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#SAIL नहीं अब Coal India करेगा बोकारो पर्वतपुर कोल ब्लॉक का संचालन, PMO ने साफ किया रास्ता

Ranchi: झारखंड के बोकारो जिले में पांच सालों से बंद पड़े पर्वतपुर कोल ब्लॉक के एक बार फिर से शुरू होने का रास्ता साफ हो चला है. पांच सालों से बंद पड़े इस कोल ब्लॉक की वजह से क्षेत्र में रोजगार की गंभीर समस्या हो गयी थी.

अभी तक इसके संचालन का जिम्मा सेल (स्टील ऑथरिटी ऑफ इंडिया) के पास था. लेकिन अब कोयला मंत्रालय ने कोल इंडिया को इसके प्रबंधन एवं प्रचालन के साथ-साथ देखरेख का जिम्मा दे दिया है. भारत सरकार की तरफ से इस बाबत गजट अधिसूचना प्रकाशित कर दी गई.

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आदेश में कहा गया है कि पर्वतपुर कोल ब्लॉक, जो केंद्रीय कोल खनन क्षेत्र के अंतर्गत आता है, उसके संचालन का काम भारत सरकार की कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड (सीआइएल) को दिया जाता है. इस परियोजना के शुरू होने का असर वहां के आस-पास 12 गांवों के साथ पूरे राज्य पर होगा.

पर्वतपुर कोल ब्लॉक करीब नौ वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है. खनन शुरू होने से एक साथ करीब 2000 लोगों को फिर से रोजगार मिल सकेगा. इस कोल ब्लॉक में कोयला जमीन से काफी नीचे है. ऐसे में ओपनकास्ट परियोजना बनाने में काफी ज्यादा खर्च आयेगा. इसलिए बताया जा रहा है कि यह कोलियरी इंक्लाइन (अंडरग्राउंड) बनेगी. अंडरग्राउंड उत्पादन होने से गांव की आबादी पर भी असर नहीं पड़ेगा.

अभी पर्वतपुर कोल ब्लॉक की देखरेख सेल (स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड) के अधिकारी कर रहे हैं. लेकिन उनका कहना है कि अबतक उन्हें इस बारे कोई जानकारी नहीं दी गयी है.

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खनिज कानून 2020 की वजह से हुआ संभव

कोल ब्लॉक आवंटन नीति 2015 की वजह से इस कोल ब्लॉक को सीधे तौर पर बिना नीलामी कोल इंडिया को देना संभव नहीं था. इसे शुरू करने के लिए कई बार स्थानीय स्तर पर भी पहल की गई. पूर्व मंत्री अमर बाउरी ने केंद्रीय कोयला मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इसकी सिफारिश की थी.

इधर, राष्ट्रपति के हस्ताक्षर से खनिज कानून संशोधन अध्यादेश 2020 लाकर कानून में इस बात का संशोधन किया गया कि वैसे केंद्र व राज्य सरकार के उपक्रम, जो खनिज का कारोबार करते हैं, उन्हें भी कोल ब्लॉक का आवंटन सीधे तौर पर किया जा सकेगा.

जबकि पहले इस्पात और बिजली कारखाने के संचालकों को प्राथमिकता दी जाती थी. नए अध्यादेश से यह ब्लॉक सीआइएल को देना आसान हो गया.

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