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Corona Impact : तरबूज से अबकी किसानों को नहीं मिल रही मिठास, उठी मुआवजे की मांग

केवल 3 जिलों में ही खेतों में पड़े हैं 1000 टन से अधिक तरबूज

Ranchi. राज्य में तरबूज उत्पादन से जुड़े किसान आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहे हैं. वर्तमान में केवल खूंटी, गुमला और बोकारो जिलों में ही 1000 टन से अधिक तरबूज पड़े हैं. पर कोरोना महामारी और राज्य में जारी कड़े लॉकडाउन के कारण उनके सामने विकट स्थिति खड़ी हो चुकी है. वे अपनी इस फसल को बेच नहीं पा रहे हैं. ऐसे में झारखंड जनाधिकार महासभा ने राज्य और केंद्र सरकार से सामने आने की अपील की है. किसानों के खेत में तरबूज बर्बाद होने से उन्हें आर्थिक हानि हो रही है. ऐसे में उन्हें आर्थिक मुआवजा दिये जाने की मांग की जा रही है.

आर्थिक सुरक्षा तय करे सरकार

जनाधिकार महासभा के मुताबिक कोविड-19 महामारी किसानों के लिए बहुत भारी पड़ी है. केंद्र महामारी में स्वास्थ्य समस्याओं के मसले पर केंद्र, राज्य सरकार को चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. महामारी के कारण आजीविकाओं पर हानि हुई है. इसे कम करने के लिये अब तक केंद्र सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं लिया है. झारखंड सरकार को भी आर्थिक असुरक्षा पर ध्यान देने की ज़रूरत है.

झारखंड में हजारों टन तरबूज़ की फसल खेतों में बेकार पड़ी है. तालाबंदी के कारण किसान उनको बेच नहीं पा रहे हैं. व्यापारी भी फसल खरीदने गाँवों तक जाने में परेशान हैं. अगर वे जा भी रहे हैं तो फसल के लिए बहुत ही कम दाम दे रहे हैं.

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कई अन्य फसलों की भी यही स्थिति है. किसानों ने तरबूज़ की फसल उगाने के लिए बैंकों व स्वयं सहायता समूहों से काफ़ी क़र्ज़ लिया है. अब उनको डर है कि वे इस क़र्ज़ को चुका नहीं पाएंगे. ऐसे में राज्य सरकार आगे आये. सरकार तरबूज़ व अन्य फसलों की खरीद उचित दाम पर करे. यह सुनिश्चित करें कि लॉकडाउन में फसलों की खरीद व यातायात में कोई बाधा न हो. किसानों द्वारा स्थानीय साहूकारों, स्वयं सहायता समूहों व बैंकों से लिए गए क़र्ज़ को सरकार माफ़ करे.

कम हुई कमाई

भोजन के अधिकार से जुड़े जवाहर मेहता कहते हैं कि सचमुच किसानों के साथ बड़ी समस्या है. कोरोना के इस माहामारी में किसानों की सब्जियां नहीं बिक रही हैं. बाजार में लाने के बाद भी उसे बहुत सस्ते में बेचना पड़ रहा है. भिंडी, लौकी 5-10 रुपये किलो, साग,खीरा, टमाटर 10 रुपए किलो तक बेचना पड़ रहा है. जबकि घर से बाजार

तक ऑटो से आने-जाने में 100 रुपया से अधिक खर्च हो जा रहा है. इस गर्मी में सब्जी बड़ी मेहनत से उगायी. महंगे डीजल लेकर खेती की. पर उनकी तो कमर ही टूट गई है. सभी किसानों से धान की खरीदारी भी सरकार नहीं कर पाई थी औऱ उसका भुगतान भी नहीं हुआ है. यह बड़ी चूक है.

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