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#NSO के आंकड़ों से खुलासा: #ODF घोषित झारखंड के 42 फीसदी घरों में टॉयलट नहीं

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Ranchi: 2 अक्टूबर 2019 को देश के प्रधानमंत्री मोदी ने देश को ‘खुले में शौच’ से मुक्त घोषित किया था. वहीं झारखंड को 15 नवंबर 2018 को ही ओडीएफ घोषित कर दिया गया था. हालांकि, केंद्र सरकार ने 2 अक्टूबर 2019 का लक्ष्य दिया था, लेकिन राज्य सरकार ने इसे एक साल पहले ही पूरा कर लिया.

लेकिन राष्ट्रीय सांख्यिकीय कार्यालय (NSO) द्वारा किये गये सर्वे के आंकड़ें बताते है कि झारखंड और देश के कई राज्यों में ग्रामीण इलाके अब भी खुले में शौच से मुक्त नहीं है.

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2 अक्टूबर, 2019 को प्रधानमंत्री ने घोषणा की थी कि देश के ग्रामीण इलाकों का 95 फीसदी हिस्सा “खुले में शौच” से मुक्त कर दिया गया है. जबकि, NSO के मुताबिक उस अवधि के लिए यह आंकड़ा 71 फीसदी ही था. वहीं झारखंड के 42 फीसद घरों में ही शौचालय है.

झारखंड के 42 फीसदी घरों में टॉयलट नहीं

सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के तहत NSO ने जुलाई 2018 और दिसंबर 2018 की अवधि के बीच पेयजल, स्वच्छता, स्वच्छता और आवास की स्थिति पर सर्वेक्षण किया था. इस सर्वे के आंकड़े बताते है कि एक चौथाई घरों में शौचालय की सुविधा नहीं है.

अगर झारखंड की बात करें तो जिस दौरान एनएसओ का सर्वे हो रहा था, उसी दौरान राज्य को सरकार ने खुले में शौच से मुक्त घोषित किया. झारखंड सरकार ने पांच अक्तूबर 2018 को ही 40 लाख शौचालय बना कर शत-प्रतिशत लक्ष्य पूरा कर लिया. हालांकि, इसकी घोषणा राज्य स्थापना दिवस के मौके पर सीएम रघुवर दास ने की थी.

लेकिन एनएसओ के आंकड़े बताते हैं कि झारखंड खुले में शौच से मुक्त नहीं है. क्योंकि राज्य के आधे से कुछ कम यानी 42 फीसदी परिवारों के पास शौचालय की सुविधा नहीं है. ऐसे में वो अब भी खुले में शौच जाने को विवश हैं.

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देश भर में 10 करोड़ टॉयलेट निर्माण का दावा

2 अक्टूबर 2014 को स्वच्छ भारत मिशन की शुरूआत हुई थी. स्वच्छ भारत मिशन(ग्रामीण) के आंकड़े के अनुसार देश में अभियान लॉन्च होने से अबतक 10 करोड़ टॉयलेट का निर्माण हुआ. और सरकार का दावा है कि हर ग्रामीण क्षेत्र में हर किसी के पास शौचालय की सुविधा है.

लेकिन एनएसओ के सर्वेक्षण से मिले आंकड़े की मानें तो केवल 63% घरों में एक शौचालय है. सर्वे ये भी कहता है कि ग्रामीण इलाकों में केवल 17 फीसदी लाभुकों को शौचालय निर्माण का लाभ मिला है.

बिजनेस स्टैंडर्ड की खबर के अनुसार, एनएसओ के आंकड़े और सरकार के दावे में आये अंतर के कारण ही इस रिपोर्ट को करीब छह महीने बाद प्रकाशित किया गया. एक सरकारी सर्वे ने ओडीएफ घोषित झारखंड की वास्तविक हकीकत सामने ला दी है.

इस सर्वे ने झारखंड सरकार की कलई खोल कर रख दी है. जिस राज्य के तकरीबन आधे (कुछ कम) घरों में शौचालय की सुविधा नहीं है, उस झारखंड को सरकार ने ओडीएफ घोषित कर दिया.

हालांकि, खबर है कि अब एनएसओ सरकार के दावे पर हामी भर रही है कि देश के 95 फीसद ग्रामीण इलाके खुले में शौच से मुक्त हैं. और इसके लिए एसबीएम के डाटाबेस को आधार बनाया जा रहा है. हालांकि, इस डाटाबेस की विश्वसनीयता पर पहले ही सवाल उठ चुके हैं.

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