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गोमियाः अब लेवी नहीं बल्कि प्रशासनिक एनओसी की वजह से लटक रही हैं योजनाएं

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Pankaj Pandey

Gomia: बात 2000 से लेकर 2010 तक की है. इस वक्त गोमिया प्रखंड की पहचान धुर नक्सल क्षेत्र के रूप में हुआ करती थी. कोई भी सरकारी योजना सुदूरवर्ती गोमिया के इलाके में जाते-जाते दम तोड़ देती थी. वजह थे वहां मौजूद नक्सली. सैकड़ों योजनाओं को उस दरम्यां जमीनदोज होते देखा गया है. गोमिया प्रखंड की  विभिन्न पंचायतों में विशेषकर अति उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में विकास योजनाओं को लेवी को लेकर नक्सली कार्य बाधित करते थे. वक्त बदला. लेकिन गोमिया के सुदूरवर्ती इलाकों के हालात वैसे ही हैं. लेकिन इस बार बस वजह नक्सली नहीं हैं, बल्कि खुद प्रशासन है. इन इलाकों में होने वाले ज्यादातर काम एनओसी की वजह से लटका हुआ है.

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एनओसी की वजह से लटकी हैं योजनाएं

वन पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन विभाग विकास की रफ्तार को एनओसी के बहाने थामे हुए है. एनओसी की वजह से करीब 75 करोड रुपये की योजनाएं, जिसमें अधिकांश कालीकरण सड़कें, पीसीसी पथ, जल मीनार आदि है रुके हुए हैं. वन विभाग द्वारा उक्त विकास योजनाओं को रोके जाने के पीछे जिला प्रशासन और वन विभाग की आपसी समन्वय की कमी बताई जा रही है. गोमिया प्रखंड वन विभाग दो भागों में विभाजित है प्रखंड में क्रमशः तीन वन प्रक्षेत्र हैं गोमिया, तेनुघाट और महुआटांड़. इसमें से तेनुघाट और महुआटांड़ क्षेत्र को वन प्रमंडल बोकारो में रखा गया है जबकि गोमिया वन प्रक्षेत्र को हजारीबाग वन पूर्वी प्रमंडल में रखा गया है. यही कारण है कि सभी विकास से संबंधित योजनाएं हजारीबाग वन पूर्वी प्रमंडल में है. परिणाम स्वरूप बोकारो जिला प्रशासन वहां से एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) दिलाने में खुद को असहाय महसूस करता है.

ये है योजनाओं का हाल

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गोमिया प्रखंड के झुमरा पहाड़ गांव से तीसकोपी गांव तक लगभग 12 किलोमीटर सड़क जिसकी कुल प्राक्कलित राशि 9 करोड़ रुपये हैं. पिछले एक वर्ष से विभाग से एक एनओसी एनओसी ना मिलने के कारण निर्माण कार्य बंद है. गुरुडीह से भित्तिया गांव लगभग सात किलोमीटर की सड़क, जिसकी लागत राशि पांच करोड रुपये है, कर्री से कुर्कनालो गांव तक सात किलोमीटर सड़क, जिसकी लागत राशि पांच करोड रुपए है, कढमा से दनरा तक सात किलोमीटर सड़क जिसकी लागत राशि पांच करोड रुपए है, वही चतरोचट्टी से झुमरा तक लगभग 16 किलोमीटर सड़क, जिसकी लागत राशि 21 करोड रुपए है, झुमरा से बलथरवा तक सात किलोमीटर लंबी सड़क जिसकी लागत राशि सात करोड रुपये है. इसी तरह से चतरोचट्टी ग्राम में पेयजल के लिए जल मीनार, पाइप लाइन बिछाने की योजना की राशि 18 करोड 75 लाख रुपये की है. वन विभाग से एनओसी नहीं मिलने के कारण निर्माण कार्य रुका हुआ है. चतरोचट्टी से ग्राम मंगरो तक 2200 मीटर की सड़क भी वन विभाग के कारण बंद है. चतरोचट्टी पंचायत की मुखिया कौलेश्वरी देवी, समाजसेवी महादेव महतो, आजसू के कोलेश्वर रविदास, सुंदर रविदास ने बोकारो उपायुक्त से शीघ्र एवं विकास योजनाओं को विभाग से एनओसी दिलाकर रुके हुए कार्यों को शुरू करने की मांग की है.

क्या कहा बोकारो डीसी ने

मामले पर बोकारो डीसी मृत्युंजय कुमार बर्णवाल ने कहा कि अनुश्रवण समिति की बैठक में यह बातें सामने आयी हैं. ऐसी सभी योजनाओं की लिस्ट बन रही है. लिस्ट तैयार कर हजारीबाग वन प्रमंडल से बात की जायेगी. एनओसी देने में क्या परेशानी हो रही है, यह पूछा जायेगा. दूसरे योजनाओं में वन प्रमंडल के एनओसी की वजह से परेशानी ना हो ऐसा तरीका निकाला जायेगा.

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