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चुनाव से पहले कहते थे भुखमरी से हुई मौत, अब हेमंत सरकार कह रही, नहीं हुई किसी की भूख से मौतः विनोद सिंह

  • स्थानीय नीति पर बोले माले विधायक- सरकार की कथनी और करनी में बड़ा अंतर
  • राज्यसभा चुनाव को लेकर विनोद सिंह ने कहा- उम्मीदवार कोई भी हो लेकिन उनका वोट बीजेपी के खिलाफ ही होगा

Ranchi : राज्य में स्थानीय नीति में बदलाव नहीं किये जाने और भुखमरी पर हुई मौतों पर हेमंत सरकार के दिये बयान पर बजट सत्र के 6वें दिन विधायकों ने सदन के बाहर खुल कर विरोध जताया.

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माले विधायक विनोद सिंह ने मीडिया से बातचीत में कहा कि सरकार की कथनी और करनी में पूरी तरह से अंतर है. स्थानीय नीति पर सदन में सरकार कहती है कि इसके बदलाव का कोई औचित्य नहीं है जबकि सदन के बाहर उनकी पार्टी के नेता कहते हैं कि नयी सरकार स्थानीय नीति में बदलाव करेगी.

इसी तरह भुखमरी पर हेमंत सरकार कह रही है कि उनका खाद्य आपूर्ति सिस्टम पूरी तरह सही है. राज्य में किसी की भूख से कोई मौतें नहीं हुई है.

बीजेपी विधायक भानू प्रताप शाही ने भी स्थानीय नीति के मुद्दे को लेकर सरकार को घेरा. उन्होंने कहा विपक्ष में रहते हुए हेमंत सोरेन ने इसी मुद्दे पर कई बार सदन नहीं चलने दिया था. अब जब वे सत्ता में आये हैं, तो राज्य के युवाओं को ठगने का काम कर रहे हैं.

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उम्मीदवार कोई भी हो वोट बीजेपी के खिलाफ ही होगा

विनोद सिंह ने कहा कि जिन मुद्दों पर हेमंत सोरेन ने चुनाव लड़ा था, उन पर जनता ने सहमति जतायी थी. इस मुद्दे पर सरकार को भारी जनादेश भी मिला था. लेकिन अपने किये सभी वादों से सरकार पीछे हट गयी है. भुखमरी की बात करते हुए विनोद सिंह ने कहा कि इस पर हेमंत सरकार लगातार रघुवर सरकार को घेरती रही. लेकिन अब भुखमरी पर वह कह रही है कि राज्य में भूख से किसी की मौत नहीं हुई है. सरकार का खाद्य आपूर्ति सिस्टम पूरी तरह से ठीक है.

राज्यसभा चुनाव में वोट देने के सवाल पर माले विधायक ने कहा कि 2 सीटों के लिए होनेवाले राज्यसभा चुनाव में उम्मीदवार चाहे कोई भी हो, लेकिन उनका वोट बीजेपी के खिलाफ ही होगा.

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स्थानीय नीति में बदलाव की शिबू सोरेन ने कही थी बात

बता दें कि जेएमएम सुप्रीमो शिबू सोरेन ने हेमंत सोरेन के सत्ता में आने के बाद स्थानीयता के मुद्दे पर बड़ा बयान दिया था, जिसके बाद राज्य की राजनीति काफी गरमा गयी थी.

उन्होंने कहा था कि हेमंत सरकार मौजूदा स्थानीय नीति में संशोधन करेगी. पार्टी ने इसका वादा जनता से किया है. राज्य में 1932 के खतियान के आधार पर स्थानीय नीति बनायी जायेगी. मौजूदा नीति में काफी कमियां हैं. लेकिन अब अपने चुनावी घोषणा पत्र में वादा करने और पार्टी सुप्रीमो के बयानों के विपरीत जेएमएम नेतृत्व वाली यूपीए गठबंधन सरकार ने स्थानीय नीति में बदलाव नहीं करने की बात की है.

राज्य सरकार ने इस आशय का जवाब बजट सत्र के दौरान विधानसभा में दिया है. माले विधायक विनोद सिंह के पूछे सवाल के जवाब में सरकार ने कहा है कि स्थानीय नीति में सुधार का कोई औचित्य नहीं है.

तत्कालीन रघुवर सरकार ने बनायी थी स्थानीयता पर नीति

इससे पहले झारखंड की रघुवर दास सरकार ने एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए स्‍थानीय नीति को मंजूरी दे दी थी. तत्कालीन सरकार ने कहा था कि राज्‍य में अब 1985 या उससे पहले से रहनेवाले लोग स्‍थानीय माने जायेंगे और उन्‍हें राज्‍य सरकार के स्‍थानीयता से संबंधित सभी प्रावधानों का लाभ मिलेगा.

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