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वरिष्ठ नेताओं के बयान का इशारा, झारखंड भाजपा के भीतर सब ठीकठाक नहीं

अमित शाह के दौरे से पहले पार्टी का अंदरुनी मतभेद आया सामने

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Faisal Anurag

भारतीय जनता पार्टी के भीतर की बेचैनी अब बाहर आने लगी है. भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के झारखंड दौरे के ठीक पहले पार्टी के भीतर का विवाद परोक्ष रुप से सामने आ गया है. पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने एक अखबार को दिये इंटरव्यू में अपनी नाराजगी जतायी है. वहीं कैबिनेट मंत्री सरयू राय ने भी ट्वीट कर और एक अखबार में बयान देकर सरकार और व्यक्ति के प्रति अपनी नाराजगी प्रकट की है. सरयू राय के हवाले से छपी एक खबर में उनकी नाराजगी मुख्यमंत्री से साफ झलकती है. उन्होंने कहा है कि पानी अब सिर से उपर चला गया है. मुख्यमंत्री के पास बैठक के लिए समय नहीं है. जिस कारण कई प्रोजेक्ट रूके पड़े हैं. उन्होंने आरोप लगाया है कि विकास की कई योजनाओं को रोका जा रहा है. वे जमशेदपुर में टाटा स्टील और निकायों के बीच जारी अधिकार के लिए विवाद पर टिप्पणी कर रहे थे. उन्होंने कहा है कि सांसद, विधायक और सरकार के 117 प्रोजेक्ट को टाटा स्टील ने रोक रखा है. श्री राय ने पत्रकारों से बात करते हुए यहां तक कह दिया है कि मुख्यमंत्री, मंत्री तो आते-जाते रहते हैं. संस्थाओं की मर्यादा बनी रहनी चाहिए. श्री राय इसके पहले भी सरकार पर परोक्ष रुप से अपनी नाराजगी जाहिर करते रहे हैं.

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सरयू राय ने भाजपा के नजरिए से अलग अपना रूख प्रकट करके हुए रवींद्र राय के पत्र विवाद की पूरी तहकीकात कराने की मांग कर, भी भाजपा नेतृत्व और सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है. आमतौर पर भाजपा प्रवक्ता और नेता, बाबूलाल मरांडी द्वारा जारी रवींद्र राय के पत्र को गलत साबित कर श्री मरांडी से ही उसकी सच्चाई जाहिर करने की मांग की है. इस पत्र में भाजपा के अनेक नेताओं पर विधायकों के खरीद फरोख्त में धन राशि दिए जाने की बात कही गयी है. इस पत्र के पब्लिक डोमेन में आने के बाद से ही भाजपा पत्र को फर्जी साबित करने में लगी है. साथ ही बाबूलाल मरांडी से मांग कर रहे हैं कि पत्र की सत्यता प्रमाणित करे. श्री राय द्वारा यह कहने पर की विधायक दलबदल मामले में रवींद्र राय के कथित पत्र की पूरी जांच कर सत्यता को सामने लाने की जरूरत है. सरयू राय का यह बयान भाजपा की परेशानी को बढ़ा रहा है. यह बयान तब दिया गया है जब भाजपा अध्यक्ष श्री शाह रांची आने को है. इससे जाहिर होता है कि सरकार और पार्टी का विक्षुब्ध नेता मुखर हो रहा है. यह स्थिति राज्य नेतृत्व की सेहत के लिए खतरे का संकेत भी माना जा रहा है.

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सरयू राय ने 3 जुलाई को भी एक ट्वीट किया था. जिससे राजनीतिक गलियारे में हलचल मची हुई है. हालांकि उसमें प्रत्यक्ष तौर पर किसी का नाम नहीं लिया गया है. लेकिन राजनीतिक जानकार उस ट्वीट के राजनीतिक संदेश को ही पढ़ रहे हैं. इस ट्वीट में श्री राय ने कहा है: जरूरी नहीं कि पंक्ति में सबसे आगे खड़ा व्यक्ति लीडर ही हो. वह अग्रेसर भी हो सकता है, जरूरी यह भी नहीं कि वह नायक ही हो,  वह गटनायक भी हो सकता है. उसकी क्षमता, सोच, बुद्धिमत्ता, कार्य संस्कृति, आचरण, सामूहिक जिम्मेदारी का भाव, अनुकरण योग्य क्रियाकलाप से ही पता चलता है कि वह क्या है?  राजनीतिक विश्लेषक इस ट्वीट को झारखंड भाजपा और सरकार के अगली पंक्ति में खड़े लोगों से जोड़ करके देख रहे हैं.

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इन बयानों और एक ट्वीट के बाद भाजपा के भीतर जो घबराहट है उसे महसूस किया जा सकता है. राजनीतिक प्रेक्षकों का मानना है कि भाजपा में सरकार और पार्टी में अनेक वरिष्ठ नेता संतुष्ट नजर नहीं आ रहे हैं. व्यक्तिगत बातचीत में उनकी नाराजगी प्रकट होती रहती है और श्री शाह के आगमन के पहले उसके प्रकट होने से साफ है कि भाजपा इसे नजरअंदाज नहीं कर सकती. भाजपा के कार्यकर्ताओं को लेकर अर्जन मुंडा कह चुके हैं कि उनमें भी असंतोष है और यह विभिन्न रूपों में जाहिर भी होने लगा है.

सवाल है कि भाजपा क्या अपने वरिष्ठ नेताओं की इस नारजगी को गंभीरता से लेगी या उसे नजरअंदाज करते हुए उन्हें आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, यशवंत सिन्हा की तरह मार्गदर्शक मंडली में भेज देगी. यह राजनीति गलियारे में चर्चा का विषय बना हुआ है. खासकर बाबूलाल मरांडी ने जिस पत्र को जारी किया है और जिसमें भाजपा के शीर्ष नेताओं पर भी गंभीर मामले का उल्लेख है,  उसकी उच्चस्तरीय जांच से सरकार और पार्टी बच नहीं सकती है. भाजपा की सेहत के लिए भी यह जरूरी है कि वह उस पत्र की निष्पक्ष जांच कराएं, क्योंकि दलबदल के समय से ही अनेक बातें पब्लिक डोमेन में तैरती रही हैं.

(लेखक न्यूज विंग के वरिष्ठ संपादक हैं और ये उनके निजी विचार हैं.)

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