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डर तो लगा, पर हौसला बनाए रखा, अब कैंसर मुक्त हूं: करूणा

महिलाएं डरतीं है स्तन कैंसर से, ऐसे में डॉक्टर और खुद में भरोसा जरूरी

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Ranchi: कैंसर एक ऐसी बीमारी जिसके नाम से लोग डर जाते हैं. महिलाओं में आजकल स्तन कैंसर के मामले अधिक देखे जाते हैं, जिससे कई बार महिलाएं डर जातीं है. ऐसे में कैंसर से लड़कर जंग जीतने वाली महिला का दिल कितना साहसी होता होगा, जो अपने दिमागी उलझन और शारीरिक तकलीफ को झेलते हुए कैंसर मुक्त होती हो. ऐसी ही एक कहानी करूणा राजगढ़िया की है. जिन्हें 31 मार्च 2016 को 48 की उम्र में पता चला की वो स्तन कैंसर से पीड़ित हैं, वो भी उनका कैंसर चैथे स्टेज पर है. दो साल लंबे इलाज के बाद अब करूणा कैंसर मुक्त है. उन्होंने बताया कि जैसे ही जानकारी हुई कि मुझे कैंसर है, लगा कि अब नहीं बच पाउंगी. लगा जैसी पूरी दुनिया ही खत्म हो गयी. लेकिन, परिवार और दोस्तों ने समझाया. खुद में भी लगने लगा कि बिना किसी चीज का सामना किये हार कैसे मान सकती हूं. चौथे स्टेज पर कैंसर होने के बाद भी परिवार के सदस्यों ने उचित इलाज कराने का निर्णय लिया. मैंने भी खुद में सोचा कि अब मैं भी कैंसर का सामना करूंगी.

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सामान्य बीमारी की तरह समझा कैंसर को

करूणा ने कैंसर के अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि शुरू में तो कैंसर की जानकारी होने से लगा कि सब कुछ बदल गया, लेकिन खुद में धैर्य और परिवार के साथ के कारण मैंने हिम्मत किया. सामान्य बीमारी जैसे बीपी, सुगर आदि होती है, मैंने कैंसर को भी इसी तरह समझा. रोज इसकी दवाई समयानुसार लेती और सोचती मैं स्वस्थ्य है. उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थिति में सकारात्मक सोच रखना बेहद जरूरी है.

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डॉक्टर ऐसा हो जो आपको समझें

उन्होंने कहा कि कैंसर के लिए जितना परिवार और दोस्तों का साथ जरूरी है. उतनी ही आवश्यकता एक डॉक्टर की है. डॉक्टर ऐसा जो मरीज की जरूरतों को समझें. डॉक्टर से बातचीत खुल कर करें, अमूमन महिलाएं स्तन कैंसर होने पर कई बातें छि‍पाती हैं. लेकिन, ऐसा करने की जरूरत नहीं है. करूणा ने कहा कि मुझे भी पहले डॉक्टर से काफी हिचक होती थी. लेकिन, समय रहते मुझे समझ आ गया कि कैंसर मैं क्या महसूस करती हूं. ये डॉक्टर को खुल कर बताउं, तभी डॉक्टर मेरी समस्याओं को समझ पायेंगे.

28 कीमोथेरेपी डोज लगे

पहले स्तन कैंसर का इलाज ऑपरेशन यानी मास्टेकटॉमी ही थी. इसके साथ ही कीमोथेरेपी और रेडिएशन थेरेपी भी करवानी पड़ती थी, लेकिन समय के साथ अब तकनीक में काफी बदलाव आया है. करूणा ने बताया कि उन्होंने अपना इलाज रांची के राज हॉस्पि‍टल से करवाया. दो साल के इलाज में उन्हें 28 कीमोथेरेपी डोज लेने पड़े. उन्होंने कहा कि मेरे अनुभव के अनुसार महिलाएं जितना स्तन कैंसर के नाम से नहीं डरती, उतना इसके इलाज से डरती हैं और अपना हिम्मत खो देती हैं. जबकि ऐसा नहीं है.

बाल झड़ने से घबरायें नहीं

कीमोथेरेपी शुरू होते ही अन्य कैंसर पीड़ितों की भांति करूणा के भी बाल झड़ने लगे. उन्होंने बताया कि जब बाल झड़ने लगे तो लगता था कि मैं किसी न मिलूं. दो साल तक 28 कीमोथेरेपी डोज लेने के बाद, जब थेरेपी बंद हुआ तो कुछ दिनों के बाद खुद ही बाल निकलने लगे. उन्होंने कहा कि ऐसे में महिलाओं को घबराना नहीं चाहिये.

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इलाज के रिएक्‍शन से हारी नहीं

उन्होंने कहा कि इलाज के दौरान कई बार लगा कि अब मैं नहीं सह पाउंगी, क्योंकि कीमोथेरेपी और रेडिएशन थेरेपी के कारण शरीर में तीव्र जलन होती थी. फिर जीने की चाह और सकारात्मक सोच ने मुझे इलाज के रिएक्शन से कभी हार मानने नहीं दिया.

क्या करें स्तन कैंसर से पीड़ित महिलाएं

सोशल मीडिया के कैंसर संबधित पोस्ट पर कभी ध्यान न दें, घरेलू नुस्खों से बचें, जिन्हें स्तन कैंसर हुआ हो और जो आपका हौसला बढ़ाएं उनसे बात कीजिये, खुद में हौसला बनायें रखें, किसी भी चीज से डरें नहीं, डॉक्टर से खुल कर बात करें, इलाज में जो दिशा निर्देष दिये गये हो उन्हें मानें.

क्या करें परिवार

कभी भी नकारात्मक बातें न करें, हमेशा खुशी का माहौल मरीज के सामने बनायें रखें, ऐसे व्यक्ति का जिक्र ने करें जिसकी मौत कैंसर से हुई हो, मरीज को सामान्य व्यक्ति की तरह रहने दें. मरीज के सोते जागते ऐसा न दिखायें की परिजनों को उनकी अधिक परवाह है.

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