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अब झामुमो विधायकों ने उठायी आदिवासियों के लिए धर्म कोड की मांग, CM से कहा- बिल पास कर केंद्र को प्रस्ताव भेजे सरकार

  • झामुमो विधायकों के प्रतिनिधिमंडल ने कहा- धर्म कोड नहीं होने से आदिवासी समाज की धार्मिक-सामाजिक गतिविधियों पर पड़ रहा असर

Ranchi : आदिवासी/सरना धर्म कोड बिल पारित कर केंद्र को एक प्रस्ताव भेजने के लिए अब झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के विधायक एकजुट हो गये हैं. सत्तारूढ़ दल के विधायक प्रतिनिधिमंडल ने शनिवार को इस संदर्भ में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को ज्ञापन सौंपा है.

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ज्ञापन सौंपने के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से कहा कि झारखंड आदिवासी बहुल राज्य है. यहां की एक बड़ी आबादी सरना धर्म मानती है, लेकिन इसे आज तक अलग धर्म कोड का दर्जा नहीं मिल सका है. इसका असर आदिवासी समाज की धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों पर पड़ रहा है. विधायकों ने कहा कि आदिवासी समाज के लोग सालों से सरना धर्म कोड की मांग को लेकर आंदोलन करते आ रहे हैं. इस सिलसिले में विभिन्न आदिवासी संगठनों द्वारा सीएम को ज्ञापन भी सौंपा गया है. ऐसे में सरना धर्म कोड को लागू करने की दिशा में सरकार ठोस पहल करे.

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2021 की जनगणना में हो सरना धर्म कोड दर्ज करने का प्रावधान

जेएमएम विधायकों के प्रतिनिधिमंडल ने हेमंत सोरेन को बताया कि 1871 से लेकर 1951 तक की जनगणना में आदिवासियों के लिए अलग धर्म कोड था. लेकिन, 1961-62 के जनगणना प्रपत्र से आदिवासी धर्म कोड को हटा दिया गया. इतना ही नहीं 2011 की जनगणना में देश के 21 राज्यों में रहनेवाले लगभग 50 लाख आदिवासियों ने सरना धर्म कोड लिखा था. ऐसे में 2021 की जनगणना में भी सरना धर्म कोड दर्ज करने का प्रावधान किया जाये.

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पांच वर्तमान विधायकों सहित दो पूर्व विधायक थे शामिल

मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपनेवाले प्रतिनिधिमंडल में जेएमएम के कुल पांच वर्तमान विधायक, दो पूर्व विधायक सहित कई नेता शामिल थे. इसमें चाईबासा विधायक दीपक बिरुवा, तमाड़ विधायक विकास सिंह मुंडा, गुमला विधायक भूषण तिर्की, पोटका विधायक संजीव सरदार, जुगसलाई विधायक मंगल कालिंदी, पूर्व विधायक अमित महतो, पूर्व विधायक जोगेंद्र प्रसाद, रामगढ़ के पार्टी जिलाध्यक्ष विनोद किस्कू और बोकारो के जिलाध्यक्ष हीरालाल हांसदा शामिल थे.

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