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राज्य में चल रहे 145 से अधिक दिव्यांग शिक्षण-प्रशिक्षण संस्थानों को जारी किया गया नोटिस

राज्य निःशक्तता आयुक्त के आदेश पर हो रही कार्रवाई

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Ranchi : राज्य भर में चल रहे 145 से अधिक दिव्यांग शिक्षण-प्रशिक्षण संस्थानों की जांच को लेकर सरकार की तरफ से नोटिस जारी किया गया है. सरकार का मानना है कि झारखंड में कई फर्जी संस्थान चल रहे हैं, जिनकी जांच जरूरी है. दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम के नियमों के तहत यह कार्रवाई की जा रही है. नि:शक्तता आयुक्त कार्यालय की तरफ से सभी संस्थानों से निबंधन के दस्तावेज मांगे गये हैं. इसमें स्पष्ट किया गया है कि सक्षम पदाधिकारी की तरफ से निबंधित नहीं रहनेवाले संस्थानों को बंद कर दिया जायेगा. ऐसे संस्थान दिव्यांगजनों के लिए छात्रावास, बीएड संस्थान और अन्य कार्यक्रम संचालित नहीं कर सकते हैं. कागजी और फर्जी संस्थानों की पहचान को लेकर यह कार्रवाई की जा रही है. एक महीने के अंदर सभी संस्थानों की जांच का काम पूरा कर लिया जायेगा.

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मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम 1987 के तहत निबंधित संस्थानों को रखा गया है जांच से मुक्त

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सरकार की तरफ से मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम (सेरेब्रल पाल्सी) 1987 के तहत निबंधित संस्थानों को जांच से मुक्त रखा गया है. इसमें दीपशिखा जैसे संस्थान शामिल हैं, जहां मानसिक रूप से अस्वस्थ बच्चों की शिक्षा-दीक्षा दी जा रही है. इसके अलावा केंद्र सरकार से जुड़े संस्थान भी जांच के दायरे में नहीं आयेंगे. इसमें केंद्रीय मन:चिकित्सा संस्थान रांची (सीआईपी), रिनपास रांची, राजकीय मूक-बधिर स्कूल हरमू और देवघर का एक सरकारी संस्थान शामिल है. इनके खिलाफ किसी तरह की कोई जांच नहीं की जायेगी.

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