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अब मुखियाजी नहीं, Executive Committee chairperson कहिये

झारखंड की 4000 पंचायतों में मोर्चा संभालने में जुटी समितियां

Ranchi : राज्य में पंचायती राज व्यवस्था भंग होने लगी है. त्रिस्तरीय व्यवस्था दिन प्रतिदिन खत्म हो रही है. बावजूद इसके गांव, पंचायत औऱ शहरों के विकास कार्यक्रमों पर असर ना पड़े, इसके लिये पहल शुरू हो चुकी है.

अब पंचायतों में मुखिया नहीं, कार्यकारी समिति गांव के विकास के लिये योजनाएं बनायेगी. उस पर अमल करेगी. समिति के प्रमुख के ऊपर इसकी जिम्मेवारी होगी. राज्य की लगभग 4000 पंचायतों में जनवरी के पहले सप्ताह से ही समितियां मोर्चा संभालने में जुट गयी है.

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मुखिया अब बने कार्यकारी समिति के प्रमुख

जिन-जिन पंचायतों, पंचायत समितियों और जिला परिषदों का कार्यकाल खत्म हो रहा है, वहां कार्यकारी समिति का गठन किया जाने लगा है. जनवरी के प्रथम सप्ताह से लेकर अब तक कई जगहों पर ऐसी पहल हो चुकी है.

पंचायतों के लिये संबंधित बीडीओ कार्यालय से पंचायत सचिव को समिति गठित किये जाने के संबंध में आदेश जारी किये जा रहे हैं. इसमें कहा गया है कि सामान्य क्षेत्र में पांच साल की अवधि पूरी होने के बाद त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था स्वतः विघटित हो जानी है.

इस स्थिति में पंचायत के संचालन के लिये कार्यकारी समिति गठित करेंगे. इसमें विघटित पंचायत के मुखिया अध्यक्ष के तौर पर होंगे, वार्ड सदस्य, प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारी, प्रखंड समन्वयक, अंचल निरीक्षक और बीडीओ द्वारा नामित ग्राम पंचायत का एक निवासी जो केंद्र या राज्य सरकार में ग्रेड 3 के समकक्ष पद से रिटायर हुआ हो, वे मेंबर के तौर पर रहेंगे.

इसी आधार पर समिति का गठन होने लगा है. कार्यकारी समिति के गठन औऱ इसके बाद होने वाली बैठकों के लिये नया रजिस्टर तैयार करने और अन्य औपचारिकताओं को पूरा किया जा रहा है.

पंचायत समिति और जिला परिषद के लिये भी समिति

पंचायती राज विभाग द्वारा 7 जनवरी, 2021 को जारी अधिसूचना के अनुसार पंचायत समिति के कार्यों के संचालन के लिये भी कार्यकारी समिति जवाबदेह होगी. विघटित पंचायत समिति के प्रमुख इस समिति के अध्यक्ष होंगे. जिला पंचायत राज पदाधिकारी, संबंधित क्षेत्र के अनुमंडल पदाधिकारी और सीओ इसमें मेंबर होंगे.

समिति के प्रमुख वे सभी काम निष्पादित करेंगे जो एक निर्वाचित प्रमुख द्वारा किया जा सकता है. इसी तरह जिला परिषद के लिये भी समिति होगी.

इसमें परिषद के अध्यक्ष ही समिति के हेड होंगे. कार्यपालक पदाधिकारी, डीआरडीए निदेशक, आईटीडीए के परियोजना निदेशक इसमें मेंबर के तौर पर शामिल किये जायेंगे.

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कहां है चुनौतियां

कमिटी का गठन पंचायतों से लेकर जिला परिषदों तक होने लगा है. अब एक बड़ी उलझन यह हो रही कि पूर्व में मुखिया के जो डिजिटल सिग्नेचर थे, वे मान्य होंगे या नहीं.

या फिर इसके लिये अब कार्यकारी समिति के प्रमुख के तौर पर नयी व्यवस्था तैयार करनी होगी. मनरेगा या अन्य योजनाओं में उसके जो हस्ताक्षर होते थे, वह कितना मान्य होगा. निश्चित तौर मुहर भी नया तैयार करना होगा.

पंचायतों में अब कार्यकारिणी समिति की बजाये कार्यकारी समिति की बैठक होगी. यानि गांव की सरकार अब सरकार के साथ मिलकर ग्राम विकास के कार्यक्रम पर लगेगी. पंचायतों को आश्वस्त किया गया है कि समिति गठित होते ही वित्तीय प्रबंधन और अन्य विषयों पर स्पष्ट गाइडलाईन भी जारी कर दिया जायेगा.

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