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अब मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट मांग रहे निजी विद्यालय, अभिभावकों की परेशानी बढ़ी

नये नामांकन में कई तरह के कागजात मांग रहा विद्यालय प्रबंधन

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Ranchi: राजधानी के निजी स्कूलों में फिलहाल दाखिले की होड़ लगी है. पहली कक्षा से लेकर 11वीं कक्षा तक के लिए स्कूलों में दाखिले हो रहे हैं. सीबीएसइ से संबद्ध विद्यालयों में नामांकन के लिए विद्यार्थियों का मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट मांगा जा रहा है. इसमें चिकित्सकों से यह लिखवा कर देना पड़ रहा है कि बच्चे अथवा बच्चियां स्कूल में दाखिले को लेकर पूर्ण रूप से स्वस्थ हैं, जिसकी जांच योग्य चिकित्सकों ने की है. मेडिकल फिटनेस के लिए अभिभावकों को चिकित्सकों के यहां चक्कर लगाना पड़ रहा है.

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500 से एक हजार रुपये तक ले रहे हैं डॉक्टर

अधिकतर चिकित्सक फीस लेकर मेडिकल सर्टिफिकेट जारी कर रहे हैं, जिसके लिए बच्चे को ले जाना जरूरी है. निजी प्रैक्टिस करनेवाले चिकित्सक पांच सौ रुपये से एक हजार रुपये तक शुल्क ले रहे हैं. दाखिले के लिए विद्यालय का स्कूल लिविंग सर्टिफिकेट (एसएलसी), ट्रांसफर सर्टिफिकेट, पूर्व की कक्षा का अंक पत्र और पास सर्टिफिकेट मांगा जा रहा है. सर्वोच्च न्यायालय ने जहां स्कूलों में दाखिले को लेकर आधार कार्ड की अनिवार्यता समाप्त करने की बातें कही थी, वहां स्कूलों द्वारा न सिर्फ बच्चे का, बल्कि उसके माता-पिता का भी आधार नंबर मांगा जा रहा है. इतना ही नहीं अभिभावकों के (माता-पिता) क्वालिफिकेशन का प्रमाण भी स्कूल मांग रहे हैं. 11वीं में दाखिले के लिए तो यह भी परेशानी है कि अभिभावकों को बस स्टॉपेज के बारे में अनिवार्य रूप से फार्म भरना जरूरी किया गया है. इतनी औपचारिकताओं के पूरा होने पर ही नामांकन की प्रक्रिया पूरी मानी जा रही है.

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