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अभी भी अधूरी हैं भू-राजस्‍व कर्मचारियों की मांगें, प्रेस क्‍लब में संघ तय करेगी रणनीति

झारखंड के भू राजस्‍व कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर कई महीनों से आंदोलन कर रहे हैं

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Ranchi: झारखंड के भू राजस्‍व कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर कई महीनों से आंदोलन कर रहे हैं. इस दौरान इन्‍होंने सरकार के समक्ष विरोध प्रदर्शन और हड़ताल भी किया. सरकार के साथ सकारात्‍मक वार्ता भी हुई. बावजूद इसके भू-राजस्‍व कर्मचारियों की मांगें अधूरी हैं. अपनी 9 सूत्री मांगों के लिए झारखंड राज्‍य राजस्व उप-निरीक्षक संघ का रांची में पहला सम्‍मेलन रांची प्रेस क्‍लब में कराने जा रही है.

झारखंड राज्‍य राजस्‍व उप-निरीक्षक संघ के महासचिव कुमार सत्‍यम भारद्वाज ने बताया कि इस आयोजन में अपनी 9 सूत्री मांगों को सरकार से लेने के लिए आंदोलन की रणनीति तय करने की जरूरत है. इसलिये पहला राज्‍यस्‍तरीय सम्‍मेलन आयोजित किया जा रहा है. इसमें राज्यभर के भू राजस्‍व विभाग के कर्मचारी भाग लेंगे और 9 सूत्री मांगों के लिए एक्‍शन प्‍लान तय करेंगे.

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झारखंड राज्‍य राजस्व उप-निरीक्षक संघ की मुख्‍य मांगे :

राजस्‍व उप-निरीक्षकों का ग्रेड पे 2800 रुपये किया जाय

सरकार द्वारा गठित राज्‍य सेवा संवर्ग में राजस्‍व उप-निरीक्षकों को मूल पद माना गया है, लेकिन शैक्षणिक योग्‍यता को आधार बनाकर प्रोन्‍नती बाधित कर दिया गया है, उसे दूर कर लेखा-लिपिक के कैडर के समान बिना शर्त प्रोन्‍नती देने के लिए आश्‍वयक संशोधन किया जाय.

राज्‍य में नई बहाली के पूर्व राजस्‍व उप-निरीक्षकों की योग्‍यता स्‍नातक किया जाय.

अंचल निरीक्षक के शत-प्रतिशत पदों को प्रोन्‍नती से भरा जाय. पदोन्‍नती से वंचित राजस्‍व उपनिरीक्षकों को प्रोन्‍नत पद का वेतनमान और वित्‍तीय लाभ दिया जाए.

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पांच वर्ष सेवावधि पूरा करने वाले राजस्‍व उप निरीक्षकों को किसी भी तरह के विभागीय/राज्‍य स्‍तरीय सीमित प्रतियोगिता परीक्षा में बैठने की अनुमति दी जाए.

सुचारू रूप से कार्य निष्‍पादन के लिए कंप्‍यूटर, नेट की सुविधा, क्षेत्रीय भ्रमण के लिए मोटरसाईकिल और सुरक्षित जगह पर हल्‍का सह आवास की व्‍यवस्‍था सुनिश्चित करायी जाए.

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शहरी अंचलों को छोड़ सामान्‍य तौर पर जो अंचल हैं, उनके मुख्‍यालय से हल्‍का मुख्‍यालय की दूरी 3 से 45 किमी तक है. राजस्‍व उप-निरीक्षकों को प्रतिदिन अंचल कार्यालय में आकर बायोमैट्रिक उपस्थिति दर्ज करान संभव और व्‍यवहारिक नहीं है. इस संबंध में सरकार का एक स्‍पष्‍ट दिशा-निर्देश जारी करें.

चिकित्‍सा भत्‍ता के अलावे पूरे परिवार के लिए स्‍वास्‍थ्‍य बीमा उपलब्‍ध करायी जाए.

रेवेन्यू जजेज प्रोटेक्‍शन एक्‍ट के तहत आने वाली सभी बाधाओं को दूर कर इसे लागू किया जाए.

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