रद से लेकर, उन पर जुर्माने का प्रावधान है.

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