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MNREGA में पकड़ाया ‘रॉयल्टी घोटाला’, सरकार को लगाया करोड़ों का चूना

Manoj Kumar Pintu

Giridih: मनरेगा योजना में भ्रष्टाचार कोई नयी बात नहीं रह गयी है. अधिकारियों और लाभुकों की मिलीभगत के कारण अक्सर यह सुर्खियों में रही है. अब गिरिडीह में एक नये तरह की गड़बड़ी सामने आयी है.

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इस बार मनरेगा योजना के माध्यम से राज्य सरकार को मिलने वाली करोड़ों रुपयों की रॉयल्टी को ही हड़पने का खुलासा हुआ है. अधिकारियों, लाभुकों और सामानों के आपूर्तिकर्ता की मिलीभगत से सरकार को चूना लगाया गया है. एक तरह से जिला खनन कार्यालय को मिलने वाली रॉयल्टी की भ्रष्टाचारियों ने डकैती कर ली है.

इसका खुलासा खुद जिला खनन पदाधिकारी सतीश नायक ने किया है. इस खुलासे में सदर प्रखंड के पपरवाटांड़ के सामाजिक कार्यकर्ता शिवनाथ साव ने महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है.

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ऐसा दिया गया अंजाम

तीन सालों के भीतर मनरेगा योजना के लाभुकों को भुगतान होता गया. लाभुकों ने समानों के आपूर्तिकर्ताओं को भी भुगतान कर दिया. लेकिन एक भी आपूर्तिकर्ता ने खनन कार्यालय को ईट-बालू, चिप्स समेत लघु खनिज के लिए रॉयल्टी का भुगतान नहीं किया. जिला खनन कार्यालय मानकर चल रहा है कि रॉयल्टी चोरी का यह मामला करोड़ों का हो सकता है.

यह मामला साल 2017 से लेकर 2019 तक का बताया जा रहा है. लेकिन रॉयल्टी चोरी का यह खेल अब भी जारी है. जिला खनन पदाधिकारी सतीश नायक को जब पूरे मामले का पता चला तो खनन पदाधिकारी के सुझाव पर डीसी ने जिले के सभी बीडीओ को आपूर्तिकर्ताओं को पत्राचार कर रॉयल्टी जमा कराने की बात कही.

बीडीओ को पत्राचार कर डीसी ने यह भी कहा कि जिन प्रखंडों में वेंडर नियम के अनुसार रॉयल्टी जमा नहीं कर रहे है उन्हें तुरंत नोटिस करें.

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दरअसल, मनरेगा के तहत ली जाने वाले योजना में इस्तेमाल होने वाले समान ईट, चिप्स, बालू समेत अन्य लघु खनिज की खरीद लाभुक आपूर्तिकर्ताओं से करते हैं.तो आपूर्तिकर्ता द्वारा यानि वैंडर को भी इन समानों की रॉयल्टी जिला खनन कार्यालय में भुगतान करने का प्रावधान है.

खनन विभाग जेएमएमसी एक्ट की धारा 55 के तहत आपूर्तिकर्ताओं से भुगतान लेता है. लाभुकों ने आपूर्तिकर्ताओं को योजना की तय राशि में कटौती कर रॉयल्टी तक का भुगतान कर दिया.

लेकिन एक भी वेंडर द्वारा खनन कार्यालय को रॉयल्टी का भुगतान नहीं किया गया. वैसे तीन सालों के भीतर कई योजना ली गयी. लेकिन भुगतान किसी का नहीं हुआ तो दूसरी तरफ खनन कार्यालय का कहना है कि रॉयल्टी के राशि की चोरी करोड़ो तक हो सकती है.

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