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बैंकों का एनपीए 7.1 लाख करोड़ से बढ़कर 8.5 लाख करोड़, 21 सार्वजनिक बैंक घाटे में

देश में सार्वजनिक बैंकों की हालत पतली होती जा रही है

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 NewDelhi : देश में सार्वजनिक बैंकों की हालत पतली होती जा रही है. जानकारी के अनुसार बैंकों का एनपीए वर्तमान में  7.1 लाख करोड़ से बढ़कर 8.5 लाख करोड़ हो गया है. साल भर में लगभग 19 प्रतिशत का इजाफा हुआ है. जबकि अधिकतम 51,500 करोड़ के एनपीए का ही प्रावधान है. निर्धारित अनुपात से कहीं ज्यादा एनपीए( नॉन परफार्मिंग एसेट) बढ़ने से बैंकों को रिकॉर्ड घाटा हो रहा है. जैसी कि खबर आयी है, 21 सार्वजनिक बैंक जबर्दस्त घाटे में है.

पिछले साल 307 करोड़ का घाटा बैंकों केा हुआ था, अब यह आंकड़ा 16, 600 करोड़ हो गया है. एक साल में पचास गुना नुकसान बैंकों  के माथे पर पड़ा है. एनपीए ने केंद्र सरकार में बैंकों की कमर तोड़ कर रख दी है. जानकारों के अनुसार बैंकिंग जगत के सामने नयी चुनौतियां और समस्याएं खड़ी हो गयी हैं. इससे आर्थिक गतिविधियों के भी प्रभावित होने की आशंका बलवती हो गयी है.

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बैंकों ने अपने प्रदर्शन में अपेक्षित सुधार नहीं किया

सूत्रों के अनुसार रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने एनसीएलटी खातों की समस्या छह से नौ महीने में हल करने की अवधि निर्धारित की है. बैंकिंग विश्लेषक सिद्धार्थ पुरोहित कहते हैं कि बैंकों ने अपने प्रदर्शन में अपेक्षित सुधार नहीं किया है. इस संबंध में एसबीआई के चेयरमैन रजनीश कुमार ने कहा कि सितंबर में हम निर्धारित एनपीए के तुलना में आनुपातिक सुधार का इरादा रखते हैं. ताकि दिसंबर तक स्थिति सुधर जाये. इस घाटे ने बैंकिंग जगत के सामने नई चुनौतियां और समस्याएं पेश की हैं. इससे आर्थिक गतिविधियों के भी प्रभावित होने की आशंका है.

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