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अब नेशनल टेस्टिंग एजेंसी के जिम्मे होगी असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति

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Ranchi: अब देश भर के केंद्रीय विश्वविद्यालय, राज्य विश्वविद्यालय तथा उससे मान्यता प्राप्त कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति संबंधित राज्य के लोक सेवा आयोग की जगह नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) के जिम्मे होगी.

इस बाबत मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से पत्र जारी किया गया है. इस पत्र में असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति संबंधी विभिन्न बिंदुओं पर चर्चा की गयी है.

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पत्र में कहा गया है कि देश भर के विवि व कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति प्रक्रिया से साक्षात्कार को हटाते हुए एक राष्ट्रीयकृत परीक्षा ली जाये.

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तत्काल प्रभाव से लागू की जाये नयी प्रक्रिया

इस परीक्षा में प्राप्त रैंक के आधार पर असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति की जाये. इस नयी प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से लागू किया जाये.

पत्र में आठ बिंदुओं के माध्यम से नियुक्ति प्रक्रिया को पूरा करने को कहा गया है. इसमें बताया गया है कि असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति परीक्षा नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए के माध्यम से ली जाये.

नियुक्ति के लिए परीक्षा होनी चाहिए जो प्रत्येक वर्ष आयोजित होगी. इस परीक्षा में 100 या 200 अंक का संबंधित विषय का प्रश्न हो. प्रश्न मल्टी ऑप्शनल होने चाहिए. इसमें निगेटिव मार्किंग का भी प्रावधान हो.

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देश के प्रत्येक विवि व कॉलेजों में एनटीए की रैंक के अनुसार नियुक्ति पत्र जारी किया जाना चाहिए.

एनटीए के द्वारा नियुक्ति पत्र निर्गत होने पर संबंधित विवि के कुलपति व कॉलेज प्रबंधक को 2 से 3 दिन में उम्मीदवार को नियुक्त करना होगा. ऐसा नहीं करने पर उम्मीदवार की नियुक्ति स्वत: मान ली जायेगी. जिसका पूरा दायित्व संबंधित विवि के कुलपति और कॉलेज प्रबंधक की होगी.

नियुक्ति की इस प्रक्रिया से समय की बचत, भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद, सोर्स-पैरवी सब स्वत: समाप्त हो जायेगी.

अक्सर ऐसा देखा गया है कि प्रदेश के आयोग की ओर से असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति कराने पर विसंगतियां जैसे प्रश्न पत्र में गलत प्रश्न होना, पेपर लीक होना, पुन: जांच होना आदि में 5 साल तक देर होती है.

आयोग की ओर से लगातार नियुक्तियां निकाली भी नहीं जाती हैं, ऐसे में उम्मीदवार की उम्र भी निकल जाती है.

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