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2014 में तीन में से एक भी सीट नहीं जीतने वाली आजसू की नजर अब आठ लोकसभा सीटों पर

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  • प्रेशर पॉलिटिक्स का खेल जारी, बढ़ते राजनीतिक तापमान की तपिश भांप रही आजसू
  • इस माह आजसू की संसदीय बोर्ड की बैठक में आठ लोकसभा सीटों पर होगा मंथन

Ravi Aditya

Ranchi: मन डोले… मेरा तन डोले… दिल का गया करार रे.. की तर्ज पर सत्ता दल की सहयोगी आजसू का भी मन डोल रहा है. जाएं तो जाएं कहां…. यही असमंजस की स्थिति आजसू में बनी हुई है. दूसरे राज्यों के चुनाव परिणाम और राज्य में बनते-बिगड़े समीकरण देखकर फिलहाल आजसू चुनावी मौसम पूर्वानुमान भांपने ली पार्टी बनी हुई है. एक ओर भाजपा और दूसरी ओर कांग्रेस. पिछले आम चुनाव में एक भी लोकसभा सीट नहीं जीतेने वाली आजसू की नजर अब आठ लोकसभा सीटों पर है.

इसी महीने होने वाली पार्टी की संसदीय बोर्ड की बैठक में इन सीटों पर गहन मंथन किया जायेगा. पार्टी सूत्रों के अनुसार रांची, हजारीबाग, गिरिडीह, गोड्डा, चतरा, जमशेदपुर, खूंटी और लोहरदगा सीट पर पार्टी का जोर है.

आजसू का प्रेशर पॉलिटिक्स भी जारी

आजसू ने सरकार के खिलाफ प्रेशर पॉलिटिक्स का भी खेल जारी रखा है. पार्टी सुप्रीमो सुदेश महतो कई बार खुले मंच से स्थानीय नीति पर विरोध जता चुके हैं. भूमि अधिग्रहण बिल पर आजसू को आपत्ति है. पार्टी ने जनसंवाद के माध्यम से सरकार को नियोजन नीति का भी ड्राफ्ट सौंपा था. इस मसलों को लेकर पार्टी ने एक लाख से अधिक पोस्टकार्ड मुख्यमंत्री रघुवर दास को भेजा था. इसके अलावा पिछड़ों के लिए 73 फीसदी आरक्षण की भी मांग की है. जिसमें पिछड़ों को 27 फीसदी, अनुसूचित जनजाति को 32 फीसदी और अनुसूचित जाति को 14 फीसदी आरक्षण देने की मांग है.

सत्ता से चिपके रहने का कलंक धोना चाहती है आजसू

पार्टी सूत्रों की मानें तो आजसू सत्ता से चिपके रहने का कलंक भी धोना चाहती है. दूसरी तरफ पूरे राज्य में आजसू अपनी पहचान भी स्थापित करना चाह रही है. आदिवासी वोट बैंक पर भी आजसू की पैनी नजर है. फिलहाल पार्टी का जनाधार बढ़ाने पर जोर है. स्वराज स्वाभिमान यात्रा चल रही है. इस यात्रा के जरिये 5000 गांवों तक पहुंचने का लक्ष्य है. इसके तहत अबतक पार्टी 1000 गांवों तक पहुंच पाई है. इस यात्रा के तहत बूथ स्तर से लेकर प्रखंड स्तर तक पार्टी को मजबूत करने की कवायद है.

आजसू के लिए अब भी तीन लोकसभा सीट आसान नहीं

आजसू के लिये रांची, हजारीबाग और गिरिडीह सीट आसान नहीं है. खासकर रांची लोकसभा सीट काफी चुनौतीपूर्ण है. आजसू सुप्रीमो रांची लोकसभा के अंतगर्त आने वाले सिल्ली विधानसभा सीट से दो बार हार चुके हैं. वहीं हटिया विधानसभा सीट पर पकड़ ढीली हो गई है. आजसू के पूर्व विधायक नवीन जायसवाल फिलहाल भाजपा से विधायक है. इस हिसाब से आजसू को काफी चुनौती मिल सकती है. वहीं पिछले चुनाव में हजारीबाग सीट पर आजसू उम्मीदवार तीसरे नंबर पर और गिरिडीह से आजसू उम्मीदवार यूसी मेहता चौथे नंबर पर रहे थे.

पिछले लोकसभा में आजसू की क्या थी स्थिति

रांची सीट

रामटहल चौधरी (भाजपा)- 448720 वोट
सुबोधकांत सहाय (कांग्रेस)- 249246 वोट
सुदेश महतो (आजसू)- 142560 वोट
अमिताभ चौधरी (जेवीएम)- 67712 वोट

हजारीबाग सीट

जयंत सिन्हा (भाजपा)- 406931 वोट
सौरभ नारायण सिंह (कांग्रेस)- 247803 वोट
लोकनाथ महतो (आजसू)- 156186 वोट
अरूण कुमार मिश्र(जेवीएम)- 30408 वोट

गिरिडीह

रवींद्र पांडेय (बीजेपी)- 391913 वोट
जगन्नाथ महतो (झामुमो)- 351600 वोट
सबा अहमद (झाविमो)- 57380 वोट
उमेश चंद्र मेहता (आजसू)- 55531 वोट

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