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सरकार के पास 360 करोड़ बकाया होने पर अब PVUNL के कांट्रैक्टर और सप्लायर ने किया ऊर्जा निगम पर केस

तीन साल से बकाया है कांट्रैक्टर्स और सप्लायर्स के लगभग 360 करोड़ रुपये, एनटीपीसी को पीवीयूएनएल का ज्वाइंट वेंचर बनाये जाने के बाद हुई ऐसी स्थिति

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Chhaya

Ranchi: पिछले पांच सालों में राज्य में कई बदलाव हुए. इन्हीं बदलावों में से एक राज्य सरकार का पतरातू विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (पीवीयूएनएल) को एनटीपीसी का ज्वाइंट वेंचर बनाना है. यह घोषणा सरकार की ओर से एक अप्रैल 2016 को की गयी.

एनटीपीसी को पीवीयूएनएल का ज्वांइट वेंचर तो बना दिया, लेकिन इसके बकाये लेन देन और कार्यों के लिये सरकार ने कोई विकल्प नहीं बनाया. पीवीयूएनएल को एनटीपीसी का ज्वांइट वेंचर बनाये जाने से लगभग 360 करोड़ का बकाया सरकार के पास है.

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ये बकाया राशि कांट्रैक्टर्स और सप्लायर्स की है. जिनकी संख्या लगभग दो सौ है. अप्रैल 2016 के पहले पीवीयूएनएल झारखंड ऊर्जा निगम लिमिटेड (जेयूएनएल) के अंतर्गत कार्यरत था. फिलहाल इस मामले को लेकर कई कांट्रैक्टर और सप्लायर ने जूयूएनएल पर केस कर दिया है.

शुरूआत में इन कांट्रैक्टर और सप्लायर को सरकार द्वारा एनटीपीसी और जेयूएनएल से भुगतान करने की बात कहीं गयी. लेकिन विभाग और सरकार की ओर से इस पर कोई पहल नहीं करने के कारण अब मामला कोर्ट तक पहुंच गया. इसमें कुछ केस रांची जिला सत्र न्यायालय, झारखंड हाईकोर्ट इसके साथ ही कलकत्ता, हरियाणा के हाईकोर्ट में भी किये गये हैं.

एग्रीमेंट के तहत एनटीपीसी देती सरकार को फंड

सरकार के साथ एनटीपीसी के हुए एग्रीमेंट के अनुसार, एनटीपीसी सरकार को इन बकायेदारों के भुगतान की राशि देती. लेकिन पिछले तीन साल बीत जाने के बाद भी एनटीपीसी ने सरकार को पैसा नहीं दिया और न ही सरकार ने एनटीपीसी से जवाब तलब किया.

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एग्रीमेंट अनुसार एनटीपीसी से सरकार को पैसे मिलने के बाद, सरकार जेयूएनएल को पैसे देती और फिर जेयूएनएल की ओर से इन बकायेदारों को भुगतान किया जाता. क्योंकि अप्रैल 2016 के पहले पीवीयूएनएल, जेयूएनएल के अंतर्गत कार्यरत था.

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ऐसे में कांट्रैक्टर्स और सप्लायर्स ने जेयूएनएल पर केस किया. हालांकि जेयूएनएल ने इस मामले में कई बार एनटीपीसी से जानकारी मांगी. जिस पर एनटीपीसी का कहना है कि पीवीयूएनएल से जितने संसाधनों की जरूरत थी, एनटीपीसी ने उसका इस्तेमाल किया. बाकी की जमीन समेत अन्य संसाधन का इस्तेमाल एनटीपीसी नहीं कर रही. जिससे बकायेदारों का भुगतान लंबित है.

हरियाणा और चंडीगढ़ जाकर वकील कर रहे केस में जिरह

केस करने वालों में कुछ ऐसे भी कांट्रैक्टर और सप्लायर हैं जो हरियाणा और चंडीगढ़ के थे. जानकारी मिली कि कुछ लोगों ने रांची जिला न्यायालय और कलकत्ता, हरियाणा और चंडीगढ़ के न्यायालयों में भी केस कर दिया है. फिलहाल मामला चल रहा है.

लेकिन इसमें परेशानी वकीलों की बढ़ गयी है. क्योंकि उन्हें जिरह करने कलकत्ता, हरियाणा और चंडीगढ़ जाना पड़ता है. बता दें कि पीवीयूएनएल को एनटीपीसी का ज्वांइट वेंचर बनाये जाने के बाद उत्पादन का 24 प्रतिशत सरकार को देती है. बाकी का 76 प्रतिशत बिजली उत्पादन में एनटीपीसी का अधिकार है.

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SP Jamshedpur 24/01/2020-30/01/2020

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