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कंबल तो दूर की कौड़ी, झारखंड में बेघर लोगों के लिए विंटर एक्शन प्लान ही नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने दिया आदेश, जल्द बनायें विंटर एक्शन प्लान

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Ranchi: कड़ाके की ठंड में कंबल बांटना तो दूर की कौड़ी हो गई है. हकीकत यह है कि कड़ाके की ठंड में झारखंड के  गरीब बेघरों के लिये कोई विंटर एक्शन प्लान है ही नहीं. गरीब कड़कती ठंड में गरीब कहां बसेरा करेंगे, इसका कोई स्पष्ट जवाब सरकार के पास भी नहीं है. इस मसले पर सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस मदन बी लोकुर की बेंच ने आदेश दिया है कि झारखंड, जम्मू कश्मीर सहित अन्य राज्यों के शहरी बेघर गरीबों के लिए जल्द ही एक्शन प्लान फाइनल किया जाये. साथ ही कहा कि यह बहुत आश्यचर्यजनक है कि झारखंड के पास विंटर एक्शन प्लान ही नहीं है. उम्मीद करते हैं कि कुछ दिन के अंदर बेघरों के लिए झारखंड विंटर एक्शन प्लान बना ले.

राज्य सरकार ने अब तक ये भी शुरू नहीं किया

  • रैन बसेरा, बस स्टैंड, बाजार, रेलवे स्टेशन के समीप अलाव की व्यवस्था नहीं
  • अब तक जिलों को फंड भी नहीं भेजा गया
  • अस्पतालों में ठंड से पीड़ित मरीजों  के लिए विशेष व्यवस्था नहीं
  • कंबल का वितरण नहीं
  • कुहासे से निपटने के लिए नेशनल हाइवे में प्रोपर ट्रैफिक की व्यवस्था नहीं
  • ठंड पीड़ित लोगों पर नजर रखने के लिए पीसीआर वैन की व्यवस्था नहीं
  • एनडीआरएफ से अब तक कोई संपर्क नहीं

आपदा प्रबंधन एक्ट में क्या है प्रावधान

वर्ष 2005 में आपदा प्रबंधन एक्ट पास हुआ था. इसके तहत राष्ट्रीय, राज्य और जिला स्तर पर रीलिफ फोर्स के गठन का प्रावधान है. एक्ट के अध्याय दो में यह भी प्रावधान है कि राज्यों में स्टेट डिजास्टर अथॉरिटी का होना जरूरी है. झारखंड में इसकी कवायद शुरू तो हुई पर यह क्रियाशील नहीं हो पायी. आपदा विभाग में एक सचिव, एक संयुक्त सचिव और कुछ अधिकारियों-कर्मचारियों के भरोसे ही प्रबंधन टिका हुआ है. आपदा के समय झारखंड को सिर्फ एनडीआरएफ और पब्लिक सेक्टर की कंपनियों का ही भरोसा है.

धरी की धरी रह गयीं ये योजनाएं

आपदा प्रबंधन के लिए कई योजनाएं बनायी गयीं. लेकिन सभी धरी की धरी रह गईं. पहले चरण में 132 लोगों की टीम तैयार करनी थी. इसमें भूतपूर्व सैनिकों को शामिल किया जाना था. एनडीआरएफ की टीम इन्हें प्रशिक्षण देती. मत्स्य मित्रों को आपदा मित्र बनाना था. लगभग 3600 मत्स्य मित्रों को प्रशिक्षण देने की योजना बनायी गयी थी. ये सभी योजनाएं धरी की धरी रह गयीं.

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