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अब माननीयों (MLA) की नहीं चलेगी धौंस, सरकारी अफसरों और कर्मियों को नहीं धमका सकेंगे

Ranchi: अब माननीय (MLA) सरकारी सेवकों को अपनी धौंस नहीं दिखा सकेंगे. इसके लिये परिवाद (शिकायत) नियामावली में संशोधन किया जायेगा. इस नियमावली के तहत परिवाद के मामलों में सरकारी सेवकों को विशेष सुरक्षा की बात देने की बात कही गई है. अगर MLA किसी भी मामले की शिकायत किसी भी सरकारी विभाग में मौखिक रुप से करेंगे तो उस पर कार्रवाई नहीं की जायेगी.

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अब MLA को क्या करना होगा

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अब MLA को किसी भी शिकायत के लिये संबंधित विभाग को लिखित विवरण देना होगा. सरकारी सेवक को पहले चिट्ठी देनी होगी. इसके बाद सरकारी सेवक मामले को कंफर्म करेंगे. इसके बाद ही आगे की कार्रवाई की जायेगी. परिवाद की नई नियमावली में आमजन के लिये भी नियम बनाये जायेंगे. इसके तहत आमलोगों के शिकायत के लिये शपथ पत्र देने का प्रावधान किया जायेगा. बिना शपथ पत्र के किसी भी केस या वाद पर कार्रवाई नहीं की जायेगी.

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कैसे बदलेगा परिवाद का नियम

1980 के पहले नामी छदमनामी परिवाद (शिकायत) पर किसी भी तरह की कार्रवाई नहीं की जाती थी. इससे राज्य सरकार को काफी परेशानी होती थी. 1980 में एकीकृत बिहार के समय परिवाद नियमावली को लागू किया गया. झारखंड गठन के बाद भी यह नियमावली झारखंड में लागू हुई. वर्ष 2005 में बिहार सरकार ने एक सर्कुलर निकाला था. इसमें सरकारी सेवकों को परिवारवाद के खिलाफ विशेष सुरक्षा देने की बात कही गई थी. अब झारखंड में इसके संशोधन में दो बिंदुओं को जोड़ा जा रहा है. जिसमें शिकायत से संबंधित चिट्ठी को पहले कंफर्म किया जायेगा. आमजन की शिकायत के मामले में शपथ पत्र देंगे. राज्य सरकार ने इस मामले में परिपत्र भी निर्गत किया है. कार्मिक इसकी समीक्षा भी कर रहा है.

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