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अब गोबरधन स्कीम पर पेयजल विभाग ने शुरू की पहल, अगले 4 महीने में हर जिले में गोबर गैस प्लांट लगने की आस

Principal Corrospendent

Ranchi: पेयजल एवं स्वच्छता विभाग, झारखंड ने अब गोबरधन स्कीम पर अमल करने की दिशा में कदम आगे बढ़ाया है. हर जिले को इसके लिए पिछले दिनों टेंडर कैलेंडर भेजा था. इसके बाद अलग अलग जिलों में इसे लेकर EOI (Draft Expression Of Interest) जारी किया जाने लगा है. गढ़वा, चतरा, कोडरमा, साहेबगंज जैसे चुनिंदा जिलों ने इसके लिए विज्ञापन जारी कर दिया है. इस आधार पर गोबर गैस प्लांट तैयार करने को टेक्निकल सपोर्ट एजेंसी की मदद ली जानी है. दिसंबर के पहले सप्ताह तक सभी जिलों में टेंडर प्रक्रिया संपन्न कराए जाने का लक्ष्य है. इसके बाद उम्मीद की जा रही है कि राज्य के सभी जिलों में वित्तीय वर्ष 2022-23 के अंत तक यानि मार्च 2023 तक गोबर गैस प्लांट तैयार कर लिए जाएंगे.

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गोबरधन स्कीम से गांव में स्वच्छता

केंद्र सरकार (जल शक्ति मंत्रालय) के स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण, फेज-2) के तहत गांवों में गोबरधन स्कीम को अमल में लाए जाने का प्रयास शुरू हुआ है. पंचायतों में गोबर जहां तहां बिखरा पड़ा रहता है. इसका किसी प्रकार से व्यवहार नहीं किया जाता है. इससे गोबर भी बेकार हो जाता है तथा सड़क, गांव की गलियां भी गंदी रहती हैं. इसे देखते राज्य के सभी ग्रामीण क्षेत्रों में ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन की दिशा में काम हो रहा है. इसी क्रम में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के अंतर्गत गोबरधन स्कीम के तहत गोबर गैस प्लांट तैयार किया जाना है. जानकारी के मुताबिक इस स्कीम के लिए सभी जिलों को करीब 50 लाख रुपये का आवंटन भी किया जा चुका है. वित्तीय वर्ष 2024 तक इसे हर हाल में खर्च किये जाने का निर्देश पीएमयू, झारखंड (प्रोग्राम मैनेजमेंट यूनिट, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग, झारखंड) की ओर से जिलों को जारी किया गया है.

गांवों में दिखेंगे तैयार गोबर गैस प्लांट

पेयजल विभाग के मुताबिक गोबरधन योजना के प्रावधान के मुताबिक गोबर गैस प्लांट के लिए मुख्यतः 4 तरह के मॉडल तैयार किये जाने हैं. व्यक्तिगत मॉडल, कलस्टर मॉडल, सामुदायिक मॉडल और व्यवसायिक मॉडल. जो राशि (50 लाख) जिलों को आवंटित की गयी है, उससे गोबर गैस प्लांट का कलस्टर एवं सामुदायिक मॉडल तैयार किये जाने का निर्देश जिलों को मिला है. व्यक्तिगत एवं व्यवसायिक मॉडल के लिए आवंटित राशि को खर्च नहीं करने को कहा गया है. गोबर गैस प्लांट तैयार करने को टेक्निकल सपोर्ट एजेंसी की आवश्यकता होगी. इसके लिए निदेशालय द्वारा EOI (Draft Expression Of Interest) तैयार कर सभी जिला एवं स्वच्छता प्रमंडल को साझा किया गया था. इसे एक सैंपल कॉपी बताया गया है जिसमें जिलों के द्वारा आवश्यकता के अनुसार बदलाव करने को कहा गया था. कहा गया कि जिलों को EOI के माध्यम से टेक्निकल सपोर्ट एजेंसी का चयन जिला जल स्वच्छता समिति (DWSC) की बैठक में निर्णय लेकर करें. चयनित टेक्निकल सपोर्ट एजेंसी के माध्यम से गोबर गैस प्लांट यथाशीघ्र तैयार किया जाये.

क्या कहते हैं विभागीय इंजीनियर

चतरा के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर (पेयजल एवं स्वच्छता) अविक अंबाला के मुताबिक EOI जारी हो चुका है. योग्य एजेंसी के चयन के बाद उसे कार्य आवंटन होगा. चयनित एजेंसी गोबर गैस प्लांट स्थापित करने में मदद के अलावे मिथेन गैस कनेक्शन का लाभ नजदीकी घरों तक पाइप लाइन के जरिये देगी. सालभर तक वह इन सारे कार्यों का मॉनिटरिंग करेगी. फिर कम्यूनिटी या गोबर उत्पादक किसान या योग्य व्यक्ति को इसके संचालन का मौका देगी.

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