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राज्य में नहीं बढ़ रही सीटों की संख्या, पढ़ाई के लिये 20 हजार छात्र करते हैं दूसरे राज्यों का रूख   

एडमिशन के नाम सालाना 50 करोड़ दूसरे राज्यों के संस्थानों में जाता है.

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Ranchi : राज्य में उच्च शिक्षा व्यवस्था अब तक अपनी लय नहीं पकड़ सका है. पांचों विश्वविद्यालयों में जितनी सीटें हैं, उससे 50 हजार से अधिक छात्र हर साल मैट्रिक की परीक्षा पास करते हैं. राज्य सरकार अब तक अंगीभूत कॉलेजों में सीटों की संख्या नहीं बढ़ा पाई है. जिसके कारण 50 हजार से अधिक छात्र निजी विश्वविद्यालयों, प्लस टू स्कूलों या फिर दूसरे राज्यों की ओर रुख करते हैं. राज्य के 84 अंगीभूत व संबद्ध(एफिलियेटेड) कॉलेजों में कुल 142453 सीटें हैं. वहीं राज्य के अच्छे कॉलेजों में 50 फीसदी से अधिक सीटें सीबीएसई और आइसीएसई के छात्रों से भर जाती हैं. वहीं दो विश्वविद्यालय डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी और विनोद बिहारी महतो विवि की स्थापना हो चुकी है, लेकिन सीटों की गिनती रांची विवि और सिद्धो-कान्हो यूनिवर्सिटी के अंदर ही की गई है.

नहीं शुरू हो पाई दो पालियों में पढ़ाई

वर्ष 2008 से ही दो सरकारी कॉलेजों में दो पालियों में पढ़ाई की कवायद शुरू की गई थी. लेकिन यह प्रयास भी अब तक जमीं पर नहीं उतर सका है. अधिकांश छात्र प्लस टू स्कूलों में नामांकन नहीं करना चाहते हैं. इन स्कूलों में आधारभूत संरचनाओं का अभाव है. राज्य में 57 प्लस टू स्कूल हैं. फरवरी में मैट्रिक की परीक्षा होने वाली है. अप्रैल-मई में रिजल्ट आने के बाद फिर से कॉलेजों में एडमिशन की मारा-मारी शुरू हो जायेगी. लेकिन सरकार की ओर से अब तक सीट बढ़ाने की पहल नहीं की गई है.

हर साल 20 हजार छात्र दूसरे राज्यों का करते हैं रूख

हर साल लगभग 20 हजार छात्र दूसरे राज्यों की ओर रूख करते हैं. सरकारी आंकड़ों के अनुसार हर साल एडमिशन के नाम पर 50 करोड़ रुपये दूसरे राज्यों में जाता है. सबसे ज्यादा 15 हजार छात्र इंजिनियरिंग का कोर्स करने के लिये दूसरे राज्यों में जाते हैं. राज्य में इंजीनियरिंग की 3340 सीटें हैं. इंजीनियरिंग के लिये छात्र बंगलुरू, चेन्नई, मुंबई, मेरठ और ओडिशा का रूख करते हैं. वहीं मैनेजमेंट के लिये पुणे और दिल्ली का रुख करते हैं. मेडिकल की पढ़ाई के लिये दक्षिणी भारत के राज्य  पुणे, दिल्ली, बनारस और मुंबई का रूख करते हैं.

किस पढ़ाई के लिये कितने छात्र किस राज्य में जाते हैं

इंजीनियरिंग

बंगलुरू: लगभग 4000 छात्र

चेन्नई: लगभग 2000 छात्र

मुंबई: लगभग 2000 छात्र

मेरठ: लगभग 2000 से 2500 छात्र

एमबीए(मैनेजमेंट)

मुबंई(पुणे)- लगभग 2500 छात्र

दिल्ली – लगभग 500 छात्र

मेडिकल

दक्षिणी भारत के राज्य – लगभग 1500 छात्र

पुणे- लगभग 500 छात्र

दिल्ली – लगभग 400 छात्र

बनारस – लगभग: 200 छाक्ष

मुंबई – लगभग 200 छात्र

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